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करंट से दोनों हाथ गंवाने वाली मेघा की ‘टिकटॉक’ यात्रा

 
फोटो कांतिपुर से साभार
27 मार्च, 2025, पर्वत पोर्तेल की कहानी, कान्तिपुर से साभार
टिकटॉक पर 44 लाख, इंस्टाग्राम पर 18 लाख और फेसबुक पर करीब 2 लाख 40 हजार फॉलोअर्स
टिकटॉक शुरू करने के बाद मेघा ने अपनी मानसिक पीड़ा को भुलाना शुरू किया और दूसरों के लिए प्रेरणा की स्रोत बनीं
विराटनगर — विराटनगर महानगरपालिका-8 की 28 वर्षीय मेघा घिमिरे सोशल मीडिया पर मशहूर हैं। टिकटॉक पर वह कई लोगों के लिए ‘स्टार’ हैं। टिकटॉक पर उन्हें 44 लाख लोग फॉलो करते हैं। इंस्टाग्राम पर 18 लाख और फेसबुक पर करीब 2 लाख 40 हजार फॉलोअर्स हैं।
फोटो कांतिपुर से साभार
नौ साल पहले एक हादसे में अपने दोनों हाथ गंवाने के बाद मुश्किल वक्त से गुजर रही मेघा के लिए टिकटॉक एक दोस्त बनकर आया। इसके जरिए वह आम लोगों तक पहुंचीं और दूसरों के लिए प्रेरणा की स्रोत बन गईं। “मुझे खुश रखने में टिकटॉक ने ही मदद की,” मेघा कहती हैं, “अगर यह प्लेटफॉर्म न होता, तो आज मैं किस हाल में होती, मुझे खुद नहीं पता।”
2072 पौष (2015 दिसंबर-जनवरी) में मेघा अपने घर की छत पर काम कर रही थीं, तभी उनका हाथ अचानक हाईटेंशन बिजली के तार से टकरा गया। 33 हजार वोल्ट का करंट छत के पास से गुजर रहा था। उस झटके ने उन्हें उछाल दिया। करंट से उनके दोनों हाथ जल गए। इलाज के दौरान उनके हाथ काटने पड़े। “मेरे हाथ में पंचरत्न धातु का चूड़ा था, जो हाईटेंशन तार से टकराकर करंट का कारण बना,” उन्होंने कहा, “मैं कैसे बच गई, यह सोचकर भी हैरानी होती है।”
अस्पताल से हाथ काटकर जब वह घर लौटीं, तो काफी समय तक उन्होंने बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटाई। लेकिन भाई के सहयोग और हौसले से वह धीरे-धीरे बाहर निकलने लगीं। टिकटॉक शुरू करने के बाद उन्होंने अपनी पीड़ा को भुलाना शुरू किया। कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान उनका ध्यान टिकटॉक की ओर गया। “लॉकडाउन था, दुख पर दुख बढ़ रहा था, मन को शांत करने और खुश रहने के लिए मैंने टिकटॉक को दोस्त बनाया,” मेघा ने बताया, “कम समय में ही टिकटॉक ने मुझे पहचान दिलाई।”
लॉकडाउन के दौरान टिकटॉक पर सक्रिय रहते हुए मेघा ने एक गीत प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और पहला स्थान हासिल कर 1 लाख रुपये का पुरस्कार जीता। इसके बाद टिकटॉक के प्रति उनका रुझान और बढ़ गया। वह बचपन से नृत्य और संगीत में रमती थीं। उसी प्रतिभा को उन्होंने टिकटॉक पर दिखाया। उनकी इस अनोखी क्षमता को लोगों ने पसंद करना शुरू किया। वह और प्रोत्साहित हुईं। “मेरे वीडियो देखकर मेरे जैसे कई लोगों ने कहा कि उन्हें हिम्मत मिली, यह सुनकर बहुत खुशी होती है,” मेघा ने बताया, “हाथ न होने का मतलब यह तो नहीं कि मैंने सब कुछ खो दिया।” टिकटॉक के जरिए मिले फैंस के प्यार को उन्होंने आत्मबल के रूप में लिया।
हादसे से कुछ समय पहले ही मेघा ने भागकर शादी की थी। दोनों हाथ गंवाने के बाद उनके पति से रिश्ते बिगड़ गए। पति से सहयोग न मिलने पर उन्होंने तलाक का रास्ता चुना। अब वह मायके में रहती हैं। हाथ गंवाने के समय मेघा SLC में एक विषय में फेल हो गई थीं और दोबारा परीक्षा की तैयारी कर रही थीं।

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फोटो कांतिपुर से साभार
हादसे के बाद वह खुद लिखकर परीक्षा नहीं दे सकीं। एक दोस्त की मदद से उन्होंने परीक्षा दी। प्लस टू भी दूसरों की मदद से लिखकर पास की। इसके बाद उनकी पढ़ाई पूरी तरह रुक गई। “पढ़ने का मन था, लेकिन नहीं कर सकी,” उन्होंने बताया।
मेघा अब टिकटॉक से कमाई कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। शुरू में माता-पिता उन्हें खाना खिलाते थे, भाई उनका मुंह धोता था। धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम खुद करने शुरू किए। अब टिकटॉक वीडियो बनाने से पहले वह खुद मेकअप करती हैं। कपड़े पहनने में मां की मदद लेती हैं। “हाथ न होने के बावजूद मैं आत्मनिर्भर होकर खुशी से जीना चाहती हूं,” उन्होंने कहा।
फोटो कांतिपुर से साभार

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