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भारत के  गणतंत्र दिवस का चिरस्थायी महत्त्व  और उपयोगिता : विनोदकुमार विमल

 

 गणतंत्र दिवस की जड़ें केवल 1950 में नहीं, बल्कि उस लंबे स्वतंत्रता संग्राम में हैं, जो बलिदानों से सींचा गया । मंगल पांडे की चिंगारी, रानी लक्ष्मीबाई का साहस, भगत सिंह का बलिदान, चंद्रशेखर आज़ाद का स्वाभिमान और महात्मा गांधी का सत्य व अहिंसा का मार्ग—इन सभी ने भारत को केवल आज़ाद ही नहीं किया, बल्कि एक नैतिक राष्ट्र के रूप में खड़ा किया ।

विनोदकुमार विमल, काठमांडू, 26 जनवरी । भारत दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है, जो 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना । यह एक संसदीय प्रणाली का पालन करता है, जहाँ वयस्क मताधिकार  के माध्यम से सरकार चुनी जाती है । भारतीय लोकतंत्र स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और सामाजिक न्याय के मूल्यों पर आधारित है ।  भारत का  संविधान  दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसे तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा । इसके बाद 26 नवंबर 1949 को यह बनकर तैयार हुआ । मूल रूप से इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं, जो अब बढ़कर 448 अनुच्छेद, 25 भाग और 12 अनुसूचियां हो गई हैं । संविधान की शुरुआत एक प्रस्तावना से होती है, जो इसके आदर्शों, उद्देश्यों और बुनियादी सिद्धांतों (संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र) को रेखांकित करती है । भारतीय राज्य का अपना कोई धर्म नहीं है और यह सभी धर्मों को समान सम्मान प्रदान करता है । यह संविधान अपनी लचीली प्रकृति और भारतीय विविधता के अनुसार ढलने की क्षमता के कारण एक जीवंत दस्तावेज माना जाता है,  जो भारत की जटिल विविधता और विकसित होते सामाजिक – राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाता है । आलोचनाओं के बावजूद संविधान के उधार तत्त्वों को भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप सावधानीपूर्वक संशोधित किया गया, जिससे भारत  के लोकतांत्रिक सिद्धांतों और संस्थानों को आकार देने में इसकी प्रासंगिकता एवं स्थायी महत्त्व सुनिश्चित हुआ ।

ऐसे में अक्सर एक दिलचस्प सवाल लोगों के मन में उठता है कि जब भारत का  संविधान 26 नवंबर को बनकर तैयार हो गया था, तो इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी का इंतजार क्यों किया गया ?  इस कहानी की शुरुआत संविधान बनने से 20 साल पहले  यानी 1929 में होती है । उस समय लाहौर में इंडियन नेशनल कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था, जिसकी अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू कर रहे थे । इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार अंग्रेजों से डोमिनियन स्टेटस यानी अर्ध-स्वतंत्रता की मांग छोड़कर ‘पूर्ण स्वराज’ का संकल्प लिया था । जब 1947 में भारत असल में आजाद हुआ, तो वह तारीख 15 अगस्त थी । इसलिए इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है । लेकिन संविधान निर्माताओं, खासकर पंडित  जवाहरलाल नेहरू और डॉ. भीमराव  अंबेडकर के मन में उस 26 जनवरी की तारीख के प्रति गहरा सम्मान था, जिसने दो दशकों तक भारतीयों में आजादी की अलख जगाए रखी थी । वे नहीं चाहते थे कि 26 जनवरी जैसी ऐतिहासिक तिथि इतिहास के पन्नों में कहीं खो जाए । इसलिए  यह तय किया गया कि भले ही संविधान 26 नवंबर 1949  को तैयार हो गया है, लेकिन इसे आधिकारिक रूप से 26 जनवरी 1950 को लागू किया जाएगा, ताकि इस दिन को ‘गणतंत्र दिवस’ के रूप में हमेशा के लिए अमर कर दिया जाए ।

