देउवा पर शेखर कोइराला के सवालों की बौछार: कांग्रेस ने सरकार का नेतृत्व एमाले को क्यों सौंपा ?
काठमांडू, 17 असार । कांग्रेस नेता डॉ. शेखर कोइराला ने एमाले (नेकपा एमाले) के नेतृत्व में सरकार गठन के निर्णय पर गहरी आपत्ति जताई है और पार्टी सभापति शेरबहादुर देउवा से सार्वजनिक रूप से जवाब तलब किया है। सोमवार से शुरू हुए नेपाली कांग्रेस के केन्द्रीय समिति की बैठक में उन्होंने कई मुद्दों को लेकर देउवा की नेतृत्व शैली पर सवाल खड़े किए।
सरकार गठन पर सीधा सवाल:
शेखर कोइराला ने कहा, “मैं स्वयं कांग्रेस-एमाले गठबंधन का पक्षधर था, लेकिन नेतृत्व कांग्रेस को मिलना चाहिए था। आखिर किन कारणों से कांग्रेस ने एमाले को सरकार का नेतृत्व सौंपा?” उन्होंने सातबुँदे समझौते में उल्लेखित संविधान संशोधन की प्रक्रिया के बारे में भी सवाल उठाते हुए कहा, “संविधान संशोधन कहाँ गया? सभापतिजी इसका संतोषजनक उत्तर दें।”
गठबंधन नीति में भ्रम:
कोइराला ने २०७९ के संघीय चुनाव में माओवादी पार्टी के साथ गठबंधन और वर्तमान में एमाले के साथ सत्ता साझेदारी के बीच के विरोधाभास को भी उजागर किया। उन्होंने पूछा, “तब माओवादी, अब एमाले — गठबंधन की दिशा बार-बार क्यों बदली जा रही है?”
महाधिवेशन में देरी और अनुशासन समिति पर आरोप:
कोइरालाले पार्टी का १५औँ महाधिवेशन निर्धारित समय (१५ मंसिर) में न कराने के संकेतों पर नाराजगी जताई। उन्होंने अनुशासन समिति की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए। “सिर्फ मेरे प्रस्ताव पर दिनेश कोइराला को उठाया गया, यह कहकर मेरे खिलाफ कार्रवाई की बात हुई। किस आधार पर?” उन्होंने अनुशासन समिति को पक्षपाती और कमजोर बताया।
विनोद चौधरी की नियुक्ति और भ्रष्टाचार मामलों पर आपत्ति:
कोइराला ने उद्योगपति विनोद चौधरी को पार्टी विधान की अवहेलना कर केन्द्रीय सदस्य बनाए जाने पर आपत्ति जताई। साथ ही उन्होंने सर्लाही के जिलाध्यक्ष सुरेन्द्रप्रसाद सिंह को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद पद से न हटाने को कांग्रेस के लिए हानिकारक बताया।
भ्रातृ संस्थाओं की उपेक्षा और संगठनात्मक चिंता:
नेता कोइरालाले तरुण दल, महिला संघ, नेविसंघ सहित भ्रातृ संगठनों के अधिवेशन में हो रही देरी और दलित संघ के ४२ जिलों को बिना प्रक्रिया विघटन किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में गुटबाजी और भागबण्डाको राजनीति हावी हो गई है।
देउवा की प्रतिक्रिया:
सभापति देउवा ने कहा कि पार्टी को एकता के साथ आगे बढ़ाना उनका संकल्प है। “देश का नेतृत्व कांग्रेस को ही करना है, इसलिए हमें पार्टी के भीतर एकता मजबूत करनी होगी,” उन्होंने कहा।
१३ बुँदे एजेन्डामा बैठक केन्द्रित:
बैठक में १३ प्रमुख विषयों पर चर्चा के लिए एजेन्डा प्रस्तुत किया गया, जिसमें संगठनात्मक समीक्षा, अनुशासन समिति की रिपोर्ट, सदस्यता नवीकरण, भ्रातृ संस्था अधिवेशन जैसे विषय शामिल रहे।
कांग्रेस की सक्रिय सदस्य संख्या:
महामन्त्री गगन थापा द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार, कांग्रेस की सक्रिय सदस्य संख्या ८ लाख ७० हजार ७८० हो गई है, जिनमें से ४ लाख ४७ हजार सदस्य १४औँ महाधिवेशन के बाद नए जोड़े गए हैं। स्रोत: नयाँ पत्रिका


