पाकिस्तान की जनता गरीब, सेना अमीर, क्या है कारण ? : मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)
मुरली मनोहर तिवारी (सीपू), बीरगंज । साल 1947 में भारत विभाजन के बाद अपने निर्माण से लेकर अब तक पाकिस्तान में 34 साल सैन्य शासन रहा। तीन अलग-अलग हिस्सों में पाक सेना के मिलिट्री जनरलों ने देश को संभाला। पाकिस्तान में लगभग 6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से भी नीचे जीवन बिता रहे हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान आर्मी दुनिया की कुछ सबसे अमीर सेनाओं में से है।
पाकिस्तान के बारे में कहा जाता है कि “एक सेना है जिसके पास एक देश है”। पाकिस्तानी सेना में इस समय 5 लाख 60 हजार जवान कार्यरत हैं। पाकिस्तानी सेना के पास दो हजार टैंक, चार हजार से ज्यादा अत्याधुनिक बंदूकें, 425 युद्धक विमान और पनडुब्बी हैं। 
पाकिस्तान आर्मी के कर्मियों का वेतन पाक सरकार के अन्य विभागों की तरह, बुनियादी वेतन निर्धारित किया जाता है। जूनियर कमिशनड ऑफिसर्स (JCOs) का वेतन 20,000 से 40,000 पाकिस्तान रूपए के बीच होता है। नॉन-कमिशनड ऑफिसर्स (NCOs), जैसे लांस नायक और नायक के रैंक के कर्मियों का वेतन 18,000 से 30,000 के बीच होता है। पाकिस्तान आर्मी में मध्य-स्तरीय अधिकारियों का वेतन 50,000 से 90,000 तक वेतन मिलता है, जबकि आर्मी मेजर को 60,000 से 100,000 तक मासिक वेतन प्राप्त होता है। कर्नल और ब्रिगेडियर को 80,000 से 150,000 तक वेतन मिलता है, साथ ही अन्य सुविधाएं भी मिलती है।
पाकिस्तान आर्मी के सबसे प्रमुख होते हैं, जनरल। जनरल की सैलरी 200,000 पाकिस्तानी रुपये से शुरू होती है। इनको विशेष सुविधाएं जैसे लक्जरी घर, बेहतरीन चिकित्सा व्यवस्था और आर्मी क्लब्स की भी सुविधाएं मिलती हैं।
कुल मिलाकर सैन्य और राजनैतिक ताकत के मामले में पाकिस्तान आर्मी अपने देश में काफी ताकतवर है, लेकिन ये ताकत इतने तक ही सीमित नहीं, पाकिस्तान की सेना के पास इतनी संपत्ति है, जिसका कोई अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है।
पाक सेना के पास अपने देश के सबसे मुनाफा देने वाले सभी बिजनेस में शेयर हैं। यहां तक कि पाकिस्तानी आर्मी पूरी तरह से कॉर्पोरेट आर्मी में बदल चुकी है। पाकिस्तान आर्मी 50 से ज्यादा व्यापारिक संस्थानों की मालिक है, जिसकी कीमत 100 बिलियन डॉलर से भी कहीं ज्यादा है। 
पेट्रोल पंप, इंडस्ट्रिअल प्लांट, बैंक, स्कूल-यूनिवर्सिटी, दूध से जुड़े उद्योग, सीमेंट प्लांट, बेकरीज पाकिस्तान के आठ बड़े शहरों में हाउसिंग प्रॉपर्टी में भी सेना का सबसे बड़ा शेयर है। यहाँ तक की पाक सेना ईद और बक़रीद के समय गोश्त भी ख़ुद ही बेचती है।
पाक सेना बलूचिस्तान में सोने की खुदाई के काम में हाथ डालने की शुरुआत की है। खदानों के अलावा पाक सेना के पास देश की सबसे उपजाऊ जमीन का बड़ा हिस्सा है। इससे साफ है कि कॉर्पोरेट में बदल चुकी पाक सेना अपने बिजनेस प्रॉफिट पर टिकी हुई है। पाकिस्तानी बजट से 21 प्रतिशत पाक सेना के पास जाता है। देश का काफी सारा पैसा सेना के पास जाना भी पाकिस्तान में आम जनता की गरीबी की वजह है। पाक सेना इतनी अमीर होने के बाद भी सेना पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते है। एक भी जंग नही जितने के बावजूद इनकी छाती मेडलों से भरी रहती है।
