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पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक का बड़ा बयान: जेन-जी आंदोलन में घुसपैठ, राष्ट्र और लोकतंत्र पर था सुनियोजित हमला

 

काठमांडू, २९दिसम्बर ०२५। नेपाल के पूर्व गृहमंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश लेखक ने जेन-जी आंदोलन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि भदौ 23 और 24 को हुए जेन-जी आंदोलन में युवाओं की जायज और शांतिपूर्ण मांगों को कुछ शरारती एवं लोकतंत्र-विरोधी तत्वों ने हाईजैक कर लिया, जिसके कारण आंदोलन हिंसक रूप में बदल गया। लेखक के अनुसार यह घटनाक्रम केवल उग्र प्रदर्शन नहीं था, बल्कि राष्ट्र और लोकतंत्र पर सुनियोजित हमला था।

सिंहदरबार स्थित जाँचबुझ आयोग में बयान दर्ज कराने के बाद पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से सवाल होना स्वाभाविक है और उनका जवाब देना लोकतांत्रिक मूल्य और परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेन-जी युवाओं द्वारा उठाई गई मांगें मूल रूप से सही और न्यायसंगत थीं तथा उस समय की सरकार उन्हें पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही थी।

रमेश लेखक ने बताया कि 23 भदौ को माइतीघर मंडला में जेन-जी युवाओं द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सूचना मिली थी। इसी विश्वास के आधार पर प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि 22 भदौ की शाम सुरक्षा समिति की बैठक भी बुलाई गई थी, लेकिन उस बैठक में कहीं भी बल प्रयोग या गोली चलाने की कोई योजना नहीं बनी थी। लेखक ने दो टूक कहा कि न तो प्रधानमंत्री और न ही गृहमंत्री को गोली चलाने का आदेश देने का अधिकार है और न ही उन्होंने ऐसा कोई आदेश दिया।

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पूर्व गृहमंत्री के अनुसार, आंदोलन के शुरुआती चरण में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल थे, जिनमें कई स्कूल की वर्दी में भी थे। जिला प्रशासन से भी यही जानकारी मिली थी कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा। लेकिन बाद में आंदोलन में व्यापक स्तर पर घुसपैठ हुई और इसे हिंसक बनाया गया। संसद भवन, नए बानेश्वर क्षेत्र और अन्य स्थानों पर अचानक तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा शुरू हो गई।

लेखक ने कहा कि हालात बिगड़ते देख स्वयं जेन-जी आंदोलन के अगुवाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश जारी कर यह स्वीकार किया कि आंदोलन को हाईजैक किया जा रहा है और युवाओं से घर लौटने की अपील की। इसके बावजूद हिंसा और अराजकता फैलती गई। उन्होंने आरोप लगाया कि “धुंधले पानी में मछली पकड़ने” की कोशिश करने वाले तत्वों ने युवाओं की भावनाओं का इस्तेमाल कर पूरे आंदोलन को सुनियोजित तरीके से हिंसक बना दिया।

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24 भदौ को हुई घटनाओं को लेकर रमेश लेखक ने कहा कि उन्हें युवाओं की मांगों से अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार सिंहदरबार, सर्वोच्च अदालत, संसद भवन और राष्ट्रपति भवन जैसे राज्य के प्रमुख और संवैधानिक संस्थानों पर हमला किसी भी सामान्य नागरिक या देशभक्त नेपाली की सोच का हिस्सा नहीं हो सकता। यह लोकतंत्र में शक्ति पृथक्करण और संतुलन की व्यवस्था पर सीधा हमला था।

उन्होंने यह भी कहा कि एक ही दिन में देशभर के सरकारी कार्यालयों, पुलिस थानों, विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यालयों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और चुनिंदा व्यक्तियों की निजी संपत्तियों को जिस तरह से निशाना बनाया गया, वह अचानक उपजे आक्रोश या भीड़ के गुस्से का परिणाम नहीं हो सकता। यह पूर्व-तैयारी और सुनियोजित साजिश का संकेत देता है। लेखक के अनुसार नेपाल के इतिहास में एक ही दिन में इतनी व्यापक मानवीय और भौतिक क्षति पहले कभी नहीं हुई थी।

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पूर्व गृहमंत्री ने भदौ 23 और 24 को हुई जनधन की भारी क्षति पर गहरा दुःख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में इन घटनाओं के पीछे की सच्चाई, तथ्य और साजिशें सामने आएंगी। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जेन-जी युवाओं की पवित्र और सकारात्मक भावनाओं पर खेलकर जिन लोगों ने हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

रमेश लेखक ने अंत में कहा कि युवाओं की जायज मांगों और उनके आंदोलन को हिंसक घटनाओं से अलग करके देखा जाना जरूरी है। आपराधिक गतिविधियों में शामिल जो भी व्यक्ति या समूह हों, उन्हें कानून के दायरे में लाकर कड़ी सजा दी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में लोकतंत्र और राज्य की संस्थाओं पर इस तरह के हमले दोबारा न हो सकें।

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