याद किए गए बहुभाषाविद् प्रा.डॉ. कृष्णचन्द्र मिश्र
काठमांडू, जेठ २९ । बहुभाषाविद् प्रा.डॉ. कृष्णचन्द्र मिश्र एक प्रबुद्ध समीक्षक, युगांतकारी विचारक तथा मूर्धन्य लेखक थे । यह बात अवकाश प्राप्त प्रा. डॉ प्रमोद कुमार झा ने प्रा. डॉ कृष्णचन्द्र मिश्र की ३० वीं पुण्यतिथि के अवसर पर कही ।
इस अवसर पर श्री उमादेवी मंदिर बल्खु काठमांडू में कल बहुभाषाविद् डा.कृष्णचन्द्र मिश्र की ३०वीं पूण्य तिथि पर
श्रद्धासुमन अर्पण तथा अंशु झा रचित काव्य संग्रह पवित्र रजस्वला का विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हिमालिनी हिन्दी मासिक पत्रिका द्वारा आयोजित इस तथा कार्यक्रम में विद्वानों ने मिश्र जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को स्मरण किया।
अपने संबोधन में प्रा. डॉ. प्रमोद कुमार झा ने मिश्र जी के साथ बिताए आत्मीय क्षणों को याद करते हुए कहा कि वे केवल एक भाषा के विद्वान नहीं थे, बल्कि हिन्दी, संस्कृत, नेपाली और अंग्रेजी के प्रकांड ज्ञाता थे। हिन्दी के लिए वो आजीवन लड़ते रहे ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता त्रिभुवन विश्वविद्यालय हिन्दी केन्द्रीय विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. श्वेता दीप्ति ने की। उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मिश्र जी भले ही आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, किंतु नेपाल में हिन्दी भाषा के लिए उनका संघर्ष, लेखन और चिंतन उन्हें सदैव अमर बनाए रखेगा।
इसी तरह कार्यक्रम उनके संस्मरण तथा विचार पर बोलते हुए त्रिभुवन विश्वविद्यालय हिन्दी केन्द्रीय विभाग के डॉ.विनोद कुमार विमल ने कहा कि हिन्दी भाषा – साहित्य के अप्रतिम व्यक्तित्व थे मिश्र जी । उन्होंने बताया कि आज हर कोई प्रसिद्धि चाहता है लेकिन प्रसिद्धि पाने के लिए अपेक्षित साधना नहीं करता । मिश्र जी ने साधना से सिद्धि और सिद्धि से प्रसिद्धि पाई है । हिमालिनी हिन्दी मासिक पत्रिका द्वारा आयोजित इस श्रद्धा सुमन अर्पित कार्यक्रम में माननीय रेखा यादव, भारतीय राजदूतावास (काठमांडू) के पी.आई.सी विंग के अताशे धनेश द्विवेदी, नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय से डॉ पुनम झा एवं साहित्यकार करुणा झा सहित अन्य विद्वानों ने अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई ।