जनरल सैयद असीम मुनीर अहमद शाह की जो कि पाकिस्तानी सेना के 11वें सेना प्रमुख हैं, इनकी कुल संपत्ति 216 करोड़ पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा है। जनरल मुनीर ने पाकिस्तान के मास्टर टाइल्स से 90 करोड़ रुपये की मांग की थी। इस उगाही की जानकारी खुद मास्टर टाइल के CEO शेख़ महमूद इकबा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान को 5 जून 2021 को चिट्ठी लिखकर दी थी।
जनरल बाजवा के परिवार की संपत्ति 2016 से पहले जीरो थी वो बढ़कर 2.2 बिलियन पाकिस्तानी रुपये हो गई। खास बात तो यह है कि इसमें अचल संपत्ति जुड़ी नहीं है। पाकिस्तान के 9वें सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ की कुल संपत्ति 1460 करोड़ पाकिस्तानी रुपये से ज़्यादा है। 8 वें सेना प्रमुख जनरल अश्फ़ाक परवेज़ कियानी जो कि 2007 से 2013 तक सेना प्रमुख रहे उनके पास अपना निजी आइलैंड है।
पाकिस्तान के 6 ठें सेना प्रमुख जनरल जांहगीर करामात भी कम करामाती नहीं थे।इन्होंने तो यूक्रेन से पाकिस्तान के लिए 300 टैंक की डील की थी और उन पर 20 मिलियन डॉलर की घूस लेने का आरोप है। उनकी कुल संपत्ति 540 करोड़ पाकिस्तानी रुपये से ज़्यादा है।
सबसे अमीर जनरल में से थे जनरल परवेज मुशर्रफ, सेना प्रमुख रहते हुए लाहौर के DHA में 2000 यार्ड का बंगला था। दो रेजिडेशियाल प्लांट भी थे। जब मुशर्रफ बतौर सेना प्रमुख से रिटायर हुए तो उन्हें 1 मिलियन डॉलर बराबर पाकिस्तानी रुपये मिले। 14 मिलियन डॉलर क़ीमत के दो फ़्लैट लंदन और यूएई में ख़रीदे। जनरल मुशर्रफ ने 30 से ज्यादा संपत्तियां बनाई जिसमें मिडिल और इस्ट लंदन में लग्जरी अपार्टमेंट और फार्म हाउस भी शामिल है। इसके अलावा 2009 में लंदन में 1.6 मिलियन डॉलर की कीमत में हाइड पार्क क्रीसेंट में फ़्लैट ख़रीदा। परवेज़ मुशर्रफ के नाम पर 16900 कोरड़ पाकिस्तानी रुपये से ज़्यादा की संपत्ति है।
पाक सेना में नौकरी पाना पाकिस्तान के युवाओं के लिए एक सपना होता है। पाक सेना का कोई भी अधिकारी करोड़पति होता है। सेना के अधिकारियों के बच्चे आमतौर पर विदेश में पढ़ते हैं। जब वे घर लौटते हैं तो उन्हें सेना के अधीन किसी संगठन में नौकरी दी जाती है। पाक सेना में विलासिता की कोई कमी नहीं है।पाक फौज सरकार पर डंडा चलाती रही है। इनके कारण विभिन्न विदेशी कंपनियाँ पाकिस्तान में व्यापार के क्षेत्र में पीछे हट गई हैं। आंतरिक एजेंसियों के साथ भी काम नहीं करता है। नतीजतन, फौजी फाउंडेशन जैसे सैन्य-स्वामित्व वाले संगठन सारे ब्यापार खुद करने लगे। वे आर्थिक रूप से फलते-फूलते गए। इस प्रकार सेना की शक्ति में वृद्धि होती है। सेना ने देश में स्थिर सरकार बनाने के बजाय सत्ता अपने हाथ में रख ली।
पाक फौज से लेकर, गैर सैनिक बड़े से छोटे कर्मचारी तक, दोहरी नागरिकता रखते है, आकड़ो के मुताबिक 22000 गैर सैनिक कर्मचारियों ने दोहरी नागरिकता ले रखी है। इनका उद्देश्य है जब तक नौकरी में हो पूरा लूटों और रिटायरमेंट के बाद दूसरे देश मे जाकर आराम की जिंदगी गूजारों, देश और जनता जाए भाड़ में। नतीजतन, पाकिस्तान का संकट कभी खत्म नहीं होता।


