Tue. Aug 25th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास द्वारा 77 वां गणतंत्र दिवस मनाया गया

 

हिमालिनी डेस्क, काठमांडू, 26 जनवरी, 2026 । नेपाल में रहने वाले भारतीय समुदाय और भारत के मित्रों की भागीदारी के साथ  जनवरी  26 में  काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास में भारत का 77 वां गणतंत्र दिवस मनाया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय उपराष्ट्रपति राम सहाय प्रसाद यादव थे ।

कार्यक्रम का उद्घाटन नेपाल में भारतीय   कार्यवाहक राजदूत डॉ. राकेश पांडे ने किया, जिन्होंने भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया । इसके बाद, 77 वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्र को दिए गए संबोधन का एक वीडियो प्रस्तुत किया गया । इस अवसर पर, कार्यवाहक राजदूत पांडे ने भारतीय सशस्त्र बलों के दिवंगत सैनिकों की पत्नियों और परिजनों को श्रद्धांजलि अर्पित की और 7 करोड 20 लाख  रुपये के एजीआईएफ (आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड) चेक सौंपे ।

इस कार्यक्रम में एक वीडियो प्रस्तुत किया गया, जिसमें पिछले एक वर्ष में भारत – नेपाल संबंधों में हुई महत्त्वपूर्ण  प्रगति को उजागर किया गया । इस अवसर पर दूतावास स्थित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के छात्रों और शिक्षकों के साथ – साथ नेपाली कलाकारों ने नृत्य और संगीत प्रस्तुतियां दीं । इसी प्रकार, भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम का बिहू नृत्य भी इस अवसर पर प्रस्तुत किया गया । बिहू नृत्य असम का सबसे लोकप्रिय और पारंपरिक लोकनृत्य है l यह नृत्य तेज ताल पर किया जाता है l बिहू नृत्य समूह में, विशेषकर सामुदायिक कार्यक्रमों और विभिन्न अवसरों में किया जाता है l

यह भी पढें   गोली और राज्य : अंशुकुमारी झा

भारत, जिसे 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त हुई, ने 26 जनवरी, 1950 को अपने संविधान को लागू करके एक लोकतांत्रिक, संप्रभु और गणतंत्रात्मक राष्ट्र घोषित किया । इसलिए, गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है । 26 जनवरी वह दिन है जब भारत ने खुद को पूर्ण रूप से स्वशासित राष्ट्र घोषित किया । 15 अगस्त 1947 को  भारत आजाद जरूर हुआ, लेकिन तब तक भारत के पास अपना संविधान नहीं था । असली आज़ादी तब पूरी हुई जब भारत  अपने बनाए कानूनों से चलने लगा । यही वजह है कि 26 जनवरी 1950 को भारत ने संविधान को अपनाकर खुद को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया ।

यह भी पढें   “आह नारी!” : सरोज दहिया

गणतंत्र दिवस का भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक महत्त्व  है । यह भारतीयों के स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय के लिए लंबे और कठिन संघर्ष की परिणति का प्रतीक है । 1857 के विद्रोह से लेकर असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन तक, पीढ़ियों से भारतीयों ने एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक भारत के सपने के लिए संघर्ष किया और बलिदान दिए । गणतंत्र दिवस की जड़ें केवल 1950 में नहीं, बल्कि उस लंबे स्वतंत्रता संग्राम में हैं, जो बलिदानों से सींचा गया । मंगल पांडे की चिंगारी, रानी लक्ष्मीबाई का साहस, भगत सिंह का बलिदान, चंद्रशेखर आज़ाद का स्वाभिमान और महात्मा गांधी का सत्य व अहिंसा का मार्ग—इन सभी ने भारत को केवल आज़ाद ही नहीं किया, बल्कि एक नैतिक राष्ट्र के रूप में खड़ा किया ।  गणतंत्र दिवस भारत की राष्ट्रीय यात्रा में एक महत्त्वपूर्ण  मील का पत्थर है । यह हर  वर्ष  26 जनवरी को मनाया जाने वाला एक ऐसा दिन है, जिसे हर भारतवासी पूरे उत्साह, जोश और सम्मान के साथ मनाता है । राष्ट्रीय पर्व होने के नाते इसे हर धर्म, संप्रदाय और जाति के लोग मनाते हैं ।

यह भी पढें   संसद में पहुँचने के बाद सांसदों को अपने प्रत्येक शब्द और प्रत्येक निर्णय के प्रति गंभीर रहना चाहिए – गगन थापा

इस कार्यक्रम में गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्यल, विभिन्न पार्टियों के शीर्ष नेता, राजनयिक निकायों के प्रतिनिधि, प्रोफेसर और विभिन्न संघों और संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com