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जनमत पार्टी और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी एकीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में

 

काठमांडू, चैत ८ – जनमत पार्टी और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी बीच पार्टी एकजूट होकर संसद में छठी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी। नेताओं ने कहा है कि एकीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गयी है । दोनों पार्टी एक होकर मधेश प्रदेश से लेकर सुदूरपश्चिम तक विस्तार होगी । मधेश में तो ये प्रभावशाली दल ही हैं । दोनों पार्टी निकट शीर्ष तह के नेताओं का कहना है कि एकीकृत पार्टी के संरक्षक रेशम चौधरी होंगे । और अध्यक्ष में सीके राउत ही होंगे । सहअध्यक्ष में रञ्जिता श्रेष्ठ का रहना निश्चित हुआ है ।
२०७५ साल में गठित राउत नेतृत्व की जनमत और डिल्ली बाजार कारागार में रहते हुए रेशम चौधरी ने २०७८ साल में श्रीमती रञ्जिता श्रेष्ठ की अध्यक्षता में गठित नाउपा के बीच बहुत जल्दी एकता करना तय हुआ है ।
प्रतिनिधि सभा में जनमत पार्टी के ६ सांसद हैं । इसी तरह नाउपा के ४ सांसद हैं । नाउपा के संरक्षक रेशम चौधरी ने बताया कि – एकता करना निश्चित हो गया है । ‘कल या परसों पार्टी के केन्द्रीय समिति की बैठक रखी है । दोनों पार्टी के कार्यदल बैठकर विमर्श होगा और एकता का फैसला किया जाएगा ।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘कार्यदल एक रिपोर्ट सौपेगी । एक ही बैठक में सब फाइनल नहीं होगा । एकता की घोषणा सभी बातों को मिलाने के बाद ही की जाएगी । पार्टी का नाम, झण्डा, चुनाव चिह्न सभी तय की जाएगी, ताकि एकता के बाद किसी तरह की कोई विवाद न हो ।
जनमत पार्टी के एक पदाधिकारी अनुसार मुख्य बातों में सहमति हो चुकी है ।
उनके अनुसार पार्टी का नाम जनमत पार्टी ही रखा जाएगा । अध्यक्ष में डा.सीके राउत, संरक्षक रेशम चौधरी, और सहअध्यक्ष रञ्जिता श्रेष्ठ तथा चुनाव चिह्न ढ़किया रखने की बात में सहमति हो चुकी है । रही बात पदाधिकारियों की तो यह संख्या बाद में तय की जाएगी । राष्ट्रीय सचिव बीपी साह ने बताया कि वार्ता कमिटी गठन की जा चुकी है जिसमें उपाध्यक्ष अब्दुल खान, प्रवक्ता शरद सिंह और केन्द्रीय सचिव बालगोविन्द चौधरी सदस्य हैं । उन्होंने यह भी कहा कि नागरिक के केन्द्रीय समिति से निर्णय होने के बाद हम बाकी प्रक्रिया में आगे बढ़ेंगे ।
नाउपा की अध्यक्ष रञ्जिता श्रेष्ठ ने भी बताया कि एकता होने जा रही है । उन्होंने कहा कि बहुत जल्द यह एकता होगी । पार्टी अध्यक्ष सीकेजी ही होंगे।
नाउपा के संरक्षक चौधरी स्वयं एकता के लिए विमर्श कर रहे थे । दो तीन महीने से लगातार दोनों दल मिलकर विमर्श कर रहे थे ।

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