सांसद रघुजी पंत और ज्ञानबहादुर शाही के बीच संसद् में हुई बहस
काठमांडू, चैत ३ – नेकपा (एमाले)के सांसद रघुजी पंत और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा)के प्रमुख सचेतक ज्ञानबहादुर (ज्ञानेन्द्र) शाही के बीच संसद् में बहस हो गई । रविवार (चैत ३) प्रतिनिधि सभा की बैठक में पंत ने राजतंत्र काल की घटनाओं के विषय में अपनी धारणा रखी तो शाही ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया और समय की मांग की ।
पंत ने कहा कि तत्कालीन राजा वीरेन्द्र शाह का भारत के कोलकाता में विभिन्न महिलाओं से संबंध थे । इसी को लेकर भारतीय प्रधानमंत्री ने नेपाल के राजा का तरीका ठीक नहीं बताया था ।
इन बातों को सुनने के बाद शाही ने अपनी बात को रखने के लिए सभामुख देवराज घिमिरे से समय की माग की । इस पर पंत ने जबाव दिया कि जब आपका समय हो तब बोले ।
पंत ने आगे कहा – मैं इतिहास से साबित कर सकता हूं । यदि बहस करनी है तो पहले इतिहास पढ़कर आइए, इस तरह जुमले में बात न करें ।
पंत की बातों को सुनकर शाही ने कहा कि पंत गलत इतिहास सुना रहे हैं ।
इस पर पंत ने कहा मैं बोल रहा हूँ कृपया मुझे ‘डिस्टर्ब’ नहीं करे । शाही ने नाराज होते प्रश्न किया जो मन में आए वो बोला जा सकता है ?
पंत ने जवाब दिया –अगर मैंने गलत इतिहास बताया है, तो इतिहास की किताब से प्रमाण देकर इसे गलत साबित करें ।
इसके बाद, सभामुख घिमिरे ने दोनों को उनके–अपने समय में बोलने की सलाह दी और पंत के कटे हुए समय को बढ़ा दिया। अतिरिक्त समय में, पंत ने पूर्व राजा की सक्रियता पर आपत्ति जताई और सत्ता पक्ष को चेतावनी दी कि उन्हें भी सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर न किया जाए।


