Fri. Jul 10th, 2020

संविधान मे प्रत्यक्ष कार्यकारी प्रमुख की व्यवस्था दिवा स्वपन

विनय कुमार
विनय कुमार

विनय कुमार । २७ जुलाई, काठमाडौं ।
नेपाल में वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष मे प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी विषयों को लेकर एक लम्बा बहस चल रहा है ।
नेपाली जनता ने मसौदा पर दिए सुझाव को लेकर प्रमुख चारों दल में सरगर्मी पैदा हो गया है । संविधान मे प्रत्यक्ष कार्यकारी दर्ज होगा की नहीं इसबात पर सभी लोगों का ध्यान केन्द्रीत है । लेकिन क्या चार दल ने इस सुझाव को संविधान मे सम्बोधन करेगा इस पर काफी आशंका है । नेकपा एमाले पार्टी जिस ने अपनी चुनावी घोषणापत्र में ही प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी लिख कर जनता के पास भोट वटोरने गया और पाया भी । एकीकृत नेकपा माओबादी प्रत्यक्ष कार्यकारी पर तो सुरुवात से ही अपनी अडान रखी हुई पार्टी है । लेकिन जब संविधान निर्माण बनने जा रहा है तब एमाले और माओबादी पार्टी इस मुद्दा से पिछे भाग रहा है । एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली की बोली से यह स्पष्ट जाहेर हो रहा है कि बनने बाली संविधान मे प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी नही होगा । ओली ने कहा है, प्रत्यक्ष निर्वाचित प्रधानमन्त्री होने का पार्टी की निर्णय और घोषणापत्र होते हुए भी इस विषय पर ‘पोजिसन’ लेकर संविधान को रोका नहीं जा सकता ।
कल्ह की बैठक मे केन्द्रीय सदस्य हिक्मत कार्की ने नेपाल जैसी देश मे प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी प्रमुख रखने पर निरंकुशता जन्म ले सकता है इसलिए संसदीय व्यवस्था को ही सुधार करने पर अपनी मत रखा था । लेकिन ओली और माधव निकट के नेतागण चार दलों के बिच हुए सहमति से ब्याक नहीं होनेपर एकजुट है । प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी के पक्ष मे अडान लेने से प्रदेश के सिमांकन और धार्मिक स्वतन्त्रता के विषय पर भी आवाज उठने पर ओली इस झन्झट मे नहीं परना चाहता है । संविधान मे जनता के मत को सम्बोधन हो ना हो इस से मतलव नहीं है । जैसे भी संविधान जारी कर के ओली प्रधानमन्त्री के रुप में अपने आप को दिखना चाहता है । अपनी पदीय लोभ को पुरा करना चाहता है कमरेड ओली ।
इसितरह भारत भ्रमण के बाद एकीकृत माओबादी के सुप्रिमो अध्यक्ष प्रचण्ड के मनस्थिती भी बदल चुका है । प्रत्यक्ष कार्यकारी की मन्त्र जपने वाले माओबादी भी अपनी अडान से पिछे हट्ने लगा है । प्रचण्ड नें निर्वाचित कार्यकारी और प्रदेश के सिमांकन के विषयों को लेकर संविधान को रोका नहीं जाएगा कहा है । इस धारणा से भी स्पष्ट होता है माओबादी का कूनीति । माओबादी के उपाध्यक्ष डा. बाबुराम भट्टराई प्रत्यक्ष कार्यकारी पर चाहे जितना भी बहस क्यों ना करे । संविधान मे क्या खाक सम्बोधन होगा ? इस विषय पर उद्योगी, व्यवसायी, कलाकारों का भि चौतर्फी मत जाहेर है । लेकिन चारों दल की मुढ किसी का बात सुनना नहीं, बिना अधिकारों की संविधान जारी करने पर केन्द्रीत है । अन्ततः संविधान मे प्रत्यक्ष कार्यकारी, हिन्दु राष्ट्र, सिमांकन÷नामाकंन विषय सुनिश्चित होने पर आश ना रखे । संविधान मे अपनी अधिकार दिखना दिवास्वपन है । इस की भ्रम मे ना परे ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: