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मंत्रिमंडल फेरबदल पर घमासान: छोटे दलों की अंदरूनी खींचतान से अटका पुनर्गठन

 
फ़ोटो ऑनलाइन खबर से साभार

काठमांडू, 9 भाद्र।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली मंत्रिपरिषद् में फेरबदल करना चाहते हैं, लेकिन छोटे दलों के दबाव और नेपाली कांग्रेस की अनिच्छा के कारण मंत्रिमंडल पुनर्गठन अटका हुआ है। वर्तमान सरकार में नेपाली कांग्रेस, एमाले और तीन छोटे दल शामिल हैं। इनमें अशोक राई की जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) और महन्थ ठाकुर की लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) ने अपने–अपने मंत्रियों को बदलने का निर्णय लिया है। वहीं, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी (नाउपा) में आंतरिक विवाद ने स्थिति और जटिल बना दी है।

जसपा का फैसला

जसपा ने खानेपानी मंत्री प्रदीप यादव और महिला, बालबालिका तथा ज्येष्ठ नागरिक मंत्री नवलकिशोर साह को वापस बुलाने का निर्णय लिया है। पार्टी के अनुसार, पहले से बनी सहमति के तहत मंत्रियों का कार्यकाल एक साल का ही होना था। अब जसपा ने उनकी जगह डॉ. वीरेन्द्र महतो और रanju झा के नाम प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिए हैं। जसपा के पास प्रतिनिधि सभा में 7 सांसद हैं।

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लोसपा का दबाव

लोसपा ने भी प्रधानमंत्री ओली को पत्र लिखकर श्रममंत्री शरतसिंह भंडारी को हटाने और उनकी जगह वरिष्ठ सह-अध्यक्ष सर्वेन्द्रनाथ शुक्ल को भेजने का अनुरोध किया है। पार्टी महासचिव मनीष मिश्र के अनुसार, भंडारी ने पूर्व सहमति के अनुसार अपने एक साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। लोसपा के प्रतिनिधि सभा में 4 सांसद हैं।

नाउपा में संकट

नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के राज्यमंत्री अरुण चौधरी ने इस्तीफा दिया है, लेकिन अब तक वह स्वीकार नहीं हुआ है। 22 असार को सरकार से समर्थन वापस लेने के निर्णय के साथ ही चौधरी ने पद छोड़ा था, मगर मंत्रालय में वे अब नहीं जाते। दूसरी ओर, पार्टी के भीतर सत्ता पक्ष या विपक्ष में रहने को लेकर गंभीर मतभेद है।

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संरक्षक रंजिता श्रेष्ठ ने नाउपा को सत्ता पक्ष में मान्यता देने का अनुरोध किया है, जबकि गंगाराम चौधरी ने विपक्षी बेंच की मांग की है। संसद सचिवालय को भेजे गए पत्रों के बावजूद सभामुख देवराज घिमिरे ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। नाउपा के पास प्रतिनिधि सभा में 4 सांसद हैं।

कांग्रेस की चुप्पी और ओली की दुविधा

जसपा और लोसपा मंत्री बदलने के लिए उतावले हैं, लेकिन कांग्रेस की सहमति न होने से प्रधानमंत्री ओली तत्काल फेरबदल कर पाने की स्थिति में नहीं हैं। इससे सरकार के भीतर अविश्वास और तनाव और बढ़ा है।

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👉 कुल मिलाकर, छोटे दलों की आंतरिक खींचतान और कांग्रेस की चुप्पी ने ओली मंत्रिमंडल का फेरबदल अटका दिया है।

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