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ट्रेड यूनियन खत्म करने के फैसले का जसपा ने किया विरोध, सरकार तानाशाही की ओर बढ़ने की आशंका

 
महन्थ ठाकुर, फाईल तस्वीर

काठमांडू, २७ अप्रैल । जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल के संरक्षक महन्थ ठाकुर ने ट्रेड यूनियनों को खारिज करने के सरकार के निर्णय का कड़ा विरोध किया है । उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई कि देश एक बार फिर तानाशाही की ओर बढ़ रहा है ।
सोमवार को राष्ट्रीय सभा के अंतर्गत विकास, आर्थिक मामले और सुशासन समिति की बैठक में बोलते हुए ठाकुर ने सरकार के कामकाज पर आपत्ति दर्ज कराई । उनका कहना था कि लोकतंत्र आने से पहले भी जिन स्थानों—ट्रेड यूनियन, स्कूल–कॉलेज और अदालत परिसरों—को सीमित स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में देखा जाता था, उन्हें अब प्रतिबंधित किया जा रहा है ।
ठाकुर ने चेतावनी दी कि जब जनता के अधिकार छीने जाते हैं, तो राष्ट्र कमजोर होता है । उन्होंने आरोप लगाया कि निजी क्षेत्र के व्यवसायियों के घरों में आगजनी, लूटपाट और बिना स्पष्ट कारण गिरफ्तारी जैसी घटनाएं हो रही हैं । उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यह सरकार खुद को ‘जेन–जी सरकार’ कहती है, लेकिन जेन–जी आखिर है क्या ? क्या हमारी पीढ़ी बेकार हो चुकी है और केवल वर्तमान पीढ़ी ही सही है ?”
उनका कहना था कि इतिहास को नष्ट कर कोई भी पीढ़ी आगे नहीं बढ़ सकती । ठाकुर ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की इस आश्वासन के बावजूद कि मधेस की समस्याएं काठमांडू तक नहीं आएंगी, मधेस में एक बार फिर आवाजें उठने लगी हैं । उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सहित सभी क्षेत्रों में गिरावट का जिक्र करते हुए कहा कि विकास आगे बढ़ने के बजाय पीछे जाता दिख रहा है । “आज हर चीजÞ पर पाबंदी लगाई जा रही है, उन्हें खत्म किया जा रहा है,” ठाकुर ने सवाल उठाया, “क्या यह देश फिर से तानाशाही की ओर बढ़ रहा है ?”

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