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गुल्जार–ए–अदब की ५ सौ८३वीं श्रृङखला की मासिक गजल गोष्ठी सम्पन्न

 

नेपालगञ्ज/(बाँके) पवन जायसवाल ।बाँके जिला की नेपालगञ्ज में रही अदबी संगठन “गुल्जार–ए–अदब” की ५ सौ८३ वींं मासिक कवि गोष्ठी “तरही नशिस्त” फाल्गुन १७ गते शनिवार सम्पन्न हुआ ।

नेपालगञ्ज निवासी वरिष्ठ उर्दू शायर अब्दुल लतीफ शौकके अध्यक्षता में महेन्द्र पुस्तकालय नेपालगञ्ज की सभा हाल में सम्पन्न हुआ ।

वह कार्यक्रम की तरही मिसरा रही थी दिवाना है दिवाने से पर्दा न करेंगेवह कार्यक्रम में विभिन्न उर्दू शायर लोगों ने अपनी अपनी उत्कृष्ट रचनाएँ प्रस्तुत किये थे । जिस में वरिष्ठ उर्दू शायर अब्दुल लतीफ शौकने –“हम कर के मोहब्बत तुम्हें रुसवा न करेंगे”, “सौ गम भी अगर दोगे तो शिकवा न करेंगे”, सैय्यद अशफाक रसूल हाश्मी ने–“तोडेंगे अगर दिल तो वह अच्छा न करेंगे, हम ऐसी मोहब्बत से भी पर्दा नकरेंगे”, गुल्जारअदब के सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशी ने–“कमजरफ से दुःख दर्द का चर्चा न करेंगे, हम इजज्ते नामुस को रुसवा न करेंगे”, इसी तरह वह कार्यक्रम में नूरुल हसन राई ने,–“करता ही रहेगा मेरा दिल जिक्र हमेशा, गुल्शन तेरी यादों कि महेकते ही रहेंगे”, मोहम्मद आरीफ अन्सारी ने,–“मतलब के लिए कोई भी सौदा न करेंगे, माँबाप मेरी जान हैं, रुसवा न करेंगे”, मेराज अहमद हिमालयने,–“मर जाऐंगे ईमान का सौदा न करेंगे, हम तेरी मोहब्बत को भी रुसवा न करेंगे”, समीर अली बेहना ने,–“पढा है जब से मैने हजरते अय्युब का किस्सा, अहद कर लिया की तुझ से कोइ शिकवा न करेंगे शिर्षक की गजलें वाचन किया ।

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गुल्जारअदबअदब के अध्यक्ष वरिष्ठ शायर अब्दुल लतीफ शौक नेउर्दू भाषा की गजल मुस्लिम समुदाय की मात्र नहोकर सम्पूर्ण मानव जाति की रही है बताया । 

सद्भाव की शहर नेपालगञ्ज में उर्दू में गजल लिखना और वाचन करनेवाले वैश्य समुदाय के श्यामलाल और मुरली बैश्य की बारे में भी चर्चा किया ।

उर्दू भाषा और साँस्कृतिक उत्थान की साथ सामाजिक उत्थान में मद्दत पहुचानेवाले वो युवा पुस्ता को अग्रसर होने के लिये वरिष्ठ शायर अब्दुल लतीफ शौक ने आह्वान किया है ।

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कार्यक्रम में प्राध्यापक मकसूद अहमद रंगरेज ने गुल्जारअदबकी मासिक गजल गोष्ठी ने साँस्कृतिक उत्थान की साथ स्थानीय साहित्यिक परम्परा को लागे बढाने में की  योगदान की प्रशंसा की ।

नेपालगञ्ज में होनेवाली कार्यक्रम में साहित्यिक सौन्दर्य और शायरों की प्रतिभा उजागर करने की जगह की रूप में लाने के लिये समीर अली बेहना ने जोड दिया ।

वह कार्यक्रम में हाजी जाकीर हुसैन, आशिम सरवर, अरमान अन्सारी, अनस अन्सारी लगायत व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही थी ।कार्यक्रम में सहभागी अन्य कवि शायरों ने भी अपनी अपनी गजलें प्रस्तुत किये थे , मासिक गजल गोष्ठी की सञ्चालन उर्दू साहित्यकार गुुल्जारे अदब के सचिव मोहम्मद मुस्तफा हसन कुरैशी ने किया था मोहम्मद आरीफ अन्सारी ने जानकारी कराया ।

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