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राजनीतिक सहमति बनी तो कुछ ही दिनों में शिक्षा विधयेक पास हो जाएगा

 

काठमांडू, 5 वैशाख (2082): स्कूल शिक्षा अधिनियम की माँग को लेकर दो सप्ताह से सड़क पर आंदोलन कर रहे शिक्षक फिलहाल पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। हालांकि सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जल्द से जल्द शिक्षा विधेयक लाया जाएगा, लेकिन शिक्षक तब तक आंदोलन समाप्त न करने के पक्ष में हैं जब तक अधिनियम पारित होने की निश्चितता न हो।

यह विधेयक 27 भदौ 2080 से ही संसद में मौजूद है और इसे कुछ संसदीय प्रक्रियाएं पार करनी बाकी हैं। प्रतिनिधिसभा की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सूचना प्रौद्योगिकी समिति ने विधेयक पर संशोधनकर्ताओं और संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किया है। अब संसदीय उपसमिति इस पर सहमति बनाने की दिशा में काम कर रही है।

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यदि राजनीतिक दलों में सहमति बनी और सरकार ने पहल दिखाई, तो यह विधेयक वर्षे अधिवेशन के पहले ही दिन प्रतिनिधिसभा में पेश हो सकता है। प्रतिनिधिसभा से पारित होने के बाद यह राष्ट्रीय सभा में जाएगा, जहाँ 72 घंटे के भीतर सांसद संशोधन प्रस्ताव दायर कर सकते हैं। इसके बाद दफावार चर्चा कर विधेयक को पारित किया जाएगा।

संघीय संसद सचिवालय के प्रवक्ता एकराम गिरी के अनुसार यदि सभी विषयों पर सहमति बन गई, तो विधेयक को प्रतिनिधिसभा में तीन दिनों के भीतर और राष्ट्रीय सभा में पाँच कार्यदिवस में पारित किया जा सकता है। इसके बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास प्रमाणीकरण के लिए जाएगा और अधिनियम के रूप में लागू हो जाएगा।

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गिरी के अनुसार कानून निर्माण को समयबद्ध करना कठिन है, क्योंकि चर्चा के दौरान नए मुद्दे सामने आ सकते हैं। लेकिन पूर्व सचिव सोमबहादुर थापा का मानना है कि कानून बनाने में जल्दबाज़ी नहीं होनी चाहिए, और न ही विधेयक को लंबे समय तक अटकाकर रखना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि पिछले शीतकालीन अधिवेशन में भी पांच विधेयक एक महीने से कम समय में दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति द्वारा प्रमाणीकरण प्राप्त कर चुके हैं। इससे यह स्पष्ट है कि यदि सरकार और राजनीतिक दल इच्छुक हों, तो शिक्षा विधेयक भी जल्द कानून बन सकता है।

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थापा के अनुसार सरकार को इस दिशा में पहल करनी चाहिए थी, लेकिन अब भी यदि शिक्षा मंत्री स्वयं जाकर विधेयक का महत्व स्पष्ट करें, तो इसे शीघ्र पारित किया जा सकता है।

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