सिंहासन खाली कराे कि जनता आती है, शहादत कभी खाली नहीं जाती : श्वेता दीप्ति
हुंकारों से महलों की नींव उखड़ जाती,
सांसों के बल से ताज हवा में उड़ता है,
जनता की रोके राह,समय में ताव कहां?
वह जिधर चाहती,काल उधर ही मुड़ता है।
अभिषेक आज राजा का नहीं,प्रजा का है,
तैंतीस कोटि जनता के सिर पर मुकुट धरो।
दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।
अंततः काठमांडू और देश भर में कल और आज जो युवा विद्रोह हुआ उसका एक परिणाम सामने आ गया कि तानाशाही का रूप बने ओली को इस्तीफा देना पड़ा है । सरकार ने प्रतिरोध के नाम पर जो क्रूर दमन किया है, उससे यह पहले ही स्पष्ट हो चुका था कि देश में केपी ओली के नेतृत्व वाली सरकार की वैधता अब समाप्त हो चुकी है ।
नई पीढ़ी की भावनाओं का लगातार अवमूल्यन करके सत्ता में बने रहने वाले प्रधानमंत्री ओली और उनके सत्ता सहयोगियों के इरादे पूरे समाज के सामने उजागर हो चुके थे । इसके साथ ही, शीर्ष नेतृत्व में शामिल शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहाल की राजनीतिक उपयोगिता भी समाप्त हो गई है । उन्होंने 2063 के बदलाव के बाद के महत्वपूर्ण वर्षों को अपनी अदूरदर्शिता के कारण बरबाद कर दिया है ।
जेनजी की माँग असामान्य नहीं थी । वे अपने आक्रोश को व्यक्त करने की कोशिश कर रहे थे । वो निहत्थे थे और ऐसे में उन पर
बर्बरता से गोली चलाई गई । ये वो पीढी है जो जेनरेशन ज़ेड, यानी 1997 और 2010 के बीच पैदा हुई पीढ़ी, इस आन्दोलन का नेतृत्व कर रही थी । जिसे सरकार ने बहुत कम आँकने की गलती की जिसका परिणाम आज सामने है । दुख इस बात का है कि हमने अपने कई नौनिहालों को खो दिया है । परंतु वर्तमान में यह सावधानी अवश्य बरतनी होगी कि इस शहादत का गलत इस्तेमाल ना हो और फिर से वही पुराने चेहरे ना दोहराए जाएँ । सामूहिक विवेक पर भरोसा करने, नागरिकों को हमेशा सर्वोपरि मानने और 42 प्रतिशत से ज़्यादा युवाओं को नेतृत्व के केंद्र में लाने का प्रयास करना चाहिए । अब हम एक सशक्त नागरिक सरकार के गठन की उम्मीद करते हैं । नागरिकों द्वारा स्वतःस्फूर्त रूप से शुरू किए गए इस अभियान का जल्द ही कोई समाधान निकलना चाहिए । इसके लिए, देश के प्रबुद्ध नागरिकों, जिन्होंने अपने–अपने क्षेत्रों में लंबे समय से योगदान और प्रतिष्ठा अर्जित की है, को अंतरिम सरकार का नेतृत्व करना चाहिए । वह सरकार चुनावों के माध्यम से एक नए जनादेश का द्वार खोले । और अंतरिम सरकार को कुछ महीनों के भीतर चुनावों की घोषणा करनी चाहिए । उससे मिलने वाला नया जनादेश भविष्य में लोकतंत्र के सुचारू और पारदर्शी संचालन को सुनिश्चित करेगा ।