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26 जनवरी वह दिन है जब भारत ने खुद को पूर्ण रूप से स्वशासित राष्ट्र घोषित किया । 15 अगस्त 1947 को  भारत आजाद जरूर हुआ, लेकिन तब तक भारत के पास अपना संविधान नहीं था । असली आज़ादी तब पूरी हुई जब भारत  अपने बनाए कानूनों से चलने लगा । यही वजह है कि 26 जनवरी 1950 को भारत ने संविधान को अपनाकर खुद को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया । गणतंत्र दिवस भारतीयों को  यह याद दिलाता है कि सत्ता किसी व्यक्ति, राजा या सरकार की नहीं, बल्कि संविधान और जनता की होती है । यह दिन अधिकारों का उत्सव है, लेकिन उतना ही कर्तव्यों की भी याद दिलाता है । 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी । इसी ऐतिहासिक महत्त्व  को सम्मान देने के लिए संविधान लागू करने की तारीख भी 26 जनवरी चुनी गई । करीब 2 साल 11 महीने और 18 दिन की मेहनत के बाद संविधान तैयार हुआ, जिसे डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने आकार दिया ।

गणतंत्र दिवस का भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक महत्त्व  है । यह भारतीयों के स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय के लिए लंबे और कठिन संघर्ष की परिणति का प्रतीक है । 1857 के विद्रोह से लेकर असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन तक, पीढ़ियों से भारतीयों ने एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक भारत के सपने के लिए संघर्ष किया और बलिदान दिए । गणतंत्र दिवस की जड़ें केवल 1950 में नहीं, बल्कि उस लंबे स्वतंत्रता संग्राम में हैं, जो बलिदानों से सींचा गया । मंगल पांडे की चिंगारी, रानी लक्ष्मीबाई का साहस, भगत सिंह का बलिदान, चंद्रशेखर आज़ाद का स्वाभिमान और महात्मा गांधी का सत्य व अहिंसा का मार्ग—इन सभी ने भारत को केवल आज़ाद ही नहीं किया, बल्कि एक नैतिक राष्ट्र के रूप में खड़ा किया ।  गणतंत्र दिवस भारत की राष्ट्रीय यात्रा में एक महत्त्वपूर्ण  मील का पत्थर है । यह हर  वर्ष  26 जनवरी को मनाया जाने वाला एक ऐसा दिन है, जिसे हर भारतवासी पूरे उत्साह, जोश और सम्मान के साथ मनाता है । राष्ट्रीय पर्व होने के नाते इसे हर धर्म, संप्रदाय और जाति के लोग मनाते हैं ।

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गणतंत्र दिवस महज एक राष्ट्रीय अवकाश से कहीं अधिक है । यह प्रत्येक भारतीय के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण  है । यह उनकी एकता, उनकी विविधता और उनके लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव मनाने का दिन है । यह नागरिकों के रूप में उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जानने का दिन है । यह दिन उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने और भाईचारे के बंधन को मजबूत करने का दिन है ।  गणतंत्र दिवस का महत्त्व  बहुआयामी है । सर्वप्रथम, यह संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है l   यह भारत की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है । समारोहों के दौरान प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम और झांकियां भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करती हैं । गणतन्त्र दिवस  का एक और प्रमुख पहलू राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है, क्योंकि यह दिवस  विविधता में एकता को प्रोत्साहित करता है और भारत की विविधता में निहित शक्ति को उजागर करता है । गणतंत्र दिवस उन नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य और बलिदान को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता है,  जिन्होंने भारत को स्वतंत्र बनाने और गणतंत्र स्थापित करने में मदद की । यह राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, नागरिकों को अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने और देश के विकास व संस्कृति को प्रदर्शित करने का एक अत्यंत  महत्त्वपूर्ण अवसर है । यह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करता है । यह दिन युवाओं को इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है । गणतंत्र दिवस आत्मचिंतन, राष्ट्र के प्रति समर्पण और एक बेहतर  प्रगतिशील भारत के निर्माण का संकल्प लेने का दिन है । यह नागरिकों को अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए  देश की प्रगति में योगदान देने और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों (जैसे- राष्ट्र की एकता, शिक्षा, पर्यावरण) की याद दिलाता है ।

