नेपाल॒॒-भारत द्विपक्षीय सम्बन्ध को मजवुत करने के लिये मैत्री मोटर रैली का आयोजन
विनय कुमार, फ्रेब्रुअरी २३ । इन्डो–नेपाल फ्रेन्डसिप मोटर रैली का आयोजन हो रहा है । आज सोमवार को नेपाल–भारत पुस्तकालय में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में नेपाल अटोमोबाईल स्पोर्टस् एसोसिएसन(नासा) ने यह जानकारी दी है। ‘फोर नेचर, एडभेन्चर एण्ड कल्चर’ मुल नारा के साथ मोटर रैली २०१५ का आयोजन होने जा रहा है । भारत के उडीसा स्थित कालिङ्गा मोटर स्पोर्टस् क्लव के प्रस्ताव में नेपाल के (नासा) के सहकार्य में यह रैली सुरु किया जा रहा है । कुछ महिना आगे काठमाडौँं में नेपाल–भारत यातायात सचिव स्तरीय बैठक में इन्डो–नेपाल मोटर भैकिल अग्रिमेन्ट हुआ था । फ्रेब्रुअरी २७ मे उडिषा के पुरी से शुरु होने वाला रैली के पहला चरण भूवनेश्वर–झारखण्ड–पटना–जोगवनी–विराटनगर–धराण–वर्दिवास–सिन्धुली–धुलिखेल होते हुए काडमाँडू पहूँचेगा । इसी तरह त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला से शुरु होने वाला दुसरे चरण मे मुग्लीङ्ग–पोखरा–तानसेन–बुटवल–लु्म्बीनी–कोहलपुर–धनगढी–महेन्द्रनगर होते हुए नयां दिल्ली मे पहूचकर मार्च ८ को समापन होगा । ३० मोटर मे ११० व्यक्ति तक की सहभागिता होगी और यह रैली १० दिनतक चलेगा ।
रैली मे एम्बुलेन्स, मेकानिकल और मिडिया टिम की सहभागिता रहेगी । मिडिया और सुरक्षा का संयोजन काठमाण्डू स्थित भारतीय दुतावास करेगा । रैली में होनेवाला अधिकांश खर्च कालिङ्गा मोटर स्पोर्टस् क्लव करेगें तो विराटनगर, धरान धुलिखेल, पोखरा में स्वागत, काठमाण्डौ और धरान के ‘फ्ल्याग डाउन’ तथा काठमाण्डू के आवास व्यवस्थापन का जिम्मा (नासा) का होगा । एफआइए के सदस्य रहे नेपाल के नासा तथा मोटर स्पोर्टस् मे विश्व स्तर के पहिचान बनाए हूए भारत के (एफएमएससिआइ) के सदस्य (केएमएससि) के यह रैली को अन्तराष्ट्रीय इभेन्ट के रुप मे विकास करने का प्रयत्न रहा है । भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी के एतिहासिक नेपाल भ्रमण के बाद नेपाल और भारत बीच के द्विपक्षीय सम्बन्ध और जनस्तर के सम्बन्ध को मजवुत करने के लिए यह रैली का आयोजन किया गया है । पुरी और काठमाण्डू दोनो शहर तिर्थालुओं के लिए प्रमुख केन्द्र होने से यह रैली का विशेष महत्व है । बुद्ध ने बुद्धत्व प्राप्त किए स्थल बोधगया और बुद्ध जन्मस्थल लुम्बिनी को जोरने वाले बुद्ध माग को भी इस यात्रा से महत्व बढेगा । ‘प्रथम भारत–नेपाल मैत्री मोटर रैली २०१५’ उपर भारतीय महामहिम राजदुत श्री रञ्जित रे, गोविन्द भट्टराई, मेघराज पौड्याल, दशरथ रिजाल नें प्रकास डाला था ।

