उपेन्द्र यादव के अडान के आगे झुकी सत्ता, निष्क्रिय हुआ अध्यादेश
काठमांडू, १३ चैत (२०८१) | नेपाल सरकार द्वारा लाया गया भूमि संबंधी अध्यादेश अंततः निष्क्रिय होने जा रहा है। बुधवार को सत्तारूढ़ गठबंधन के दलों की बैठक में इसे निष्क्रिय होने देने का निर्णय लिया गया।
नेपाल के संविधान के अनुसार, यदि संसद में किसी अध्यादेश को ६० दिनों के भीतर पारित नहीं किया जाता, तो वह स्वतः निष्क्रिय हो जाता है। चूंकि संसद का हिवाली अधिवेशन १८ माघ से शुरू हुआ था और अगले पाँच दिनों में ६० दिन पूरे होने वाले हैं, इसलिए यह अध्यादेश स्वतः ही खत्म हो जाएगा।
इस अध्यादेश को पारित कराने के लिए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा ने तीन महीने तक प्रयास किए, लेकिन जनता समाजवादी पार्टी (जसपा), नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव के कड़े रुख के कारण यह संभव नहीं हो सका। सत्ता गठबंधन के एक शीर्ष नेता ने बताया, “हमने उपेन्द्र यादव को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने। जसपा की असहमति के बाद अध्यादेश को वापस लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।”
भूमि अध्यादेश के मुद्दे पर जसपा का कड़ा रुख
प्रधानमंत्री ओली के लिए भूमि अध्यादेश प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका था। उन्होंने सत्ता में सहयोगी दलों को नज़रअंदाज करते हुए २६ पुस को राष्ट्रपति कार्यालय को ६ अध्यादेश भेजे थे। हालांकि, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुरुआत में भूमि अध्यादेश को रोक दिया था, लेकिन ओली और देउवा के समझाने पर उन्होंने २ माघ को इसे जारी कर दिया।
हालांकि, जब यह अध्यादेश संसद में पेश होने वाला था, तब जसपा नेपाल ने इसका पुरजोर विरोध किया। जसपा नेताओं का कहना था कि यह कानून भू-माफियाओं के हित में है, जबकि असली भूमिहीनों को इसका कोई लाभ नहीं होगा। २९ माघ को जसपा की संसदीय बैठक में इस अध्यादेश को जनविरोधी करार दिया गया।
राष्ट्रीय सभा में समीकरण बिगड़ने से ओली को पीछे हटना पड़ा
भूमि अध्यादेश पर जसपा के विरोध के कारण सत्तारूढ़ गठबंधन राष्ट्रीय सभा में बहुमत खोने की स्थिति में आ गया। जसपा नेपाल के तीन सांसदों के विरोध के साथ ही लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) ने भी सरकार का साथ देने से इनकार कर दिया। इससे विपक्ष के पास बहुमत हो गया, जिसमें माओवादी केंद्र (१७), एकीकृत समाजवादी (८) और राष्ट्रीय जनमोर्चा (१) सांसद थे।
बहुमत खोने की आशंका के कारण प्रधानमंत्री ओली ने जसपा को मनाने की नीति अपनाई। यहां तक कि सांसदों के कुंभ मेले में जाने का बहाना बनाकर अध्यादेशों पर निर्णय टालने की कोशिश की गई। लेकिन जसपा अपने रुख से टस से मस नहीं हुआ।
अब क्या होगा?
सरकार ने अब निर्णय लिया है कि भूमि अध्यादेश को निष्क्रिय होने दिया जाएगा, लेकिन इसके प्रावधानों को संशोधित कर विधेयक के रूप में संसद में पेश किया जाएगा। एमाले के प्रमुख सचेतक महेश बर्तौला ने कहा, “१८ फागुन के बाद अध्यादेश स्वतः निष्क्रिय होगा। हम इसके प्रावधानों को संशोधित कर विधेयक के रूप में आगे बढ़ाएंगे।”
जसपा नेपाल के प्रवक्ता मनीष सुमन ने इस घटनाक्रम को जनता के हित में बताया। उन्होंने कहा, “हमने चट्टानी अडान लिया और कहीं भी झुके नहीं। अब जब यह विधेयक के रूप में आएगा, तब इसे भू-माफियाओं के अनुसार नहीं, बल्कि जनता की राय के आधार पर बनाया जाएगा।”
निष्कर्ष
तीन महीने तक ओली और देउवा ने हरसंभव प्रयास किया कि उपेन्द्र यादव को किसी तरह से मनाया जाए। लेकिन जसपा नेपाल के कड़े रुख के कारण भूमि अध्यादेश पारित नहीं हो सका और अब यह स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा। अब देखना यह होगा कि सरकार इसे नए विधेयक के रूप में कैसे पेश करती है और क्या उसमें भू-माफिया और बिचौलियों के प्रभाव को खत्म करने के लिए कोई ठोस बदलाव किए जाएंगे या नहीं।


