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नेपाल–भारत संबंधों की जड़ें सभ्यता की शुरुआत में रखे गए आधारों में निहित है – विदेश मंत्री राणा

 

काठमांडू, जेठ २९ – विदेश मंत्री डॉ. आरजु राणा देउवा ने कहा है कि नेपाल–भारत के बीच विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त साझेदारी और कनेक्टिविटी के माध्यम से ही दोनों देशों में साझा समृद्धि हासिल की जा सकती है ।
नेपाल–भारत रणनीतिक संवाद से संबंधित कार्यक्रम का आज काठमांडू में उद्घाटन करते हुए उन्होंने नेपाल–भारत के बीच व्यापार, परिवहन (ट्रांजिट) और निवेश में सहयोग को गति देकर कनेक्टिविटी के माध्यम से आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत को आपसी संपर्क नेटवर्क को विभिन्न मंचों के माध्यम से समृद्धि में बदलने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, “मैं उस भविष्य की प्रतीक्षा कर रही हूं, जिसमें नेपाली किसान की अदुवा (अदरक) २४ घंटे में मुंबई के बाजार तक पहुंच जाए और एक भारतीय पर्यटक दिल्ली में सुबह की बैठक के बाद शाम की उड़ान से पोखरा पहुंच सके। ऐसा निकट संबंध हो जो दोनों देशों के नागरिकों की आर्थिक समृद्धि की नींव बने ।”
मंत्री राणा ने कहा कि नेपाल–भारत संबंधों की जड़ें सभ्यता की शुरुआत में रखे गए आधारों में निहित है । मंत्री राणा ने कहा कि हमारे नागरिकों का जीवन साझा मूल्यों, संस्कृति और भावनाओं पर आधारित है । उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत को सड़क, रेलवे, जलमार्ग, हवाई मार्ग और डिजिटल बुनियादी ढांचे सहित विभिन्न माध्यमों में निवेश कर आपसी संपर्क नेटवर्क को बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारे दोनों देशों के बीच निर्बाध संपर्क नेटवर्क न केवल क्षेत्रीय और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग करेंगे, बल्कि पारवहन व्यापार और सीमा अर्थव्यवस्था को भी उन्नत बना सकेंगे। इससे दोनों देशों के नागरिक लाभान्वित होंगे।“
मंत्री राणा ने कहा कि वर्तमान में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य ज्ञान–आधारित अर्थव्यवस्था, सेवाओं और डिजिटल प्लेटफार्मों पर केंद्रित हो रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में दोनों देशों को डिजिटल अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और नवाचार, आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और रचनात्मक अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में अपने प्रयासों को संयुक्त रूप से केंद्रित करना चाहिए।
हाल के वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र को नेपाल–भारत सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण बताते हुए डॉ. राणा ने कहा कि नेपाल की विशाल जलविद्युत क्षमता स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत प्रदान कर सकती है, जो आने वाली पीढÞियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी । भारत द्वारा आगामी दशकों में नेपाल से १०,००० मेगावाट बिजली आयात करने की प्रतिबद्धता को नेपाल–भारत ऊर्जा सहयोग का प्रतीक बताते हुए उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दोनों देशों ने परस्पर प्रसारण संपर्क, ग्रिड कनेक्टिविटी और बिजली के आदान–प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक मजबूत किया है । मंत्री राणा ने कहा कि भारत में डिजिटल कौशल और नवाचार की बड़ी क्षमता है और नेपाल में तेजी से बढ़ती युवा और तकनीक–प्रेमी जनसंख्या है। इस सन्दर्भ में उन्होंने कहा, “हमें आपसी सहयोग के तहत टेक हब, स्टार्ट–अप और डिजिटल नवाचार मंचों को बढ़ावा देना चाहिए, और अपने युवाओं को साथ मिलकर काम करने, तकनीक का उपयोग कर समृद्धि की ओर बढ़ने का अवसर देना चाहिए।“
उन्होंने यह भी कहा कि आज की दुनिया तेजÞ तकनीकी परिवर्तन, परिवर्तनीय भू–राजनीतिक गतिशीलता और वैश्विक जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों का सामना कर रही है, ऐसे में दोनों देशों के लिए साझा चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त सहयोग आवश्यक है। इस अवसर पर उन्होंने नेपाल में हाल ही में सम्पन्न ’सगरमाथा संवाद’ के पहले संस्करण में भारत सरकार के सहयोग और समर्थन के लिए आभार भी व्यक्त किया।
मंत्री राणा ने कहा कि नेपाल अपने पड़ोसियों और मित्रों के साथ साझेदारी में शांति, स्थिरता और समृद्धि के एक नए युग की अपेक्षा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के मंच नेपाल–भारत संबंधों को और प्रगाढ़ बनाएंगे, विचारों के आदान–प्रदान को बढ़ावा देंगे, और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को सुदृढ़ करने में सहायता करेंगे।

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