जलवायु परिवर्तन का प्रभाव : अंशुकुमारी झा
अंशुकुमारी झा, हिमालिनी अंक फरवरी 025। अभी विश्व में जलवायु परिवर्तन तथा उससे सृजित प्रभाव से लोग परेशान हैं । यह विषय वैश्विक स्तर पर चुनौती का विषय है । यह वर्तमान में विश्व के लिए एक जटिल समस्या है । जलवायु परिवर्तन के कारण अतिवृष्टि, अनावृष्टि, सूखा, बाढ़ इत्यादि से लोगों को सामना करना पड़ रहा है । जलवायु परिवर्तन के कारण विभिन्न जीव जन्तु तथा पेड़ पौधे लोप होते जा रहे हैं । पृथ्वी का औसत तापक्रम बढ़ता जा रहा है । समय का कोई मूल्यांकन ही नहीं रहा । उदाहरण के लिए नेपाल का राष्ट्रीय फूल लालीगुराँस चैत बैसाख महीने में खिलता था परन्तु इसबार पौष महीना में खिलता हुआ दिखाई दिया है । इसको हम क्या कह सकते हैं । जलवायु परिवर्तन के कारण सबकुछ प्रतिकूल हो रहा है । जिससे इसका प्रभाव गरीबों पर अत्यधिक पड़ रहा है । वैसे जलवायु परिवर्तन से जो परिस्थितियाँ उत्पन्न हो रही है उससे धनी वर्ग भी प्रभावित हो रहे हैं परन्तु सीमान्तकृत समुदाय की गरीबी बढ़ रही है । खाद्यान्न का संकट भी बढ़ रहा है । गर्मियों में कुछ क्षेत्रों में पानी का सतह एकदम नीचे चले जाने के कारण पानी की भी समस्या हो जाती है । हमें जानकारी है कि कुछ दिन पहले अमेरिका के जंगल में आग लगी है जो अभी तक ठीक से बुझ नहीं पाई है । इससे जंगलों के कितने जीव जंतु जलकर राख हो गया है, यह सब क्या है ? सब जलवायु परिवर्तन का प्रभाव ही तो है ।
प्राकृतिक आपदा मानव के लिए या किसी भी जीव के लिए सहन करना मुश्किल होता है और वह उस जगह से विस्थापित होने में देर नहीं करता । युरोप जलवायु सेवा केन्द्र ने एक प्रतिवेदन सार्वजनिक किया था जिसके अनुसार विगत १७४ वर्षों में पृथ्वी का औसत तापक्रम के आधर पर सन् २०२४ सबसे अधिक गर्मी का वर्ष रहा । वैज्ञानिकों ने बताया कि सन् २०२४ के ४१ दिन अत्यधिक गर्मियों का दिन रहा । प्रतिवेदन के अनुसार सन् १८५० से पृथ्वी के भूसतह का औसत तापक्रम गणना शुरु किया गया । सन् १८५० से लेकर अभी तक सन् २०२४ में सबसे अधिक औसत तापक्रम १५.१ डिग्री हुआ है । इससे अंदाजा लगा जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन कितना प्रभावित कर रहा है । विश्व मौसम संगठन के अनुसार ६ अन्तर्राष्ट्रीय डेटा सेट के आधार पर सन् २०२४ को सबसे अधिक गर्मी वाला वर्ष घोषणा किया गया है । तापक्रम में वृद्धि होने के कारण जलवायु में एकदम से बदलाव आ गया है । सभी जीवजन्तु उससे प्रभावित हो रहे हैं । एक चिन्तनीय विषय, लड़कियों में मासिक धर्म पहले समय पर होता था परन्तु एक खबर के अनुसार फिलहाल ५ वर्ष में ही लड़कियाँ मासिक धर्म होने लगी है । सही में यह एक सोचनीय विषय है और इस पर अनुसन्धान की आवश्यकता है । दुषित वातावरण, दुषित भोजन, अव्यवस्थित रहन सहन तो इसका कारण नहीं ?
