अगर मधेश में आन्दोलन होता है तो मधेश के साथ हैं : बाबुराम भटराई का मधेश मोह

श्वेता दीप्ति ,काठमांडू ,२७ जुलाई |
संवैधानिक राजनीतिक सम्वाद तथा सहमति समिति के अध्यक्ष माननीय बाबुराम भटराई जी ने आज सिंहदरबार के राज्य व्यवस्थापन समिति के हाल में अनौपचारिक बैठक की आयोजना की थी । जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के मधेशी नेताओं, कानून व्यवसायी, समाज सेवी, बुद्धिजीवी और पत्रकारों की सहभागिता थी । अमरेश कुमार सिंह, अनिल झा, रंजु ठाकुर, विजय कर्ण, प्रभु शाह, सुरेन्द्र महतो, तुलानारायण साह, दीपेन्द्र झा, श्वेता दीप्ति आदि कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति थी । बैठक का मुद्दा कोई नया नहीं था । वही संघीयता की बातें, नागरिकता की बातें, सुझाव संकलन के दौरान हुए प्रहरी दमन की बातें । चार दलों के बीच हुए समझौते के बाद से और संविधान के मसौदे के आने के बाद से हर ओर यही बातें और चर्चा हो रही हैं । अगर सचमुच सत्ता चाहती कि मधेश के मुद्दे को सुलझाना है, या उसे लेकर चलना है तो समाधान उनके बीच से ही निकल कर आता, इन बैठकों की आवश्यकता ही नहीं होती । जो बातें बैठक में उभर कर आईं, उन बातों से माननीय भटराई जी अनभिज्ञ होंगे यह तो हो ही नहीं सकता । फिर भी संवाद और जुड़ने की
प्रक्रिया की औपचारिकता का निर्वाह किया जा रहा है । प्रचण्ड जी भारत भ्रमण के बाद एक बार पुनः मधेशी दलों के नेताओं के साथ संवाद कर रहे हैं, और आज की बैठक भी कमोवेश उसी प्रक्रिया की पुष्टि करता हुआ नजर आया । फिर भी उम्मीद और भरोसे पर दुनिया टिकी हुई है । काँग्रेस सांसद अमरेश जी ने पुनः वही बातें दोहराई जो वो पिछले दिनों से कहते आ रहे हैं कि अब मधेश प्रदेश की नहीं देश की बातें करेगा, अगर यह संविधान लागु हुआ तो देश बँटेगा, किन्तु आश्चर्य तो यह है कि स्वयं सत्ता की गलियारों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं । एमाले के नेताओं ने कहा कि सही माँगें मानी जाएँगी । समझ में नहीं आया कि उनकी नजरों में सही माँगें क्या हैं ? मधेश दमन के सन्दर्भ में जब यह बातें उठीं कि महिलाओं के साथ सप्तरी में दुव्र्यवहार हुआ है, प्रहरी दमन हुआ है तो एक सिरे से इस आरोप को भी खारिज कर दिया गया , तात्पर्य यह कि कहीं कुछ गलत नहीं हुआ । मधेश की माँग ही शायद सत्ता पक्ष की
निगाह में गलत है । खैर…। अंगीकृत नागरिकता और उनकी संतति पर और भारत मधेश के बीच के वैवाहिक रिश्तों को कमजोर करने की समस्याओं पर भी ध्यानाकर्षण कराया गया ।
निष्कर्षतः यह अच्छी बात सामने आई कि माननीय भट्राई जी ने आश्वासन दिया कि आने वाला संविधान संघीयता और सीमांकन के साथ आएगा, अंगीकृत नागरिक के बच्चों को वंशज के आधार पर नागरिकता मिलनी चाहिए । मसौदे में यथासम्भव सुधार किया जाएगा, उसकी भाषा पर ध्यान दिया जाएगा और स्पष्ट और सुलझी भाषा के साथ संविधान सामने आए इस बात की पूरी तरह से कोशिश की जा रही है और उम्मीद है कि समस्या का समाधान होगा । । साथ ही उन्होंने कहा कि समझौता तो करना होगा किन्तु आत्मसम्मान के साथ । पार्टी के द्वारा विगत में हुई गलतियों की भी उन्होंने चर्चा की और यह माना कि उसकी वजह से आन्दोलन का असर कम हुआ और लोगों का विश्वास कम होता चला गया । उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विखण्डन की बातें ना करें उससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है । परन्तु मधेश पर हुए दमन की उन्होंने कोई चर्चा नहीं की । एक आश्वासन उन्होंने दिया कि अगर मधेश में आन्दोलन होता है तो वो मधेश के साथ हैं । उन्होंने माना कि देश की आधी से अधिक आबादी मधेश से है फिर भी वो शोषित हैं । इस हालात को बदलना है । मधेशी खुद को मधेशी नहीं नेपाली समझें । बैठक की बातों को सम्बन्धित निकाय तक अवश्य पहुँचाया जाएगा यह विश्वास उन्होंने दिलाया । एक अनौपचारिक बैठक औपचारिक बहस के साथ समाप्त हुई ।




