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कपिलेश्वरनाथ मंदिर में साउने मेले की भव्य तैयारी: श्रद्धा, सेवा और इतिहास का अद्भुत संगम

 

कैलास दास,जनकपुरधाम, २५ असार। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक कपिलेश्वरनाथ मंदिर इस वर्ष के सावन मेले के लिए पूरी तरह तैयार है। त्रेतायुगीन परंपरा को संजोए इस पवित्र स्थल पर सावन के हर सोमवार लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं, जिससे यहाँ की आध्यात्मिक ऊर्जा और शिव-भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है।
इस वर्ष मेला ३० असार (सोमवार) से प्रारंभ हो रहा है। कपिलेश्वरनाथ युवा समिति ने बुधवार को पत्रकार सम्मेलन कर जानकारी दी कि इस बार का मेला पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भव्य, व्यवस्थित और विशेष होगा।
समिति अध्यक्ष मनोज साह के अनुसार—“कपिलेश्वरनाथ बाबा साक्षात भोलेनाथ हैं। जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा और आस्था से मन्नत माँगते हैं, उनकी मनोकामना यहाँ पूरी होती है। यही विश्वास कपिलेश्वरनाथ की ख्याति को दिनप्रतिदिन बढ़ा रहा है।”
जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका–१६ स्थित कपिलेश्वरनाथ मंदिर, जानकी मंदिर से लगभग १ किलोमीटर दूर है। जानकी मंदिर आने वाले श्रद्धालु यहाँ दर्शन किए बिना नहीं लौटते—यह कहना है मंदिर के पूर्व अध्यक्ष सुधीर पजियार का।

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कपिलेश्वरनाथ मंदिर की आध्यात्मिक महिमा
कपिलेश्वरनाथ मंदिर को मिथिला की काशी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जनकवंशी राजा शिरध्वज (राजा जनक) ने जनकपुर के चारों दिशाओं में चार शिव मंदिरों की स्थापना की थी

पूर्व में कपिलेश्वरनाथ,
पश्चिम में अर्जुनेश्वरनाथ,
उत्तर में कुंडलेश्वरनाथ,
दक्षिण में गिरिजेश्वरनाथ।

इनमें से कपिलेश्वरनाथ को सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली माना जाता है, जो ऋषि कपिल मुनि की तपोभूमि से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि यही वह स्थान है जहाँ कपिल मुनि ने दीर्घकालीन तपस्या की थी और भगवान शिव स्वयं प्रकट होकर शिवलिंग रूप में प्रतिष्ठित हुए थे।
मंदिर परिसर में शिव-पार्वती, राम-जानकी, हनुमानजी, गणेशजी और संतोषी माँ की भव्य मूर्तियाँ स्थापित हैं। पाँच कठ्ठा क्षेत्रफल में फैला यह स्थान शांति, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है।

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मेलाः सेवा और श्रद्धा का संगम
श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु समिति ने राहत शिविर, भोजन, स्वास्थ्य सेवा, पेयजल, यातायात आदि की व्यापक व्यवस्था की है।
धनुषा, महोत्तरी, सिरहा, सर्लाही, भारत के सीमावर्ती ज़िलों—सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी आदि से हजारों भक्तों के आगमन की संभावना है। काँवर यात्रा करने वालों के लिए विश्राम और जल अर्पण की भी व्यवस्था की गई है।
सावन भर मंदिर परिसर में पूजा, आरती, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, जो समूचे मिथिला क्षेत्र को शिवमय बना देंगे।

पुनर्निर्माण की कथा: आस्था की अमिट छाप
वि.सं. १९९० के भूकंप में मंदिर का मूल ढाँचा नष्ट हो गया था। उस समय आए काँवरिया विष्णुगिरी ने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया, यद्यपि वह लौटकर नहीं आए। उनकी प्रेरणा से स्थानीय यज्ञप्रसाद ने पुरातत्व विभाग से समन्वय कर वि.सं. २०३९ में नए मंदिर का निर्माण कराया।
पुनः प्रतिष्ठित शिवलिंग, भक्तों की सेवा और आस्था ने इस मंदिर को आज मिथिला की धार्मिक आत्मा बना दिया है।

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इस सावन, कपिलेश्वर आइए—शिवत्व का अनुभव कीजिए
समिति ने सभी शिवभक्तों, पर्यटकों और धार्मिक जिज्ञासुओं को सावन मास में दर्शन हेतु आमंत्रित किया है।
अध्यक्ष मनोज साह कहते हैं—
“कपिलेश्वरनाथ बाबा मिथिला की आत्मा हैं। यहाँ की मिट्टी में शांति, जल में कृपा और वातावरण में शिवत्व समाया हुआ है। आइए, इस सावन कपिलेश्वरनाथ के दर्शन कर आत्मा को शुद्ध करें।”
पत्रकार सम्मेलन में वडाध्यक्ष रामचन्द्र पजियार, समिति के प्रेस सलाहकार तथा वरिष्ठ पत्रकार श्रीनारायण साह समेत अन्य वक्ताओं ने मंदिर के धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।

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