पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने बालेन शाह सरकार और युवा पीढ़ी के प्रति नरम रुख अपनाया, आर्थिक सुधार और आत्मनिर्भरता पर दिए सुझाव
काठमांडू, सोमबार, ३० चैत २०८२ का अंतिम दिन। पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह राज्य संचालन में युवा पीढ़ी की बढ़ती भागीदारी को लेकर सकारात्मक नज़र आए हैं। अतीत में राजनीतिक दलों की कार्यशैली को लेकर काफी आक्रामक दिखने वाले पूर्व राजा इस बार बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार और नई पीढ़ी के उदय के प्रति नरम और आशावादी सुनाई दिए।
सोमवार को नए वर्ष २०८३ की पूर्व संध्या पर वीडियो के माध्यम से शुभकामना संदेश देते हुए शाह ने कहा कि राजनीति और राज्य संचालन में युवाओं की भागीदारी ‘उत्साह का विषय’ है, जिससे राष्ट्र को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा, “पढ़े-लिखे, देश को समझने वाले और आधुनिक तकनीक का ज्ञान रखने वाले उत्साहित लोगों के आगमन से राष्ट्र को फलदायी बनाने में मदद मिलेगी।”
पूर्व राजा ने आर्थिक स्थिति सुधारने, पड़ोसी और बाहरी मित्र देशों के साथ संबंध मजबूत करने तथा आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त रखने के लिए नए नेतृत्व को सुझाव दिए। उन्होंने परनिर्भरता और पराधीनता से बचने के लिए हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और स्वाधीन बनने पर जोर दिया।
पूर्व राजा ने आपसी रंजिश और प्रतिशोध की राजनीति छोड़कर जनता की चाहत के अनुसार आगे बढ़ने का आग्रह किया। सभी नेपालियों को न्याय, शांति और सुख मिलने की कामना करते हुए उन्होंने देश की मौलिक पहचान बचाने को वर्तमान की मुख्य जिम्मेदारी बताया।


