सरकार से समर्थन वापस लेगी नागरिक उन्मुक्ति पार्टी : अध्यक्ष रञ्जिता श्रेष्ठ

असार १९, २०८२, धनगढी । सुदूरपश्चिम प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमन्त्री कमलबहादुर शाह द्वारा उद्योग, पर्यटन, वन तथा वातावरण मन्त्री रामेश्वर चौधरी को बर्खास्त किए जाने के बाद नागरिक उन्मुक्ति पार्टी ने संघीय और प्रादेशिक सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की है।
पार्टी की अध्यक्ष रञ्जिता श्रेष्ठ ने गुरुवार को स्पष्ट शब्दों में कहा, “मुख्यमन्त्री शाह ने अपने अधिकार प्रयोग कर हमारे मन्त्री को हटाया, ठीक है। अब हम भी संघ और प्रदेश सरकार से बाहर आ रहे हैं। हमने पार्टी में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है और कल ही औपचारिक रूप से समर्थन वापस लेंगे।”
पार्टी संरक्षक रेशम चौधरी ने भी सरकार से समर्थन वापस लेने की पुष्टि की।
मुख्यमन्त्री शाह ने मन्त्री चौधरी को राजीनामा देने का निर्देश दिया था, परन्तु चौधरी ने इसका सार्वजनिक रूप से विरोध करते हुए कहा था, “सकते हो तो बर्खास्त करके दिखाओ।” इसके बाद उन्हें पद से हटाया गया। नागरिक उन्मुक्ति पार्टी ने भी मन्त्री से राजीनामा न देने का निर्णय पहले ही ले लिया था।
बताया जा रहा है कि मन्त्री चौधरी पर बजट निर्माण में वित्तीय अनुशासन न मानने और खप्तड क्षेत्र पर्यटन विकास तथा व्यवस्थापन समिति में कार्यकारी निर्देशक की नियुक्ति बिना सूचना के करने जैसे आरोप लगे थे। इन्हीं कारणों से उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
फिलहाल सुदूरपश्चिम सरकार कांग्रेस के नेतृत्व में एमाले और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी की साझा सरकार है। प्रदेशसभा में कांग्रेस के १८, एमाले के ११ और नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के ७ सांसद हैं।
हालांकि नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के समर्थन वापसी के बावजूद मुख्यमन्त्री शाह की सरकार पर तत्काल असर नहीं पड़ने वाला है। ५३ सदस्यीय प्रदेशसभा में बहुमत के लिए २७ सदस्य चाहिए, और कांग्रेस व एमाले के पास मिलाकर २९ सांसद हैं, जो बहुमत के लिए पर्याप्त है।

