Wed. Sep 9th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

भागने से नहीं संवाद से होता है समाधान : कंचना झा

 

कंचना झा, हिमालिनी अंक अगस्त । देश जिस दौर से अभी गुजर रहा है उसमें सबसे अधिक आवश्यकता है जनता में घैर्य और संयम की । मकसद यह रहें कि किसी तरह का कोई दंगा फसाद नहीं हो । सामाजिक सद्भाव बना रहे । आज मधेश अशांत है, और सामाजिक संजाल पर लगातार यह अपील की जा रही है कि लोग सद्भाव को बनाए रखें, किसी तरह के आंदोलन में न जाएं , किसी तरह के हिंसात्मक आन्दोलन में भाग न लें ।

राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में भी प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की कोई बात सामाजिक संजाल में नहीं आए जिससे की दंगा भड़के । लेकिन सावन १० गते की शाम कप्तानगंज में हुई घटना ने हालात को अचानक से गंभीर बना दिया । वहाँ झड़प हुई और प्रहरी की गोली लगने से एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई । ऐसे में जनाक्रोश का उभरना स्वाभाविक था । ऐसी अवस्था में पुलिस को गोली नहीं चलानी थी । संयम बरतना चाहिए था । सद्भाव का ध्यान रखना था । सोचना चाहिए था कि गोली किसी को लगी तो वो वापस नहीं आ पाएगा और हुआ भी वही । दो युवाओं की जान चली गई और आंदोलन मधेश के गाँवगाँव तक फैल गया ।

आम जनता जब भी पीड़ा और असुरक्षा का अनुभव करती है, परेशान होती है तो वह सबसे पहले अपने नेतृत्व, अपने अभिभावक की ओर देखती है । जिस सरकार, जिस व्यक्ति को उम्मीदों से चुना है उससे आम नागरिक की यह अपेक्षा करती है कि इस दुख की घड़ी में अभिभावक उनके साथ खड़े रहे । काफी आलोचनाओं, और मिन्नतों, दुहाई के बाद आखिरकार गुरुवार सावन १४ गते प्रधानमंत्री बालेन्द्र साहबालेनने अपना संबोधन दिया । यदि यही संबोधन पहले हो जाता तो हो सकता था कि गणेश यादव की मृत्यु टल जाती । लेकिन उनके सही समय पर सही निर्णय नहीं लेने के कारण एक और बच्चे की जान चली गई ।

हालांकि प्रधानमंत्री के संबोधन में कोई नई बात नहीं थी, फिर भी उसका प्रभाव महत्वपूर्ण रहा । इसने जनता के मन में कुछ हद तक स्थिरता और भरोसा पैदा किया । उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार जनता के प्रति सजग है और आगे किसी भी प्रकार की जनधन की हानि नहीं चाहती । राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने जनता से अपील की कि सभी संयमता को अपनाए और आपसी एकता भाईचारा को कायम रखें । उन्होंने कहाहम सभी जिम्मेदार नागरिकों की भूमिका निर्वाह करते इस सुंदर और शांत नेपाली आकाश में जो यह अशांति के बादल अभी मंडरा रहे हैं उस अशांति के बादल को हमें मिलजुल कर हटाना होगा ।उनके संबोधन के बाद बहुतों ने उनकी आलोचना की तो बहुतों ने इसे सराहा भी । उनके संबोधन का सकारात्मक असर भी दिखासंबोधन के बाद घटनाएं पूरी तरह नहीं थमीं, लेकिन बड़े स्तर की हिंसा नहीं हुई ।

अब जब प्रधानमंत्री ने शांति की अपील की है, तो जनता का भी कर्तव्य बनता है कि वह इसका पालन करे । उनकी बातों का अनुसरण करें । वो जल्दी जनता की बात को नहीं सुनते हैं, संबोधन नहीं करना चाहते हैं लेकिन आज अगर जनता उनकी बातों का अनुसरण करती है तो उनमें भी अपनी जनता के प्रति कर्तव्य का बोध होगा । उन्हें इस बात का आभास होना आवश्यक है कि जनता उनके शब्दों को गंभीरता से लेती है । उनका हर वक्तव्य, हर निर्णय जनता पर प्रभाव डालता है । इसलिए केवल सामाजिक संजाल पर सक्रिय रहना पर्याप्त नहीं है; जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनना और समाधान करना भी उतना ही जरूरी है ।

