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रेशम चौधरी का सवाल—अगर मैं चुनाव नहीं लड़ सकता, तो क्या ओली-देउवा-रवि लड़ पाएंगे?

 

काठमांडू, 14 पुष। नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के नेता रेशम चौधरी ने कहा है कि अगर उन्हें चुनाव लड़ने से रोका गया, तो केपी शर्मा ओली, शेरबहादुर देउवा, पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’ और रवि लामिछाने को भी चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

निर्वाचन आयोग में अपनी पार्टी की ओर से समानुपातिक उम्मीदवारों की बंद सूची जमा कराने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए चौधरी ने कहा कि यह कहना ही गलत है कि रेशम चौधरी चुनाव नहीं लड़ सकते। उन्होंने प्रतिप्रश्न करते हुए कहा—
“अगर रेशम चौधरी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, तो क्या केपी ओली चुनाव लड़ेंगे? क्या प्रचंड या शेरबहादुर देउवा चुनाव लड़ेंगे? क्या रवि लामिछाने जेल से बाहर आकर चुनाव लड़ेंगे? क्या बालेन शाह चुनाव लड़ेंगे?”

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चौधरी ने जेनजी आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि 23 और 24 भदौ को दमन के खिलाफ आंदोलन हुआ, जिसमें 77 लोग शहीद हुए और कई घायल अब भी अस्पताल में इलाजरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जेनजी आंदोलन में बहा खून अभी सूखा भी नहीं है, लेकिन ओली और देउवा जैसे नेता चुनाव लड़ सकते हैं, जबकि उन्हें रोका जा रहा है।

उन्होंने कहा,
“जेनजी आंदोलन के समय के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेता शेरबहादुर देउवा चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन सिर्फ थारु होने के कारण रेशम चौधरी चुनाव नहीं लड़ सकते—यह कैसा न्याय है?”

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चौधरी ने देश में अब भी जातीय आधार पर अन्याय और दमन जारी रहने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि अदालत पुष्पकमल दाहाल को चुनाव लड़ने का अधिकार देती है, लेकिन उनके मामले में अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है।

टिकापुर घटना के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर चौधरी ने स्पष्ट किया कि उनका उस घटना से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि देश की आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अनुसार, जो व्यक्ति घटना स्थल पर मौजूद ही नहीं था, उस पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

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उन्होंने कहा,
“मैं घटना स्थल पर था ही नहीं। फिर मुझे दोषी कैसे ठहराया गया? सिर्फ थारु होने के कारण अन्याय नहीं होना चाहिए।”

रेशम चौधरी के इस बयान ने एक बार फिर चुनावी अधिकार, न्यायिक प्रक्रिया और जातीय न्याय को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

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