Sat. Jul 25th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

प्रदर्शन के डेढ़ महीने बाद भी 12 मृतकों की पहचान नहीं

 

 काठमांडू, 29 अक्टूबर 2025 । 24 भदौ (सप्टेम्बर 9) को हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान भाटभटेनी सुपरमार्केट के विभिन्न शाखाओं से बरामद 12 जले हुए शवों की पहचान डेढ़ महीने बाद भी नहीं हो सकी है। सरकारी निकायों और आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं की लापरवाही से इन शवों की पहचान की प्रक्रिया अब भी अधर में है।

भाटभटेनी के काठमांडू चुच्चेपाटी स्टोर से 7, धरान से 4 और विराटनगर से 1 जले हुए शव बरामद किए गए थे। सभी शव इतनी बुरी तरह जल चुके थे कि लिंग पहचानना भी संभव नहीं था, और डीएनए परीक्षण भी बेहद कठिन हो गया है।

जले हुए शव, परिजनों का कोई दावा नहीं

पुलिस के अनुसार, अब तक किसी भी व्यक्ति या परिवार ने इन शवों को अपना नहीं बताया है। चुच्चेपाटी में मिले शवों को त्रिवि शिक्षण अस्पताल में प्लास्टिक में पैक कर सुरक्षित रखा गया है, जबकि धरान और विराटनगर के शवों का नमूना लेकर अंत्येष्टि कर दी गई है।

यह भी पढें   हर आत्मा अपने अनुभवों की यात्रा पर है - अध्यात्म : बिमल सर्राफ

धरान में मिले चार और विराटनगर में मिले एक शव के अस्थिपंजर लगभग राख में तब्दील थे। सुनसरी के एसपी केशव थेवे के अनुसार, “अस्थिपंजरों के डीएनए सैंपल लिए गए थे, पर पहचान न हो पाने के कारण शवों को स्थानीय पालिका को सौंपकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।”

 डीएनए जांच में मुश्किल

प्रहरी प्रवक्ता डीआईजी विनोद घिमिरे ने बताया कि अब तक किसी शव की पहचान नहीं हो सकी है। “कोई भी व्यक्ति दावा करने नहीं आया है। शव पूरी तरह जले हुए हैं, इसलिए डीएनए जांच में भी बाधा आ रही है,” उन्होंने कहा।

 अन्य स्थानों पर भी जले शव मिले

इन घटनाओं के अलावा, देशभर में प्रदर्शन के दौरान आगजनी में कुल 15 लोगों की मौत हुई थी। इनमें से कई की पहचान कर उनके शव परिवारों को सौंपे जा चुके हैं।

  • ललितपुर में निजी घर में काभ्रे के सरोज खत्री का शव मिला।
  • थानकोट (काठमांडू) में मदन परिवार के सदस्य मृत मिले।
  • कास्की में स्वस्थानी खड्का और कान्छी नगरकोटी की मृत्यु हुई।
  • पर्सा और चितवन में आगजनी में क्रमशः सुशीलादेवी पासवान और सरोज गुरुङ की जान गई।
यह भी पढें   सभापति गगनकुमार थापा द्वारा ‘ग्रीन रन’का शुभारम्भ

76 मौतें, गोली और आगजनी से तबाही

गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 23 और 24 भदौ के प्रदर्शनों में कुल 76 लोगों की मौत हुई।

  • 23 भदौ को काठमांडू और इटहरी में 22 लोगों की गोली लगने से मौत हुई।
  • 24 भदौ को 41 प्रदर्शनकारी, 10 कैदी, और 3 पुलिसकर्मी मारे गए।
  • केवल काठमांडू उपत्यका में 35 प्रदर्शनकारी गोली से मारे गए थे, जिनमें से 19 को छाती में, 10 को सिर में गोली लगी थी।
  • जाँच और आरोप

इन गोलीकांडों के पीछे की वास्तविक जिम्मेदारी पर अब तक स्पष्टता नहीं आई है। प्रहरीको आन्तरिक छानबिन प्रतिवेदन के अनुसार, जेन-जी आन्दोलन के दौरान 4 हजार गोलियाँ और 8 हजार अश्रुग्यास के गोले चलाए गए थे।

यह भी पढें   संसदीय सुनवाई समिति की बैठक आज

आन्दोलन की अगुवाओं में से एक रक्षा बम ने कहा, “हम सरकार से शहीद परिवारों के लिए राहत और घायलों के उपचार की मांग कर रहे हैं, परंतु मृतकों की पहचान न होना हमें भी नहीं बताया गया था।”

राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोग और पूर्वन्यायाधीश गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता में बनी सरकारी छानबिन आयोग—दोनों ने इस मामले की जाँच शुरू की है, लेकिन अब तक किसी ठोस परिणाम की घोषणा नहीं की गई है।

सारांश:
भाटभटेनी सुपरमार्केट में मिले 12 जले शवों की पहचान डेढ़ महीने बाद भी नहीं हो पाई है। सरकारी उदासीनता और तकनीकी बाधाओं के कारण पीड़ित परिवार अब भी अनिश्चितता में हैं।

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed