भंडारी ने दी ओली को चेतावनी कहा… मैं माझ किरात की बेटी हूँ, पीछे नहीं हटूँगी
काठमांडू, सावन ७ –ओली के संदेश पर करारा जबाव देते हुए पूर्व राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी ने कहा कि “मैं माझ किरात की बेटी हूँ, आगे बढ़ चुकी हूँ, अब पीछे नहीं हटूँगी । साथ ही उन्होंने ओली और उनके करीबी नेताओं को चेतावनी दी कि “संस्थापन“ के नाम पर गुटबंदी नहीं करें।
उन्होंने कहा—“पार्टी को पार्टी की तरह चलाना चाहिए, न कि गुटबंदी करके । पार्टी में गुट बनाकर डराना, धमकाना, कार्रवाई की धमकी देना—यह सब अब बंद होना चाहिए ।”
भंडारी ने कहा कि – नेतृत्व हस्तांतरण की चर्चा तो पहले से ही हो रही है । और यह जरुरी भी है कि इस तरह के सवाल पूछे जाएं । उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—“यह सवाल नहीं उठना चाहिए कि ओली के बाद कौन ? दो साल का कार्यकाल और ७० वर्ष की उम्र सीमा लागू हो जाने के बाद नेतृत्व अपने आप आएगा, किसी को किसी को ढ़ोते रहने की जÞरूरत नहीं है । मेरी उम्र अभी ७० नहीं हुई है । मैं हमेशा से पार्टी के काम में रही हूँ । पार्टी ने ही मुझे राष्ट्रपति बनाया था, अब जब लौटकर आई हूँ तो फिर से पार्टी कार्य में व्यस्त हूँ ।” उन्होंने यह भी कहा कि वह नेतृत्व की दावेदारी से पीछे नहीं हटेंगी । ओली ने भंडारी को समझाते हुए कहा था कि सम्मानजनक पद पर रहे व्यक्ति को पार्टी की राजनीति में नहीं आना चाहिए, लेकिन भंडारी ने स्पष्ट कह दिया कि –यदि उन्हें राष्ट्रपति नहीं बनना होता तो वे पहले ही नेतृत्व ले चुकी होतीं। उन्होंने यह भी कहा कि वे अब पार्टी के वैचारिक पक्ष को मजबूत करने और राष्ट्रहित में काम करने लौटी हैं ।
भण्डारी के अनुसार अब ओली को पार्टी अध्यक्ष के रूप में तीसरा कार्यकाल नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा—“पार्टी बड़ी है, नेतृत्व में पहुँचने और अपने कार्यक्रम लागू करने के लिए सबको स्वतंत्र होना चाहिए। वरना नीचे स्तर पर संगठन निर्माण क्यों करते हैं? सबको नेतृत्व में जाने की इच्छा होती है ।
उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने नेतृत्व की दावेदारी छोड़ी थी, तब यह तय हुआ था कि ईश्वर पोखरेल को अध्यक्ष बनाया जाएगा । उन्होंने कहा—“मैं जब राष्ट्रपति बनी, तब दसवें महाधिवेशन में ईश्वर पोखरेल को अध्यक्ष बनना चाहिए था । यही सहमति भी थी । किसी एक व्यक्ति का लगातार नेतृत्व प्रभावकारी नहीं होता—यह सबको समझना चाहिए ।”
भंडारी ने कहा कि यदि वह राष्ट्रपति नहीं बनी होतीं तो दसवें महाधिवेशन में ही नेतृत्व का जिम्मा संभाल लेतीं। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि नेतृत्व नई पीढ़ी को सौंपा जाए।


