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असमय बुझ गई रौशनी ! : कंचना झा

रोशनी
 

कंचना झा, हिमालिनी अंक दिसम्बर, ०२५ । मधेश प्रदेश हमेशा किसी न किसी घटना को लेकर चर्चा में बना रहता है । कभी सत्ता के लिए चर्चा में, कभी मुख्यमंत्री को लेकर तो कभी किसी दर्दनाक घटना को लेकर । मधेश प्रदेश की राजधानी जनकपुर की अवस्था आजकल बहुत ही तनावपूर्ण है । एक दहशत है । लोगों की आँखों में आँसू, मुख में कुछ नारे, दोषी को मांग माफ नहीं करने की, दोषी को फांसी की सजा मिले, रोशनी को मिले न्याय । इन नारों से, इन चीखों से गूँज रहा है जनकपुर ।

मंसिर २१ गते रोशनी के मायके वालों ने पत्रकार सम्मेलन किया और उसके भाई ने कहा कि – यदि रोशनी के हत्यारों को सजा नहीं मिली तो जानकी मंदिर के प्रांगण में ही वे देह त्याग करेंगे । उन्होंने कहा कि – हमने अपनी बहन को मरने के बाद भी नहीं छोड़ा है उसके साथ ही हम भी चले जाएंगे । हम अंतिम तक लड़ते रहेंगे ।

जनकपुर और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना ने आक्रोश और संवेदनशील माहौल उत्पन्न कर दिया है । यह मामला महिला सुरक्षा, घरेलू हिंसा और कानून व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है । सोशल मीडिया और स्थानीय समूहों ने इस केस को लेकर न्याय की मांग तेज कर दी है । परिवार ने न्याय की मांग करते हुए जिला पुलिस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया और रोशनी के पति और ससुर को पुलिस ने हिरासत में लिया है और पूछताछ जारी है । हालांकि एक और बात सामने आई है कि रोशनी हत्याकांड में अनुसंधान के लिए सीआईबी तैनात की गई है । देखे क्या खुलासा होता है । सबके मन में जो यह बात चल रही है कि ये हत्या है या फिर साजिश इस पर से पर्दा उठना जरूरी है ।रोशनी

एक बेटी का ब्याह माता पिता कितने अरमान से करते हैं । उसके लिए सपनों का राजकुमार खोजकर, तलाश कर लाते हैं । खुद को मिटाकर उनके शौक अरमान पूरा करते हैं । कहते हैं कि माता पिता हमेशा अपने से अच्छे कुल खानदान में बच्ची का विवाह करना चाहते हैं ताकि वो हमेशा सुखी और शांतिपूर्ण जीवन बिताएं । तो क्या रोशनी के माता पिता ने ये नहीं सोचा होगा ? एक ही शहर मे, पढ़े लिखे परिवार में बहुत देख भाल कर अपनी बेटी को दिया था । लोग क्यों भूल जाते हैं कि उनकी भी बेटियां हैं । आज जो रोशनी के परिवाल वालों की हालत है । जो वो मांग कर रही हैं ? क्या उन्हें न्याय मिलेगा ? वो बार बार कह रही है कि मेरी बच्ची को मार दिया गया है । वो आत्महत्या कर ही नहीं सकती है ।

वैसे ११ दिन बीत जाने के बाद भी रोशनी के बारे में न जाने क्या अनुसंधान किया जा रहा है कि कुछ पक्की बात सामने आ ही नहीं रही है । एक महिला जिसके दो छोटे–छोटे बच्चे हैं, मरने से एक घंटे पहले हंसी खुशी अपनी माँ से बात कर रही है वो अचानक से आत्महत्या कर लें यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है । कहने के लिए पुलिस तहकीकात कर रही है, लेकिन न जाने क्या कर रही है इसकी किसी को जानकारी नहीं है । जनकपुर के आम लोग खासकर महिलाएं घर से बाहर निकल कर रोशनी के लिए न्याय की गुहार कर रही है । रोशनी की माँ की अवस्था दिनों दिन खराब हो रही है वो केवल और केवल अपनी बच्ची के लिए न्याय की मांग कर रही है । लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से किसी तरह की कोई खबर नहीं है ।