गणतंत्र शब्द शासन के उस स्वरूप को संदर्भित करता है जिसमें राष्ट्राध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से होता है, और राजनीतिक सत्ता किसी राजा, रानी या वंशानुगत शासक के हाथों में नहीं होती । गणतंत्र में सत्ता जनता से प्राप्त होती है  और शासन स्थापित कानूनों के अनुसार चलता है  न कि व्यक्तिगत शासन के आधार पर । यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि नेतृत्व विरासत के बजाय प्रतिनिधित्व और जवाबदेही पर आधारित हो ।

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भारत के संदर्भ में, गणतंत्र बनने का अर्थ था औपनिवेशिक नियंत्रण और प्रतीकात्मक राजतंत्र से पूर्णतः मुक्त होकर लिखित संविधान के अधीन स्वशासन की स्थापना करना । जब भारत ने 1950 में अपना संविधान अपनाया, तो उसने एक ऐसी प्रणाली चुनी जहाँ जनता ही सत्ता का सर्वोच्च स्रोत है । नेता नागरिकों की ओर से शासन करते हैं और उनका अधिकार कानून द्वारा सीमित है । यह संरचना सुनिश्चित करती है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था संविधान से ऊपर नहीं है । गणतंत्र की एक प्रमुख विशेषता संविधान की सर्वोच्चता है । भारत में, संविधान सर्वोच्च कानूनी प्राधिकारी है, और सभी कानून, नीतियां और निर्णय इसके अनुरूप होने चाहिए । यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और सरकार की जिम्मेदारियों को परिभाषित करता है l राजतंत्र के विपरीत, जहाँ सत्ता एक ही शासक के हाथों में केंद्रित हो सकती है, गणतंत्र निर्वाचित संस्थाओं और स्पष्ट रूप से परिभाषित प्रक्रियाओं के माध्यम से सत्ता का वितरण करता है ।

भारत की गणतंत्रात्मक प्रणाली नेतृत्व के चुनाव और शासन में झलकती है । भारत के राष्ट्रपति का चुनाव होता है, वे वंशानुगत रूप से पद ग्रहण नहीं करते, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है । राष्ट्रपति संवैधानिक राष्ट्राध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं, जबकि निर्वाचित प्रतिनिधि दिन-प्रतिदिन के शासन का प्रबंधन करते हैं । यह व्यवस्था इस विचार को बल देती है कि शासन का उद्देश्य जनता की सेवा करना है । मूल रूप से, गणतंत्र भागीदारी, जवाबदेही और कानून के शासन पर आधारित होता है । गणतंत्र बनने का विकल्प चुनकर, भारत ने यह पुष्टि की कि नागरिक ही सत्ता की नींव हैं और स्वतंत्रता की रक्षा संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से की जाती है, न कि व्यक्तिगत शासन द्वारा ।

गणतंत्र दिवस समारोह पूरे भारत  में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है । इस दिन राष्ट्रपति राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं, जिसके बाद भव्य सैन्य और सांस्कृतिक जुलूस निकलते हैं । इसके अतिरिक्त, भारत के राष्ट्रपति देश के योग्य नागरिकों को पद्म पुरस्कार प्रदान करते हैं, और बहादुर सैनिकों को परमवीर चक्र, अशोक चक्र और वीर चक्र से सम्मानित किया जाता है । गणतंत्र दिवस परेड का सीधा प्रसारण भी हर साल लाखों लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाता है । अंत में, यह कहा जा सकता है कि भारत एक  लोकतन्त्र है, जहां हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है l भारत की ताकत उसकी एकता और लोकतंत्र में है ।

77 वें गणतंत्र दिवस की बहुत – बहुत शुभकामनाएं ! 

लेखकः विनोदकुमार विमल

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