यह भी पढें   बाढ़ प्रभावित समुदायों की मदद के लिए यूनिलीवर नेपाल ने दिए 5 करोड़ रुपये

हो सकता है उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं हो कि जनता के प्रति, राष्ट्र के प्रति उनका संबोधन कितना जरूरी है ? नेताओं से मिलना , अपनी जनता की समस्याओं को सुनना कितना जरूरी है ? प्रधानमंत्री बालेन से आम जनता यही चाहती है कि वो खुलकर लोगों से मिलें , उनकी बातों को सुने । जनता अपने अभिभावक, अपने प्रधानमंत्री को तलाशती है ।

अपने संबोधन के दूसरे दिन सावन १५ गते प्रधानमंत्री ने मधेश के नेताओं से मिलकर बातें की , गृह मंत्रालय हरकत में आया, रास्वपा सभापति रवि लामिछाने ने अनेक बैठकें की । प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति से मुलाकात की । प्रधानमंत्री को सोचनी होगी कि वो प्रधानमंत्री की कुर्सी पर है । कुर्सी से बाहर आपका मौन भी चलेगा लेकिन कुर्सी पर बैठकर आप मौन नहीं रह सकते । आपको जुड़ना होगा जनता से । बालेन अब बौआ बालेन नहीं हैं, उम्र से कम लेकिन जिम्मेदारी देश के अभिभावक की है । वो किसी एक भाषा भाषी, किसी एक समुदाय, किसी एक धर्म के प्रधानमंत्री नहीं हैं वो देश के प्रधानमंत्री हैं और हरेक तबके के प्रधानमंत्री हैं । हर तबके के बारे में उन्हें जानना और समझना होगा । इसके लिए संसद में प्रधानमंत्री बालेन का बैठना, प्रतिदिन सासंदों के प्रश्नों को सुनना, बहस को सुनना होगा । तब वो देश और जनता से जुड़ सकेंगे । बहुत उम्मीदों से उन्हें चुनकर लाया गया है । आपने जनता के बीच भाषण दिया और कहा था किअब युवाओं को विदेश नहीं जाना होगा, आप रोजगार की सृजना करेंगे लेकिन न जाने किन कार्यो में आप उलझे हैं जहाँ से आपको अपनी जनता की पीड़ा और उनका कष्ट दिखाई नहीं दे रहा है ।

सच तो यह है कि अभी प्रधानमंत्री के विरोधी भी नहीं चाहते हैं कि वो सत्ता से हटें , क्योंकि देश को स्थायित्व की आवश्यकता है । स्थाई सरकार की आवश्यकता है । और यह तभी संभव है जब वो संसद में प्रतिदिन पहुँच पाएंगे । देश के विभिन्न भागों की समस्याओं को सुन सकेंगे ।

अभी सुनसरी के देवानगंजकप्तानगंज क्षेत्र में हुई हिंसात्मक घटना ने मधेश को एक गंभीर मोड़ पर ला खड़ा किया है । मधेश को अति संवेदनशील बना दिया है । ऐसे समय में प्रधानमंत्री की ओर जनता देख रही है । जनता को गृहमंत्री या सभापति रवि लामिछाने की सहानुभूति नहीं चाहिए उसे बालेन सरकार चाहिए । बालेन जिसने प्रधानमंत्री बनने से पहले अनेकानेक वायदे किए थे मधेश को लेकर । मधेश के प्रति उन्हें अपने आप में नम्रता लानी ही होगी । जिस मधेश को उन्होंने अपने जीत का आधार बनाया था उसके प्रति सहानुभूति तो लानी होगी । मधेश की जनता पहले भी छलती आई है और आज आपके शासन में भी वहीं होगा तो फिर क्या अंतर या फिर क्या बदलाव आपके आने से ?इस घटना ने एकबार फिर लोगों में आक्रोश भर दिया है ।