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कहानी २७ वर्षीय रोशनी झा की है जिसकी लाश गुरुवार की शाम जनकपुरधाम–४ स्थित अपने ही घर में मृत अवस्था में मिली । रोशनी का मायका नगराइन नगरपालिका–२, जटही है । रोशनी की शादी पर्साही निवासी संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय में कार्यरत प्रशासन अधिकृत प्रशान्त कुमार मिश्र से हुई । विभिन्न मीडिया में आई बात के अनुसार स्थानीय लोगों की माने तो सबकुछ ठीक ही चल रहा था । रोशनी के ससुर भी कह रहे हैं कि दोनों के बीच अच्छे संबंध थे तो अचानक से क्या हुआ कि दो बच्चों की माँ की हत्या कर दी गई या फिर ससुराल वालों की माने तो रोशनी ने आत्म हत्या कर ली है ? रोशनी टिकटॉक चलाती थी । सोशल मीडिया पर एक्टिव थी । पति अच्छा कमाता था तो फिर ऐसा क्यों ? यह बात सभी के जेहन में हैं कि आखिर उस एक घंटे में क्या हुआ था । इसकी अच्छी तरह से तहकीकात होनी चाहिए ।
हालांकि बातें तो और भी बहुत सामने आ रही है जिनमें दो बातें खास हैं एक तो प्रशांत बहुत जल्दी अमीर बनना चाहता था और दूसरा उसका किसी लड़की से अफेयर की भी बात आ रही है । तो हो सकता है कि इस बात को लेकर उस दिन दोनों के बीच झगड़ा हुआ हो । ये तो जगजाहिर सी बात है कि एक पत्नी सबकुछ सह सकती है लेकिन अपने पति को किसी और स्त्री के साथ बांटना पसंद नहीं करती है । इसके लिए वो खुलकर लड़ती है, जिरह करती है । जो स्वाभाविक है ।

दो बच्चों की माँ रोशनी की मृत्यु ‘संदिग्ध’ होने का आरोप उनके मायके पक्ष ने लगाया है । विभिन्न मीडिया में भी यह बात आ रही है कि प्रशांत और उसके घर वालें बार–बार अपना बयान बदल रहे हैं । मायके वालों के अनुसार, रोशनी के ससुराल पक्ष ने उन्हें यह जानकारी दी थी कि वह सीढ़ी से गिर गई थीं और सिर में चोट लगने से उनकी मृत्यु हुई । लेकिन रोशनी की गर्दन पर नीला निशान था । इसी वजह से, परिवार द्वारा बताए गए कारण से अलग स्थिति में रोशनी का शव मिलने के बाद मायके पक्ष ने उनकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया है । उनका कहना है कि यह हत्या रोशनी के पति प्रशांत ने की है ।
मीडिया से बात करते हुए रोशनी के मामा ने बताया कि गला दबाकर उसकी हत्या की गई और साक्ष्य मिटाने के लिए कपड़े तथा अन्य सामान रात को ही जलाए गए । आखिर क्यों जलाए गए ? संदेह तो बनता है । मायके पक्ष ने पुलिस से न्याय की मांग की है । रोशनी के मामा पंकज झा ने बताया कि घटनास्थल पर जले हुए सामान के अवशेष मिले हैं और आरोपितों ने बार–बार अपने बयान बदले हैं ।
एक क्षण के लिए मान लें कि उसने आत्महत्या की तो वहाँ कुछ न कुछ सुराग मिलना चाहिए था । जैसै की रस्सी मिलनी चाहिए थी । आखिर किसने उसे उतारा कोई अकेला तो नहीं उतार सकता ? वहाँ उस वक्त कौन कौन था । इसकी भी बात आनी चाहिए थी । घरवालों ने स्वयं क्यों उतारा । पुलिस को आने देते । पुलिस का इंतजार नहीं किया तो कम से कम उसकी तस्वीर ले लेते ? सभी प्रमाण को नष्ट करने की भी बात आ रही है । यह सब सवाल उठा रहे हैं कि कहीं न कहीं गहरी साजिश का शिकार हुई रोशनी ।

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मीडिया में यह भी बात आई है कि प्रशांत ने रोशनी के नाना को यह बात बताई कि दोनों में किसी बात को लेकर अनबन हुई जो इतनी बढ़ गई कि उसने रोशनी का गला दबा दिया । इसके अलावे बार–बार पैसे मांगने की भी बात आ रही है । वो रोशनी से बार–बार पैसे का डिमांड करता था और रोशनी के माता–पिता उसे कुछ न कुछ पैसे दिया करते थे ।
यहाँ गौर करने वाली क्या बात है कि रोशनी का मायका और ससुराल पक्ष दोनों कुछ ही दूरी पर है । तो हमेशा माँ बेटी का मिलना होता था । फोन पर बातें होती थी । इसलिए आत्महत्या वाली बात किसी को पच नहीं रही है । एक बेटी जब बहुत दुखी होती है । तो वो बहुत तरह की बात सोच सकती है लेकिन जब वहीं उसकी माँ से हमेशा बात हो रही है और उसके दो बच्चे हैं तो वह ऐसा कदम नहीं उठा सकती है । तो यहाँ मायके पक्ष के लोगों का कहना है कि वो आत्महत्या कर ही नहीं सकती है । मरते वक्त तक उसने संघर्ष किया वो लड़ी है सबसे । मीडिया से बात करती रोशनी की मामी ने बहुत कुछ बताया है कि वो लड़ी है आखिर साँस तक । जब रोशनी की माँ को खबर किया गया वो वहाँ पहुँची तो ढंग से उसे देखने भी नहीं दिया गया और रोशनी को उठाकर अस्पताल ले जाया गया । माँ अपनी एकलौती बच्ची को ढंग से देख भी नहीं पाई । आखिर इतनी हड़बड़ी क्या थी जो किसी का इंतजार नहीं किया गया ?

