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मधेशियों के स्वाभिमान, सम्मान और शान की पहचान : धोती

 

dhoti rallyश्वेता दीप्ति , काठमाण्डू,२८ फरबरी । धोती एक ऐसा शब्द जो कल तक एक खास समुदाय की ओर से मधेशियों के लिए गाली की तरह प्रयोग किया जाता था । पर आज राजधानी में निकली धोती रैली ने मधेशियों के मनोबल का परिचय दिया है । राजधानी की कुछ सड़कें आज लाल पीले धातियों से रंगी हुई थीं । युवाओं का जोश देखते बन रहा था । नेपालगंज के युवा राजेश जलान के नेतृत्व में यह रैली निकाली गई थी । शहीद गेट से होते हुए माइतीघर, बबरमहल होते हुए बानेश्वर पहुँची थी । यह रैली एक चेतावनी है उनके लिए जिसने पहनावे को गाली बना दिया था ।

किसी भी समुदाय की संस्कृति, उसका पहनावा, उसका रंग रूप उसे हीनता का बोध नहीं कराता पर आज वर्षो. से मधेश इस पीड़ा को झेल रहा था । मनुष्य में मधेशियों की गिनती नहीं होती थी । अधिकार से वंचित एक समुदाय अपने अस्तित्व की पहचान की लड़ाई लड़ रहा था निःसन्देह उनके लिए आज का दिन गौरवान्वित करने वाला है । इतिहास साक्षी बनेगा आज की रैली का । संख्या कम थी पर उनका मनोबल ऊँचा था । जहाँ ३० दलीय मोर्चा अपनी रणनीति तय कर रही है वहीं इस तरह की सांकेतिक रैली मधेशियों की ओर से यह संदेश प्रसारित कर रही है कि अब वो दिन लद गए जब हम अपनी वेशभूषा पर गाली खाते थे । नेताओं ने साथ नहीं दिया शायद वो जनता के साथ जुड़ना ही नहीं चाहते । सड़क से संघर्ष की बात करते jn pradarshanहैं पर आम आदमी से ही भागते हैं । कम से कम इस मायने में उन्हें अरविंद केजरीवाल से सीख लेनी चाहिए । जिसने दरवाजे–दरवाजे घूमकर दिल्ली की दिशा बदल दी । आम मधेशी जनता की भावनाओं की अगर कदर मधेशी नेताओं ने की होती तो आज युवाओं के साथ वो भी होते पर वो तो खुला मंच आह्वान कर रहे थे । अगर वो ये सोचते हैं कि चंद मुट्ठी भर लोगों से उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है तो वो गलत हैं क्योंकि आँधी में एक तिनका भी आँखों में चुभ जाए तो आँखों की रोशनी जा सकती है । इसलिए जिस आन्दोलन की तैयारी में वो लगे हुए हैं वहाँ एक तिनका भी मायने रखता है । गाँधी ने दाण्डी यात्रा की थी जनचेतना के लिए और जनता खुद ब खुद जुड़ती चली गई थी और जो जज्बा लोगों में जगा उसने सदियों की गुलामी को तोड़ फेका । काश मधेशी नेता समझ पाते कि सत्ता, मंच और भाषण अब काम देने वाला नहीं है । उन्हें युवाशक्ति के साथ जुड़ना होगा और उन्हें अपने समकक्ष खड़ा करना होगा । एक नई और पुख्ता शुरुआत हुई है मधेशी युवाओं के द्वारा जो सराहनीय है ।

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