यह भी पढें   24 भदौ को प्रचंड ने बताया लोकतांत्रिक इतिहास का ‘काला दिन’, जेनजी आंदोलन की हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग

सांप्रदायिक दंगे में तीन लोगों की मृत्यु हो जाना बहुत बड़ी बात है । किसी के परिवार में बच्चे का चले जाना, उसे गोली लग जाना, उसकी मृत्यु हो जाना ये सरल बात नहीं है । कप्तानगंज में दो युवाओं ओमप्रकाश मेहता तथा जय प्रकाश मेहता की मृत्यु हुई और जब यह फैलकर सिरहा, लहान तक पहुँची तो सिरहा में भी १९ वर्षीय गणेश यादव की गोली लगकर मृत्यु हुई । एक और बच्चा घायल है जिसका इलाज चल रहा है । और न जाने कितने घायल है उसका सही आंकड़ा अभी नहीं आया है । प्रधानमंत्री बालेन को अपनी जनता से मिलने के लिए पहुँचना होगा । उन परिवारों की असहनीय पीड़ाएं हैं उन्हें सुनना होगा । ऐसे समय में प्रधानमंत्री का स्वयं घटनास्थल पर जाना, पीडि़त परिवारों से मिलना और उन्हें सांत्वना देना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक नैतिक दायित्व है ।

प्रधानमंत्री बालेन को अब समझ जाना चाहिए कि उनका पार्टी की हरेक बैठक में, प्रतिनिधि सभा की बैठक में शामिल होना अति आवश्यक है । इसी दंगे के बीच जब रास्वपा सभापति रवि लामिछाने के सर्वदलीय बैठक बुलाई, देश विषम परिस्थिति से गुजर रहा है, देश में दंगे हो रहे है., पुलिस द्वारा गोली चलाई जा रही है । इतने संवेदनशील बैठक में प्रधानमंत्री का शामिल नहीं होना जनता को निराश और हताश करती है । आप कितनी भी जरुरी काम में क्यों न व्यस्त हों, अब आपकी पहली जिम्मेदारी आपके देश की जनता के प्रति है । इसमें आपको आगे आना ही होगा । नहीं तो जनता में आपके प्रति आक्रोश भर जाएगा । जनता आपको भी संदेह की नजरों से देखने लगेगी । आपकी जवाबदेही पर भी प्रश्न उठने लगेंगे ।

प्रधानमंत्री बालेन को लेकर सामाजिक संजाल के साथ ही जनता भी लिख रहे हैं कि आप न केवल घटनास्थल और संसद ही नहीं गए, वरन सत्तारूढ़ दल के अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई बैठक में भी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री नजर नहीं आए । इसके बाद विपक्षी दल प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं । उनकी मांग की औचित्य पर सवाल उठ सकता है, लेकिन संसद में उठे प्रश्नों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है । और यहाँ सरकार का मतलब आप हैं कोई दूसरा नहीं । ये जो बार बार आपके बारे में आपके पार्टी के लोग बोलते हैं कि वो काम में व्यस्त हैं इसलिए नहीं आए तो बचे ऐसे लोगों से वो आपके बालपन का फायदा उठा रहे हैं ।

जनता खुलकर लिख रही है कि नई सरकार यानी आपसे बहुत उम्मीदें हैं आम नागरिकों को लेकिन जब आप संसद आएंगे ही नहीं, प्रतिनिधियों की बातें सुनेंगे ही नहीं तो देश की अवस्था, परिस्थिति, को कैसे जान पाएंगे ? आपका जो दायित्व है उसे कैसे पूरा कर सकेंगे ?