शुरु के एक दो दिन रोशनी की माँ ने मीडिया से बात करते हुए बहुत कुछ बताया था । आजकल वो बीमार चल रही है । अपनी बेटी की हत्या हो जाने के बाद अब उन्होंने बोलना बंद कर दिया है । अब वो केवल न्याय की मांग कर रही है । रोशनी की माँ ने मीडिया से बात करते हुए कहा था उस दिन जब उन्हें बताया कि रोशनी की अवस्था अच्छी नहीं है उससे कुछ ही देर पहले रोशनी की माँ से बात हुई थी जिसमें उसने जिक्र किया था कि उसके पति प्रशांत आ चुके हैं और वो चाय बनाने जा रही है । और एक ही घंटे के बाद जब उसकी माँ ने फोन किया तो फोन प्रशांत ने उठाया और कहा कि रोशनी की तबियत ठीक नहीं है । यह बात सुनते ही उसकी माँ रोशनी के घर पहुँची जहाँ रोशनी अचेत अवस्था में पड़ी थी और उसके पति के शरीर पर नाखुन के निशान थे । नाखुन के निशान इस बात का सबूत है कि दोनों में झगड़े हुए और रोशनी ने अपना बचाव किया है । रोशनी की माँ भी समझ नहीं पा रही थी कि इतनी देर ही में आखिर क्या बात हो गई ? यह बहुत ही उलझा देने वाला वाकया लगता है । ध्यान देने की बात यह भी है कि आखिर इतने देर में क्या ऐसी बात हो गई कि दोनों में विवाद हुए और बात यहाँ तक पहुँची ? इस बीच की कड़ी को ध्यान देकर अनुसंधान करने की आवश्यकता है ।

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आवश्यकता इस बात की भी है कि आखिर कबतक ऐसे ही चलता रहेगा । एक बेटी, एक माँ की हत्या कर दी जाए और सब बैठकर तमाशा देखे ? या फिर एक महिला सबकुछ से तंग आकर आत्महत्या कर ले और हम हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाएं कि जिसके घर में हुआ है वो ही जाने ।

जीवन बहुत अनमोल है इसे इस तरह से क्यों बरबाद करें जबकि लोग चाहे तो एक छत में रहकर नहीं अलग–अलग रहकर भी अच्छी जिंदगी जी सकते हैं । एक बात जरूर कहना चाहूँगी, इसे इस रूप में नहीं लिया जाए कि मैं तलाक या अलग हो जाने की बात को बढ़ावा दे रही हूँ । हाँ संबंध अगर ज्यादा अच्छे नहीं हैं । रिश्ते में तलखी आ गई हो, या रात दिन एक दूसरे से पीडि़त हैं । आपस में बिल्कुल ही नहीं बनती है तो ऐसे में एक तरीके से, कानूनी सहारा लेकर अलग हो जाएं । दोनों मानसिक परेशानी से बचेंगे । हालत ठीक हो जाएंगे इसके लिए प्रयास जरुर करना चाहिए लेकिन जब लगे कि अब कुछ भी सही होने वाला नहीं है तो अलग हो जाना बेहतर है । इस घटना को भी अगर देखें तो कारण स्पष्ट नही हो पाया है अभी तक । रोशनी हमारे बीच नहीं है और प्रशांत का भी बाकी जिंदगी अब कुछ अच्छा होने वाला नहीं है । मातापिता के लिए उसकी बेटी, बच्चों के लिए उसके माता पिता दोनों ही चले गए । आखिर कष्ट में तो आज सभी हैं तो बेहतर है कि अलग होकर सही तरीके से जिंदगी को जिए

रही बात संदेह की तो वो तो जबतक सही बात सामने न आ जाए संदेह बना ही रहेगा । क्योंकि रोशनी की मृत्यु प्राकृतिक नहीं लगती — गला दबाने के निशान, कपड़ों को जलाने की कोशिश और बयान बदलने जैसी बातें यह संकेत देती हैं कि मामला आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या की ओर इशारा करता है । लेकिन किसी की हत्या क्यों कर दी ? इसके तहत क पहुँचना बहुत जरुरी है ।
ये जो कुछ भी हुआ है बहुत ही दुखद घटना है । और ये पहली बार नहीं हुआ है कई बार ऐसी घटनाएं हुई है । इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी है । बार–बार इस तरह की घटनाएं न हो इसके लिए जरुरी है कि सच्चाई सभी के सामने आनी चाहिए । बिना किसी पक्षपात के अनुसंधान होना चाहिए । किस परिस्थिति में यह घटना हुई इस कारण के तह तक पुलिस को पहुँचना होगा । रोशनी को न्याय मिलनी ही चाहिए । दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए । यह सिर्फ एक रोशनी की बात नहीं है उस जैसी बहुतों के लिए यह बहुत जरुरी है न्याय मिलना ।
यह एक पारिवारिक घटना से बढ़कर सामाजिक प्रश्न बन चुका है, और इसका निष्पक्ष समाधान जरूरी है ।

कंचना झा
कार्यकारी संपादक
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