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खतरनाक संकेत: भारत में मंदी का खतरा, महंगाई पर संसद में झगड़ा

नई दिल्‍ली. भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के हालात अच्‍छे नहीं हैं। महंगाई भी जबरदस्‍त बढ़ रही है। इस पर संसद में चर्चा कराने के नाम पर बुधवार को फिर सांसदों ने शोर मचाया। हंगामा इतना बढ़ गया कि लोकसभा और राज्‍यसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्‍थगित करनी पड़ी।

बुधवार को बाजार से भी अच्‍छे संकेत नहीं आए। शेयर बाजार भी 200 अंक नीचे गिर कर खुले। यूबीएस सिक्‍योरिटीज में एमडी सुरेश महादेवन के मुताबिक, ‘रुपये में भारी गिरावट से बाजार हैरान है।’ उनकी राय में बाजार में अस्थिरता अभी कुछ महीने बनी रहेगी। उन्‍होंने चेताया कि भारतीय बाजार अभी दुनिया भर में सबसे खराब प्रदर्शन कर रहा है और यह मौजूदा स्‍तर से 20 फीसदी तक नीचे जा सकता है।

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अर्थव्‍यवस्‍था के लिए एक खतरनाक संकेत यह भी है कि बाजार में आर्थिक लेन-देन के लिए प्रचलित मुद्रा (एम1) में कमी हो रही है। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2010 की तुलना में सितंबर 2011 में एम1 18 फीसदी से घट कर चार फीसदी रह गया है। एचडीएफसी बैंक के मुख्‍य अर्थशास्‍त्री अभीक बरुआ के मुताबिक, ‘चूंकि लेनदेन अप्रत्‍यक्ष रूप से देश की आर्थिक सेहत का हाल बताता है। इसलिए एम1 में कमी इस बात का संकेत है कि चीजें बेहतर नहीं हैं।’

एम1 वह रकम है जो आम लोगों और कारोबारियों के पास व उनके चालू खातों में जमा होती है। इसमें कमी का मतलब है कि लोग अपने पास कम पैसे रख रहे हैं, क्‍योंकि वह निकट भविष्‍य में ज्‍यादा लेन-देन करने की उम्‍मीद नहीं रख रहे हैं। लोगों के पास उपलब्‍ध करेंसी में बढ़ोतरी का दर मार्च 2010 में 15.4 फीसदी था, जो सितंबर 2011 में 14 फीसदी हो गया। बैंकों के बचत व चालू खाता में कम समय के लिए जमा रकम भी एक साल पहले की तुलना में 6 फीसदी कम रह गई है।

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अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी मंगलवार को चेता दिया था कि अगर हालात बेहतर नहीं हुए तो भारत भी मंदी की चपेट में आ सकता है। प्रधानमंत्री ने अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर इतनी गंभीर टिप्‍पणी हाल के महीनों में पहली बार की है।

भारतीय रुपये पर बाजार का दबाव बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर के आगे रुपया पस्त है। बुधवार को रुपया 52.54 के दाम पर खुला। अभी यह 52.18 रुपये पर कारोबार कर रहा है। मंगलवार को रुपये में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी और यह 52.73 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया था। हालांकि रिजर्व बैंक के दखल के बाद इसमें कुछ सुधार हुआ।

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रुपये के गिरने के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा कारण पैदा हो गया है। इस समस्या से निबटने के लिए रिजर्व बैंक कुछ कदम उठा सकता है। माना जा रहा है कि आरबीआई बैंकों से डॉलर में ‘लॉन्ग पोजिशन’ बनाने पर लिमिट लगा सकता है।

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