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नेपाली छात्रों को ही कॉलेज छोड़ने को क्यों कहा गया ? केआईआईटी विवाद की ताजा जानकारी

 
१४ फागुन २०८१, बुधवार, काठमांडू/भुवनेश्वर
भारत के ओडिशा राज्य में स्थित कालिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) में नेपाली छात्रा प्रकृति लम्साल की मृत्यु और उसके बाद पैदा हुए विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस मामले की जांच के लिए गठित ओडिशा सरकार की उच्चस्तरीय समिति ने कॉलेज के संस्थापक अच्युत सामंत और अन्य अधिकारियों से पूछताछ तेज कर दी है। समिति ने अब चार और अधिकारियों को बयान के लिए बुलाया है, जिनमें अनुशासन विभाग के प्रमुख पीके पटनायक, निर्देशक संहिता मिश्रा, आंतरिक कमेटी की प्रमुख इप्सिता सत्पथी और सहायक निर्देशक स्मारिका पाटील शामिल हैं।
इससे पहले अच्युत सामंत सहित सात शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ हो चुकी है। जांच समिति, जिसकी अगुवाई ओडिशा के अतिरिक्त मुख्य सचिव सत्यब्रत साहू कर रहे हैं, ने सवाल उठाया कि आखिर नेपाली छात्रों को ही कॉलेज छोड़ने का नोटिस क्यों जारी किया गया? इसके अलावा, प्रकृति की ओर से एक महीने पहले दर्ज की गई दुर्व्यवहार की शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इस पर भी अधिकारियों से जवाब मांगा गया है। नेपाली छात्रों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठे हैं।
क्या है पूरा मामला?
बीते रविवार को बुटवल की २० वर्षीय छात्रा प्रकृति लम्साल अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाई गई थीं। प्रकृति ने कॉलेज के ही एक छात्र अड्विक श्रीवास्तव पर बार-बार दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की। प्रकृति की मौत के बाद गुस्साए छात्रों ने जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने इसे दबाने के लिए सख्ती बरती। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और प्रशासन के लोगों ने छात्रों के साथ मारपीट की और अपशब्दों का इस्तेमाल किया।
अब तक की कार्रवाई
प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में शामिल दो सुरक्षाकर्मियों सहित पांच लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, हालांकि उन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। कुछ कॉलेज कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, वहीं अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले प्राध्यापकों ने माफी मांगते हुए वीडियो जारी किया है। ओडिशा सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच शुरू की है, जबकि भारत सरकार ने भी इसमें रुचि दिखाई है।
नेपाल और ओडिशा में हलचल
इस घटना ने नेपाल और ओडिशा, दोनों जगह राजनीतिक गलियारों को गर्म कर दिया है। नेपाल की संसद में भी यह मुद्दा उठा, वहीं ओडिशा विधानसभा में विपक्षी दलों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। नेपाली छात्रों का कहना है कि इस घटना के बाद वे कॉलेज में सुरक्षित महसूस नहीं करते। कई छात्र वापस नेपाल लौट चुके हैं, और जो बचे हैं, वे आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
आगे क्या?
केआईआईटी के संस्थापक अच्युत सामंत ने पहले ही माफी मांग ली है और छात्रों से वापस आने की अपील की है, लेकिन जांच समिति का रुख सख्त है। यह सवाल अब भी अनुत्तरित है कि आखिर नेपाली छात्रों को ही निशाना क्यों बनाया गया ? आने वाले दिनों में जांच के नतीजे इस विवाद को नई दिशा दे सकते हैं।
Photo Courtesy KIIT

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