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यह संविधान विपरीत कदम है – हरिनारायण महतो

 

काठमांडू, कार्त्तिक २४ – मधेश प्रदेश में नए मुख्यमंत्री नियुक्ति को लेकर एमाले के भीतर भी असन्तुष्टि दिख रही है । एमाले के ही प्रदेश प्रमुख सचेतक महतो ने इस कदम की आलोचना की है और कहा कि – ‘यह संविधान विपरीत कदम’ है ।
प्रदेश प्रमुख सुमित्रा देवी भंडारी ने संविधान की धारा १६८ के उपधारा (३) अनुसार एमाले संसदीय दल के नेता सरोज यादव को मुख्यमंत्री में नियुक्त किया है । उनके इस काम के प्रति एमाले के ही प्रदेशसभा प्रमुख सचेतक हरिनारायण महतो ने इसे असंवैधानिक और जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताते हुए इसपर अपनी असहमति जताई है । उनका कहना कि ‘धारा २ अनुसार सरकार बनने की संभावना होते हुए भी वो धारा ३ में गई ।’
प्रमुख सचेतक महतो के अनुसार संविधान की धारा १६८ के उपधारा (२) अनुसार ही सरकार गठन करने की अवस्था होते हुए भी धारा (३) अनुसार मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाना गलत है ।
“संविधान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि — धारा १६८(२) अन्तर्गत बहुमत प्राप्त करने वाले सांसद के नेतृत्व में सरकार बनाई जाएगी ।” महतो ने कहा “लेकिन उस संभावना को अनदेखा करते हुए बिना परीक्षण किए धारा १६८(३) अनुसार सबसे बड़े दल के नेता की हैसियत में सरकार गठन करना संविधान के मर्म विपरीत है ।”
उनका कहना यह भी कि प्रदेश में अभी ऐसी कोई अवस्था नहीं थी जिसके तहत धारा (३) के अन्तर्गत सरकार गठन के लिए बाध्य होना पड़े ।
उन्होंने यह भी कहा कि – “देश अभी असहज अवस्था में है, ऐसी अवस्था में प्रदेश प्रमुख को इतने संवेदनशील विषय में जल्दबाजी से इस तरह का निर्णय नहीं लेना चाहिए था ।” “ये निर्णय गलत हुआ है और पुनः विचार करने का विषय है । ‘पार्टी और संसदीय दल में चर्चा भी नहीं हुई ।’
“एमाले प्रदेश कमिटी और संसदीय दल में धारा १६८(२) अनुसार सरकार गठन की तैयारी करने की सहमति हुई थी ।” उन्होंने स्पष्ट किया कि “ लेकिन मैं स्वयं प्रमुख सचेतक हूँ, मुझे भी इसकी जानकारी नहीं   दी गई और धारा (३) अनुसार सरकार गठन  की गई , मुझे बाद में पता चला ।”

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