तापक्रम वृद्धि से जलवायु में असाधारण परिवर्तन आया है । ‘वल्र्ड वेदर एट्रिब्युसन’ और ‘क्लाइमेट सेन्ट्रल’ ने उल्लेख किया है कि सन् २०२४ में नमुना के रूप में मौसम से सम्बन्धित २९ घटना मध्ये २६घटनाएँ जलवायु परिवर्तन के कारण हुई है । उक्त घटना में तीन हजार सात सौ लोगों ने जान गँवाई है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं । पूर्वी स्पेन का बाढ, नेपाल की अविरल वर्षा, अमेरिका की हुरिकेन आँधी, दक्षिण अमेरिका के अमेजन फारेस्ट में लगी आग, पश्चिम तथा मध्य अफ्रिका का बाढ़ इत्यादि घटनाओं से यह अध्ययन किया गया है । अभी तक अध्ययन चल ही रहा । फिलहाल अमेरिका के लास एन्जलस में भीषण आग लगी हुई है । यह सब जलवायु परिवर्तन में और भी सहायक हो रहा है । लस एन्जलस में आग लगने से जीव जन्तु तो मर ही रहे हैं अभी तक बहुत सारे लोगों की भी मौत हो गई है ।
नेपाल भी जलवायु परिवर्तन के खतरे से मुक्त नहीं है । यहाँ के प्रधानमन्त्री बार–बार बड़े देशों को दोष देते हुए कहते रहते हैं कि गलती कोई और करे, खामियाजा हमें भी भुगतना पड़े । सच में नेपाल भी उक्त खतरे को झेल रहा है । विश्व बैंक के ‘क्लाइमेट चेन्ज नलेज पोर्टल’ के अनुसार सन् १९०१ में नेपाल का औसत तापक्रम १३.६६ डिग्री सेल्सियस था । बीच में तापक्रम में उतार चढ़ाव रहता था परन्तु सन् २०२३ में १४.०७ डिग्री सेल्सियस पहुँच गया है । नेपाल की भौगोलिक अवस्था हिमाल, पहाड और तराई है जिसके कारण यहाँ का जलवायु संवेदनशील है । नेपाल तो पहले से ही गरीब है जिससे यहाँ की अवस्था संकटपूर्ण होने की सम्भावना प्रबल है । जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पिछले बहुत दिनों से नेपाल में दिख रहा है । वार्षिक वर्षा चक्र में बदलाव, अतिवृष्टि, अनावृष्टि बाढ इत्यादि समस्याएँ बहुत ज्यादा हो गई है । राष्ट्रीय विपद् जोखिम तथा व्यवस्थापन प्राधिकरण के प्रतिवेदन अनुसार इसी वर्ष आश्विन में अविरल बारिश और बाढ़ के कारण २२४ लोगों की मौत हुई, १५८ लोग घायल हुए और २४ लोग अभी तक लापता हैं । कितने लोग बेघर हुए । कितनो ने अपनों को खोया । इस प्रकार का प्रकोप ज्यादा ही हो रहा है ।
विभिन्न अध्ययन तथा अनुसन्धान के आधार पर यह जानकारी प्राप्त हुई है कि जलवायु परिवर्तन तथा बाढ़, भूस्खलन, अकाल, आगलगी इत्यादि जैसे घटनाओं से सबसे अधिक प्रभावित विपन्न तथा सीमान्तकृत समुदाय होते हैं । उसमें भी सबसे अधिक उस समुदाय के महिला, बाल बालिका, बुजुर्ग और अपांग लोग होते हैं । संयुक्त राष्ट्रसंघ के अनुसार सन् २००४ में हिन्द महासागर में जो सुनामी आया था उसमें लगभग २ लाख ३० हजार लोगों की मौत हुई थी । उन मृतकों की संख्या में ७० प्रतिशत महिलाओं की संख्या थी । अध्ययन के अनुसार यह भी सिद्ध हुआ है कि जलवायु परिवर्तन का असर यत्र तत्र सर्वत्र है परन्तु सबसे अधिक असर गरीबों में है । विशेष रूप से जो व्यक्ति आर्थिक, सामाजिक व शैक्षिक रूप से कमजोर है वहाँ जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अधिक देखा गया है । जो लोग प्रकृति पर पूर्ण रूपेण निर्भर होते हैं वे जलवायु परिवर्तन से अधिक प्रभावित होते हैं । महिला अत्यधिक प्रभावित होने का कारण है कि वो प्राकृतिक स्रोत साधन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी होती है । तथ्यांक के अनुसार नेपाल में कृषि पेशा में ७४ प्रतिशत महिला संलग्न है तो स्वभाविक है वही प्रभावित होगी ।
समग्र में जलवायु परिवर्तन का असर दुनिया भर में बहुत तेजी से देखा जा रहा है । पर्यावरण पर असर, ग्लोवल वार्मिंग, समुद्र का बढता सतह, मौसम में अस्थिरता यह सब भयानक हो रहा है । इसी प्रकार खाद्य सुरक्षा पर भी असर, स्वास्थ्य पर प्रभाव, बिगड़ती हुई जैव विविधता इत्यादि पर जलवायु परिवर्तन का असर दिखाई दे रहा है और लोग भुगत भी रहे हैं । अब हम मानव को इसके समाधान की ओर ध्यान देना अत्यधिक आवश्यक है । अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें, नवीकरणीय उर्जा का उपयोग करें । अगर जलवायु परिवर्तन पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाली पीढि़यों को इसके गम्भीर परिणाम भुगतने होंगे ।

नव वर्ष की शुरूआत ?
अंशु झा

