Fri. Apr 24th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

शिव चर्चा कथा भिडियो सहित

 

रेखा केसरी:ऐसा कहना आसान है, लेकिन समझना कठिन है । जगत गुरु का आदि पर सुशोभित जन प्रियः देवाधिदेव आज स्वयं परिणामदायी गुरु का काम करते हैं । ऐसे तो घर–घर में भगवान शिव पूजित हैं । लेकिन जन सामान्य ने उनके गुरु स्वरूप का चिन्तन करने का प्रयास नहीं किया । जिन व्यक्तियों ने अन्धविश्वास में भी शिव को गुरु बनाया, उन लोगों ने परिणाम पाया । आप भी महागुरु शिव के शिष्य बनकर आध्यात्मिक कुंजी प्राप्त कर सकते हंै ।

शिव शिष्यता ग्रहण करने के तीन सूत्र–
प्रथम है, शिव आप मेरे गुरु हंै, मैं आप का शिष्य–शिष्या हूँ, मुझ पर दया कर दीजिए, इसे रात्रि सोते समय एवं जागते समय कम से कम पाँच बार मन ही मन बोलें । द्वितीय, शिव के गुरु स्वरूप की चर्चा सुने तथा अपने खाली एवं बेकार समय में शिव गुरु की चर्चा करे । तृतीय, नम शिवाय जाप १०८ एक सौ आठ बार सुविधा अनुसार आवश्यक है ।
कलाई के बारह (१२) दाने रुद्राक्ष का कंगन— यह आवश्यक नहीं है लेकिन नए शिव शिष्यों के शिव गांव में सहायक होने के साथ स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से लाभदायक है । भजन– कोई शर्त नही, चिकित्सकीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखा जाना चाहिए । किस व्यक्ति को शिव शिष्य बनना– शिव को गुरु मानने की इच्छा करने वाले के नाम की घोषित उपलब्ध एक दो तीन या पाँच शिव शिष्य मिलकर इन शब्दों से करना है ! पुत्र, श्री … शिव को गुरु माना है, शिव के अन्तरिक्ष साम्राज्य में यह सूचना दर्ज है ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed