अब हमारे पास कठिन लड़ाईं लड़ने के अलावे दूसरा विकल्प नहीं है– नेपाल शिक्षक महासंघ
काठमांडू, जेठ ५ – नेपाल शिक्षक महासंघ ने अपनी आपत्ति जताते हुए कहा कि– अब हमारे पास कठिन लड़ाईं लड़ने के अलावे दूसरा विकल्प नहीं है । संसद की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सूचना प्रविधि समिति अन्तर्गत गठित उपसमिति द्वारा पेश किए गए विधेयक में नेपाल शिक्षक महासंघ ने अपनी आपत्ति जताते हुए यह बात कही है ।
महासंघ के अध्यक्ष लक्ष्मी किशोर सुवेदी ने बताया कि यह रिपोर्ट वर्तमान में पंजीकृत विधेयक से भी अधिक उदारवादी तथा शिक्षक व कर्मचारी विरोधी है।
बीति रात सुवेदी ने अपने फेसबुक पर लिखा है कि – शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सूचना प्रविधि समिति अन्तर्गत गठित उपसमिति द्वारा पेश किए गए प्रतिवेदन में बहुत से सवाल किए जा सकते हैं । दर्ता किया गया विधेयक उदारवादी तथा शिक्षक व कर्मचारी विरोधी है ।
उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया है कि उक्त प्रतिवेदन में शिक्षक महासंघ और सरकार के बीच सहमति अनुसार जो बात मानी गई थी उसे नहीं समेटा गया है । सुवेदी का कहना है कि शिक्षकों के प्रति उक्त प्रतिवेदन न्याय नहीं कर सकी है ।
सुवेदी ने लिखा है कि – सभी के साथ अन्याय करने की कोशिश की । वि.सं. २०७५, २०७८ और २०८० में हुए सभी सहमति को त्याग दिया गया । अभी कुछ ही दिन पहले २०८१–८२ का जो आन्दोलन हुआ उसे भी भुला दिया गया । अब हमारे पास कठिन लड़ाईं लड़ने के अलावे दूसरा विकल्प नहीं है ।
उन्होंने सभी के साथ अन्याय करने की कोशिश की।“ वि.सं. २०७५, २०७८ और २०८० में हुए सभी समझौते त्याग दिये गये। सुबेदी ने लिखा, “ऐसा लगता है कि २०८१-८२ का आंदोलन, जो अभी–अभी हुआ था, उसे भी भुला दिया गया है।“ अब कठिन लड़ाई लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।“


