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प्रमुख दलों के घोषणापत्र में विदेश नीति: स्वाधीनता, संतुलन और सुधार का वादा

काठमांडू,२१ फरवरी २०२६ । आगामी चुनाव{ को ध्यान में रखते हुए देश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने घोषणापत्र में राष्ट्रीय हित, संप्रभुता और संतुलित कूटनीति को केंद्रीय मुद्दा बनाया है। लगभग सभी दलों ने “राष्ट्रहित सर्वोपरि” का संकल्प दोहराया है, लेकिन परराष्ट्र मंत्रालय के संस्थागत सुधार, पेशेवर कूटनीति और राजदूत नियुक्ति में राजनीतिक भागबंटा खत्म करने जैसे संवेदनशील विषयों पर स्पष्ट प्रतिबद्धता सीमित ही दिखाई देती है।

चुनावी मैदान में उतरे प्रमुख दल— , , , , और —सभी ने विदेश नीति को राष्ट्रीय स्वाभिमान और संतुलित संबंधों के आधार पर आगे बढ़ाने की बात कही है।

कांग्रेस: संतुलित संबंध और ‘क्रिकेट कूटनीति’

नेपाली कांग्रेस ने सार्वभौमिक समानता के सिद्धांत पर आधारित संतुलित विदेश नीति अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है। पार्टी का कहना है कि नेपाल को विश्व मंच पर एक आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।

कांग्रेस ने पड़ोसी और मित्र देशों के साथ संबंधों को पारस्परिक सम्मान और आर्थिक साझेदारी पर आधारित रखने का संकल्प लिया है। साथ ही, उसने स्पष्ट किया है कि नेपाल किसी भी प्रकार की सैन्य या सामरिक प्रतिस्पर्धा में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल नहीं होगा।

घोषणापत्र की विशेष बात है—खेल कूटनीति। कांग्रेस ‘क्रिकेट कूटनीति’ के माध्यम से नेपाल की अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत करने और देश को क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का तटस्थ आयोजन स्थल बनाने की योजना रखती है।

इसके अलावा, विदेश स्थित नेपाली दूतावासों को डिजिटल व्यापार प्रवर्द्धन केंद्र के रूप में विकसित करने तथा श्रम गंतव्य देशों में नेपाली श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

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एमाले: “सबसे मित्रता, किसी से शत्रुता नहीं”

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) ने राष्ट्रीय संप्रभुता, भौगोलिक अखंडता और स्वतंत्रता की रक्षा को अपनी मूल प्रतिबद्धता बताया है। पार्टी का नारा है—“सबसे मित्रता, किसी से शत्रुता नहीं।”

एमाले ने स्वतंत्र, तटस्थ और असंलग्न विदेश नीति पर चलने का संकल्प दोहराया है। उसने पड़ोसी भारत और चीन दोनों के साथ संतुलित और विश्वासपूर्ण संबंध बनाए रखने की बात कही है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि न तो किसी एक पड़ोसी से अत्यधिक निकटता रखी जाएगी और न ही दूरी बनाई जाएगी।

साथ ही, श्रम गंतव्य देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों सहित द्विपक्षीय श्रम समझौते करने की प्रतिबद्धता भी जताई गई है।

नेकपा: सीमा विवाद और आर्थिक कूटनीति पर जोर

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) ने स्वतंत्र और संतुलित कूटनीति का नारा देते हुए राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा का संकल्प लिया है। पार्टी ने लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे सीमा विवादों को कूटनीतिक वार्ता और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर हल करने की बात कही है।

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नेकपा ने आर्थिक कूटनीति को प्राथमिकता देते हुए विदेशी निवेश, निर्यात प्रवर्द्धन, तकनीकी हस्तांतरण, पर्यटन और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की नीति अपनाने की घोषणा की है। जलवायु परिवर्तन, हिमालय संरक्षण और भू-परिवेष्ठित देशों के साझा मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली ढंग से उठाने की बात भी कही गई है।

रास्वपा: ‘बफर स्टेट’ से ‘वाइब्रेंट ब्रिज’ तक

राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने विदेश नीति को नई अवधारणा के साथ प्रस्तुत किया है। पार्टी नेपाल को पारंपरिक ‘बफर स्टेट’ की भूमिका से आगे बढ़ाकर ‘वाइब्रेंट ब्रिज’—यानी दो बड़ी शक्तियों के बीच सक्रिय आर्थिक सेतु—के रूप में विकसित करना चाहती है।

रास्वपा ने भारत और चीन दोनों के साथ विकास साझेदारी मजबूत करने, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च गुणवत्ता वाली भौतिक संरचना निर्माण में सहयोग लेने की बात कही है।

सबसे अहम, रास्वपा ने कूटनीतिक नियुक्तियों में राजनीतिक भागबंटा समाप्त कर ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ प्रणाली लागू करने का स्पष्ट वादा किया है। यह पहल अन्य दलों की तुलना में संस्थागत सुधार की दिशा में ठोस कदम मानी जा रही है।

राप्रपा: ‘नेपाल प्रथम’ और शांति क्षेत्र प्रस्ताव

राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) ने ‘नेपाल प्रथम, नेपाली प्रथम’ का नारा देते हुए कहा है कि देश की राष्ट्रीयता कमजोर हो रही है और बाहरी हस्तक्षेप बढ़ रहा है।

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पार्टी ने असमान संधि-समझौतों को समाप्त करने, आर्थिक कूटनीति को प्राथमिकता देने और ‘नेपाल शांति क्षेत्र’ प्रस्ताव को पुनर्जीवित करने की प्रतिबद्धता जताई है।

जसपा नेपाल: राष्ट्रीय सुरक्षा और संतुलित संबंध

जनता समाजवादी पार्टी नेपाल (जसपा) ने राष्ट्रीय सुरक्षा, अखंडता, संप्रभुता और पर्यावरण संरक्षण को विदेश नीति का आधार बताया है। पार्टी का मानना है कि द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों के माध्यम से शांति, स्थायित्व और आर्थिक समृद्धि को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

निष्कर्ष: वादों में समानता, क्रियान्वयन में चुनौती

सभी प्रमुख दलों के घोषणापत्र में राष्ट्रीय हित, संतुलित कूटनीति और आर्थिक सहयोग की बात समान रूप से दिखाई देती है। परंतु राजदूत नियुक्ति में राजनीतिक हस्तक्षेप खत्म करने, परराष्ट्र मंत्रालय के संस्थागत सुधार और पेशेवर कूटनीतिक ढांचे को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और ठोस रोडमैप कम ही दलों ने पेश किया है।

चुनाव के बाद असली परीक्षा इस बात की होगी कि ये घोषणाएँ कितनी नीतिगत प्राथमिकता बनती हैं और कितनी व्यवहार में उतरती हैं। नेपाल की विदेश नीति फिलहाल संतुलन, स्वाधीनता और विकास के त्रिकोण पर खड़ी दिखाई देती है—अब देखना यह है कि नई सरकार इसे किस दिशा में ले जाती है।

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