प्रधानमंत्री ओली ने जिम्मेदारी से किनारा किया, मौतों का ठीकरा घुसपैठियों पर फोड़ा
काठमांडू,मंगलवार, २४ भाद्र २०८२ । जेन–जी पीढ़ी के प्रदर्शन में हुई १९ लोगों की मौत और दमन की आलोचना झेल रही सरकार पर नैतिक जिम्मेदारी लेने का दबाव बढ़ रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोमवार शाम जारी बयान में इस जिम्मेदारी से खुद को अलग करते हुए “घुसपैठ” को ही नागरिकों की मौत का कारण ठहराया। इसके विपरीत, गृहमंत्री रमेश लेखक ने घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया।
ओली ने कहा, “जेन–जी पीढ़ी द्वारा आहूत शांतिपूर्ण प्रदर्शन में विभिन्न स्वार्थ समूहों की घुसपैठ के कारण स्थिति बिगड़ी और नागरिकों की जान गई, जो अत्यंत दुखद है।”
हालांकि, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की ओर से हुए अति बल प्रयोग से मानवीय क्षति हुई, लेकिन प्रधानमंत्री ने अपने बयान में संवैधानिक संस्थाओं की इमारतों और ढांचागत क्षति पर ज्यादा जोर दिया। उनके अनुसार, प्रदर्शन में घुसपैठ करने वालों ने कार्यालयों पर तोड़फोड़ और आगजनी की, जिससे राज्य की सम्पत्ति बचाने की कोशिश में अप्रिय स्थिति बनी और जनहानि हुई।
प्रधानमंत्री का कहना था कि सरकार जेन–जी पीढ़ी की मांगों के प्रति नकारात्मक नहीं थी और उन्हें सुना जा रहा था। मगर घुसपैठियों ने प्रदर्शन को हिंसात्मक दिशा में मोड़ा।
देशभर में हुए प्रदर्शन भ्रष्टाचार और सुशासन की मांग के लिए थे, लेकिन प्रधानमंत्री के वक्तव्य में इस मुद्दे पर कोई ठोस टिप्पणी नहीं की गई। उन्होंने केवल सोशल मीडिया पर सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि “सरकार सोशल मीडिया को बंद करने की नीति नहीं रखती। कानून और अदालत के आदेश के अनुरूप इसे व्यवस्थित करने की कोशिश हो रही है।”
प्रधानमंत्री ने नागरिकों की मौत पर गहरा दुख जताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और आश्वासन दिया कि मृतकों के परिवारों को राहत पैकेज और घायलों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि पूरे घटनाक्रम की जाँच के लिए एक समिति बनाई जाएगी, जो १५ दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाएगी।


