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भारत मे नेपाली छात्रों की सुरक्षा और सम्मान का सवाल हर तरफ चर्चा में

 
जनकपुर । ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (कीट्स) विश्वविद्यालय में एक नेपाली छात्रा की संदिग्ध मृत्यु और इसके बाद नेपाली छात्रों पर हुए कथित दमन ने भारत में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। इस घटना ने न केवल ओडिशा बल्कि पूरे भारत को झकझोर दिया है, जिसके चलते संसद से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। राजनीतिक दल, छात्र संगठन, नागरिक समाज और मीडिया इस मामले में जांच और न्याय की मांग को लेकर एकजुट हो गए हैं।
घटना का विवरण
पिछले रविवार की शाम को कीट्स के हॉस्टल में नेपाली छात्रा प्रकृति मृत पाई गई थीं। उनकी मृत्यु को संदिग्ध मानते हुए नेपाली छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जांच की मांग की थी। लेकिन इसके जवाब में प्रशासन ने सुरक्षा गार्ड और बाउंसरों के जरिए सैकड़ों नेपाली छात्रों को हॉस्टल से जबरन निकाल दिया, कथित तौर पर उनकी पिटाई की और उन्हें रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया। छात्रों का कहना है कि प्रकृति ने विश्वविद्यालय प्रशासन को बार-बार उत्पीड़न की शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सड़कों पर विरोध
इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध की लहर शुरू हो गई। विपक्षी दल राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े युवा और छात्र संगठनों ने शनिवार को कीट्स के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया और विश्वविद्यालय के संस्थापक अच्युत सामंत का पुतला जलाया। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को शर्मनाक बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। भुवनेश्वर में स्थानीय छात्र संगठनों ने भी लगातार प्रदर्शन जारी रखा है, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन दबाव में आ गया है।
संसद में गूंज
ओडिशा विधानसभा में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा। विपक्षी बीजू जनता दल (बीजेडी) और कांग्रेस ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसदों ने भी इसकी निंदा की। बीजेडी सदस्य गणेश्वर बोहरा और बीजेपी के बाबू सिंह ने विश्वविद्यालय के संस्थापक अच्युत सामंत को जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ताराप्रसाद बाहिनीपति ने नेपाल के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाली महिला कर्मचारी पर भी कार्रवाई की मांग उठाई।
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने विधानसभा में बताया कि ओडिशा पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और राज्य सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। हालांकि, न्यायिक जांच की मांग को लेकर उनकी ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर विपक्ष ने शुक्रवार को सदन का बहिष्कार किया।
मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
‘द स्टेट्समैन’ के भुवनेश्वर संस्करण के संपादक रवि ने कहा कि इस घटना ने स्थानीय स्तर पर व्यापक आक्रोश पैदा किया है। प्रिंट और टेलीविजन मीडिया ने इसे प्रमुखता से कवर किया और विश्वविद्यालय प्रशासन व राज्य सरकार से सवाल उठाए। बीबीसी के पत्रकार संदीप साहू ने बताया कि नेपाली छात्रों की सुरक्षा और सम्मान का सवाल अब हर तरफ चर्चा में है।
भारतीय मीडिया ने भी इसकी कड़ी निंदा की है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपने संपादकीय में विश्वविद्यालयों से “भद्र और दयालु” होने की अपील की, जबकि ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने इसे भारत के लिए आत्ममंथन का मौका बताया। चर्चित पत्रकार रवीश कुमार ने अपने यूट्यूब चैनल पर कीट्स प्रशासन और ओडिशा पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए और इस मामले में विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की।

विश्वविद्यालय और पुलिस की कार्रवाई

बढ़ते दबाव के बीच कीट्स प्रशासन ने माफी मांगी है। संस्थापक, उपकुलपति और रजिस्ट्रार ने कई बार सार्वजनिक रूप से खेद जताया। भुवनेश्वर पुलिस ने भी कार्रवाई तेज की और इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज किया है।

नेपाल सरकार की प्रतिक्रिया

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया पर इस घटना की निंदा की और इसे “अत्यंत गलत” बताया। उनके हस्तक्षेप के बाद ही ओडिशा सरकार ने सक्रियता दिखाई। नेपाल की विदेश मंत्री आरजु राणा देउवा ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहनचरण माझी से फोन पर बात कर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास ने भी दो कन्सुलर अधिकारियों को भुवनेश्वर भेजा है, जो स्थानीय प्रशासन और छात्रों के साथ समन्वय कर रहे हैं।

भारत सरकार का रुख

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नेपाली छात्रों की सुरक्षा और भलाई उनकी प्राथमिकता है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने बताया कि ओडिशा सरकार की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। मंत्रालय नेपाल सरकार, राज्य प्रशासन और कीट्स अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।
निष्कर्ष

कीट्स में हुई इस घटना ने भारत-नेपाल संबंधों पर भी सवाल उठाए हैं। नेपाली छात्रों के साथ हुए दुर्व्यवहार और एक छात्रा की संदिग्ध मृत्यु ने न केवल शैक्षणिक संस्थानों की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भारत की कूटनीतिक संवेदनशीलता को भी कठघरे में ला दिया है। यह मामला अब केवल ओडिशा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और विश्वास का मुद्दा बन गया है।

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