मधेश प्रदेश के लिए कैसा है २०८३/८४ का बजट ? कितनी आशा कितनी निराशा ?
नेपाल सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ का लिए बजट सार्वजनिक कर दिया है। बजट में मधेश प्रदेश के लिए पहले से चल रही कुछ पारंपरिक योजनाओं को निरंतरता दी गई है, वहीं कुछ नई योजनाओं ने क्षेत्र के लोगों में नई उम्मीद भी जगाई है।
अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने आगामी आर्थिक वर्ष के लिए २१ खर्ब २४ अर्ब ३४ करोड़ रुपैयाँ का बजट प्रस्तुत किया। बजट में मधेश प्रदेश की राजधानी जनकपुरधाम को विवाह गंतव्य (वेडिंग डेस्टिनेशन) के रूप में विकसित कर अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र बनाने की घोषणा की गई है। हालांकि, इससे पहले की सरकारें भी जनकपुर को वैवाहिक स्थल के रूप में विकसित करने की अवधारणा प्रस्तुत कर चुकी हैं।
इस बार बजट में जानकी मंदिर को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का विषय भी समेटा गया है। इससे स्थानीय नागरिकों में यह उम्मीद जगी है कि सरकार इस क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने को प्राथमिकता दे रही है। इसके साथ ही रामजानकी पथ तथा रामजानकी परिक्रमा सड़क के स्तरोन्नयन के लिए भी बजट आवंटित किया गया है।
माना जा रहा है कि मधेश प्रदेश के दृष्टिकोण से यह बजट समग्र रूप से सकारात्मक है। मधेश प्रदेश में हुलाकी राजमार्ग और फास्ट ट्रयाक सड़क निर्माण को शीघ्र पूरा करने, काठमांडू फास्ट ट्रयाक से जोड़ने वाली रेल परियोजना के विस्तार, बर्दिबास–विराटनगर रेलमार्ग तथा जनकपुर–जयनगर–बर्दिबास रेलमार्ग के शेष कार्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक बजट विनियोजित किया गया है।
फास्ट ट्रयाक सड़क परियोजना को शीघ्र पूरा करने और हुलाकी सड़क निर्माण को गति देने के लिए चार अरब रुपैयाँ का प्रावधान सकारात्मक कदम है।
मधेश प्रदेश में किडनी रोग उपचार केंद्र तथा ट्रमा सेंटर निर्माण शुरू करने की योजना भी बजट में शामिल है। सिरहा–सप्तरी में आम प्रसंस्करण केंद्र और सर्लाही में टमाटर प्रसंस्करण केंद्र स्थापना की योजना को भी मधेश के पक्ष में सकारात्मक कदम माना गया है।
बजट में मधेश प्रदेश में प्रस्तावित ११वीं राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक पूर्वाधार निर्माण का विषय भी शामिल किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नारायणी अस्पताल, गजेन्द्र नारायण सिंह अस्पताल और रामराजा सिंह स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान के पूर्वाधार विकास को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
विशेषज्ञ का मानना है कि मधेश प्रदेश विकास सूचकांक में पिछड़ा हुआ क्षेत्र है, इसलिए यहाँ के लिए विशेष अनुदान और विशेष आर्थिक पैकेज की आवश्यकता थी। मधेश को ऐसा बजट नहीं मिला है जिसका दीर्घकालीन प्रभाव सीधे तौर पर दिखाई दे।


