नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल की भारत यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों को नई गति, UPI-NPI कनेक्टिविटी और कानूनी सहयोग पर अहम सहमति
नई दिल्ली, 23 जेठ 2083 (6 जून 2026) । नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के निमंत्रण पर भारत की औपचारिक यात्रा की। यह यात्रा मार्च 2026 में नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद दोनों देशों के बीच विदेश मंत्री स्तर पर होने वाला पहला उच्चस्तरीय दौरा है, जिसे भारत-नेपाल संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने विकास सहयोग, संपर्क (कनेक्टिविटी), व्यापार एवं पारवहन, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, नवाचार, स्टार्टअप तथा जनता-से-जनता संबंधों सहित भारत-नेपाल संबंधों के सभी प्रमुख आयामों की व्यापक समीक्षा की। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
विकास साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर सहमति
बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने विभिन्न क्षेत्रों में चल रही द्विपक्षीय परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और नवाचार, स्टार्टअप, डिजिटल एवं वित्तीय प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए हाल में शुरू की गई पहलों का स्वागत किया।
दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत और नेपाल के बीच बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत बनाने तथा उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रयासों को तेज किया जाएगा।
सीमापार अपराधों से निपटने के लिए कानूनी सहयोग मजबूत
वार्ता का एक महत्वपूर्ण परिणाम आपराधिक मामलों में भारत-नेपाल पारस्परिक कानूनी सहायता समझौते (एमएलएए) को लागू करने की दिशा में हुई प्रगति रही। दोनों देशों ने इस समझौते को लागू करने के लिए आवश्यक आंतरिक प्रक्रियाओं के पूरा होने का स्वागत किया।
यह समझौता सीमापार अपराधों, तस्करी, संगठित अपराध और अन्य आपराधिक मामलों की जांच, अभियोजन तथा न्यायिक कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक संस्थागत कानूनी ढांचा प्रदान करेगा। इससे दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग और समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है।
नेपाल को सौंपे गए 84 पुनर्निर्माण परियोजनाएं
द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत के विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल को 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद भारत द्वारा प्रदान किए गए पुनर्निर्माण सहयोग के अंतर्गत पूर्ण हुई परियोजनाओं का औपचारिक हस्तांतरण किया।
इनमें नेपाल के विभिन्न हिस्सों में निर्मित 72 स्वास्थ्य संस्थान तथा 12 सांस्कृतिक विरासत संरक्षण परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं को भारत की भूकंप पुनर्निर्माण सहायता योजना के तहत विकसित किया गया था।
UPI और NPI के बीच सीधा भुगतान संपर्क शुरू
यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (NPI) के बीच पीयर-टू-पीयर (P2P) कनेक्टिविटी का शुभारंभ रहा।
दोनों विदेश मंत्रियों ने संयुक्त रूप से इस डिजिटल भुगतान सुविधा की शुरुआत की। इससे भारत और नेपाल के नागरिकों के बीच सीमापार व्यक्तिगत धन हस्तांतरण (रेमिटेंस) अधिक तेज, सुरक्षित और सरल होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक और सामाजिक संपर्क को और मजबूत करेगा।
डिजिटल भाषा तकनीक में नया सहयोग
डिजिटल क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाते हुए भारत की डिजिटल इंडिया भाषिनी पहल और काठमांडू विश्वविद्यालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
यह समझौता “वॉयस फर्स्ट” भाषा अनुवाद मंच के लिए राष्ट्रीय डिजिटल अवसंरचना के सह-निर्माण से संबंधित है। इस पहल का उद्देश्य भाषा आधारित डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देना और तकनीकी सहयोग के नए अवसर खोलना है। दोनों विदेश मंत्री इस समझौते के हस्ताक्षर समारोह के साक्षी बने।
अजित डोभाल से भी हुई मुलाकात
भारत प्रवास के दौरान विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, द्विपक्षीय सहयोग और साझा हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति में नेपाल की अहम भूमिका
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उसकी “नेबरहुड फर्स्ट” (पड़ोसी पहले) नीति के तहत नेपाल एक प्राथमिकता वाला साझेदार देश है। दोनों पक्षों ने माना कि भारत और नेपाल के बीच विशेष, ऐतिहासिक और बहुआयामी संबंध हैं, जिन्हें नियमित उच्चस्तरीय संवाद और सहयोग के माध्यम से और मजबूत किया जाना चाहिए।
दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई वार्ता को “गरमजोशीपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और रचनात्मक” बताया गया। इस यात्रा ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है, बल्कि व्यापार, डिजिटल कनेक्टिविटी, कानूनी सहयोग और विकास साझेदारी के क्षेत्रों में भविष्य के सहयोग के लिए भी मजबूत आधार तैयार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई नेपाली सरकार के गठन के बाद हुई यह पहली विदेश मंत्री स्तरीय यात्रा आने वाले वर्षों में भारत-नेपाल संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।