यह भी पढें   जलवायु अन्याय का शिकार नेपाल: धुआं किसी और का, सांसें हमारी ! : कृतिका यादव

अपने संबोधन में आपने कहा है कि इन घटनाओं की गहराई से और निष्पक्ष जांच आवश्यक है । यह समझना जरूरी है कि इस प्रकार की हिंसा अचानक नहीं भड़कती; इसके पीछे कोई न कोई पृष्ठभूमि और कारण अवश्य होते हैं । यदि समय रहते उन कारणों को नहीं समझा गया, तो भविष्य में भी ऐसे संकट उत्पन्न होते रहेंगे ।

जिन जगहों पर बार बार इस तरह की घटनाएं होती हैं वहाँ विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है । खासकर यह बोर्डर एरिया है जहाँ समयसमय पर हिंसात्मक दंगे होते रहते हैं । कुछ बातों पर विचार करना बहुत आवश्यक है जैसे कुछ आंकड़े जो दिखाते हैं कि २०११ तक इस देश में मुस्लिमों की जनसंख्या ४ प्रतिशत थी । अभी की अगर बात की जाए तो यह बढ़कर अब ५ प्रतिशत हो गई है । इनमें बहुत से शरणार्थी हैं जो बंग्लादेश, म्यानमार तथा अन्य जगहों से आए और यहाँ आकर बस गए । हलांकि जब कोई बस जाता है तो उसे सुविधा चाहिए होती है ,क्योंकि वे भी अपने आपको इसी देश का नागरिक मानने लगते हैं । उनकी भी मांग होने लगती है । सरकार उनकी मांगों को संबोधन भी करती आई है । यह भी सच है कि सीमावर्ती जिलों से भटकल तथा टुंडा जैसे अपराधी दर्जनों कुख्यात आतंकवादियों की भी गिरफ्तारी हुई है । यहाँ निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए ।

इसके साथ ही आम नागरिको के बीच आज भी बहुत से सवाल हैं जिनमें एक सवाल हमेशा उनके जेहन में रहता है कि ८१ प्रतिशत हिन्दूओं के रहते यह देश अचानक से कैसे धर्मनिरपेक्ष बन गया ? इसपर भी बहस और विमर्श की आवश्यकता है ।

प्रधानमंत्री बालेन सामाजिक संजाल पर बहुत ज्यादा एक्टिव हैं तो आप जरूर देखते होंगे कि आम आदमी आपको लेकर किस तरह की बातें करते हैं । लोकतंत्र में प्रधानमंत्री की जवाबदेही केवल सामाजिक संजाल तक निहित नहीं है । कुछ विषयों को लेकर केवल पोस्ट करने से नहीं होता , विषय की गंभीरता को समझना होता है, आपका आपकी जनता से रूबरू होना जरुरी होता है । देश जब भी संकट में फंसेगा आपकी चुप्पी को सहन नहीं किया जाएगा , या यह कहकर आपको माफ नहीं किया जाएगा कि प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत शैली ही यही है । यह न केवल आपके लिए वरन यह जनता और संसदीय व्यवस्था के प्रति सम्मान का भी प्रश्न है ।

देश के भीतर बहुत निराशा है । लोग सिर्फ एक पत्थर के इंतजार में रहते हैं कि कब कोई पत्थर उठे और उन्हें कुछ काम मिल जाए । कुछ बाहरी शक्ति भी इसी ताक में लगे रहते हैं कि अवसर मिले और अपना सिक्का चला सकें । ऐसी हर परिस्थिति से आपको सामना करना होगा देश को एक नए सिरे से समझने की आवश्यकता है । देश के संवेदनशील अवस्था में प्रधानमंत्री का यह दायित्व है कि जनभावनाओं के प्रति अपना विश्वास बढ़ाएं, उन्हेंअनदेखानकरें।संसद की मंच से दूर रहने के बजाय वहीं से खड़े होकर अपनी जनता का विश्वास जीतने का आपको प्रयास करना चाहिए।

कंचना झा
कार्यकारी संपादक, हिमालिनी ऑनलाइन । www.himalini.com
www.himalini.com

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com