देउवा संकट में तो ओली बेचैन क्यों ?
नेपाली कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई पर केपी ओली की असाधारण प्रतिक्रिया
काठमांडू | माघ 4, 2082 । नेपाली कांग्रेस के सभापति पद को लेकर चुनाव आयोग के फैसले ने जहां शेरबहादुर देउवा को राजनीतिक रूप से कमजोर किया है, वहीं इस फैसले से सबसे ज्यादा बेचैनी और आक्रोश नेकपा (एमाले) अध्यक्ष व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली में देखने को मिल रहा है।

शनिवार को हुई नेकपा (एमाले) की सचिवालय बैठक में ओली ने कांग्रेस की नई नेतृत्व संरचना पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “कांग्रेस पर लुसिफरों ने कब्जा कर लिया है।” यह बयान अपने आप में इस बात का संकेत है कि कांग्रेस के आंतरिक संकट को ओली केवल विपक्षी दल का मामला नहीं मान रहे, बल्कि इसे राष्ट्रीय राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं।

ओली का आरोप: लोकतंत्र पर हमला
उपमहासचिव लेखराज भट्ट के अनुसार, ओली ने चुनाव आयोग के उस फैसले पर गहरी असहमति जताई जिसमें विशेष महाधिवेशन के जरिए गगन थापा को कांग्रेस सभापति मान्यता दी गई। ओली का कहना था कि बिना संविधान, कानून और आयोग के ऐन की गहन समीक्षा किए तथा देउवा पक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिए बिना लिया गया यह फैसला लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
ओली ने यहां तक कहा कि कांग्रेस की आधिकारिकता पर कानूनी फैसला न होने तक चुनाव प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने देउवा पक्ष को न्यायिक संघर्ष में जाने की खुली सलाह दी और कहा कि “हमें अदालत तक जाना चाहिए।”
‘विदेशी हस्तक्षेप’ और ‘साजिश’ का दावा
बैठक के दौरान ओली ने गगन थापा को सभापति बनाने में योजनाबद्ध साजिश और विदेशी हस्तक्षेप तक का आरोप लगाया। उनके अनुसार, भीड़ और सड़क के दबाव के आधार पर किसी पार्टी की वैधानिकता तय करना खतरनाक परंपरा है।
ओली इससे पहले भी सार्वजनिक मंचों से यह कहते रहे हैं कि बहुमत के नाम पर सड़क से पार्टी की वैधानिकता नहीं छीनी जा सकती।
देउवा के प्रति ओली की सहानुभूति क्यों?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ओली की यह चिंता केवल लोकतंत्र की रक्षा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे शेरबहादुर देउवा के साथ उनका व्यक्तिगत और राजनीतिक रिश्ता भी बड़ा कारण है।
2081 असार में देउवा के समर्थन से ही ओली प्रधानमंत्री बने थे। यहां तक कि जेन-जी आंदोलन के दौरान 19 छात्रों की मौत और सैकड़ों के घायल होने के बाद भी देउवा ने ओली से समर्थन वापस नहीं लिया था, जबकि गगन थापा जैसे नेताओं ने ऐसा करने का दबाव बनाया था।
कांग्रेस के भीतर बदलता समीकरण
चुनाव आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता गगन थापा को सभापति मान चुके हैं। सुजाता कोइराला, शेखर कोइराला खेमे के नेता और देउवा के पुराने समर्थक भी धीरे-धीरे गगन नेतृत्व के पक्ष में खुलते जा रहे हैं। ऐसे में ओली का देउवा के पक्ष में खुलकर खड़ा होना राजनीतिक रूप से असामान्य लेकिन अर्थपूर्ण माना जा रहा है।
निष्कर्ष
देउवा संकट में हैं, लेकिन उनकी पीड़ा से ज्यादा व्याकुलता ओली में दिखाई दे रही है। कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई अब केवल पार्टी तक सीमित नहीं रही; यह सत्ता, गठबंधन और भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति से गहराई से जुड़ चुकी है।
गगन थापा का उदय केवल कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि पुराने सत्ता समीकरणों के टूटने का संकेत भी है—और शायद यही बात ओली को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है।


