भारत के बहराईच में बाँके जिला के चार पत्रकार सम्मानित हुये
नेपालगन्ज/(बाँके) पवन जायसवाल । हिन्दी पत्रकारिता की २ सौ वर्ष पूरा हुए ऐतिहासिक अवसर पर पडोसी मित्र भारत उत्तर प्रदेश की जिला बहराईच में आयोजित “अन्तर्राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन–२०२६” भव्य रूप में १४ जून शनिवार को सम्पन्न हुआ है ।
बहराईच जिला की मान्यता प्राप्त पत्रकार एशोसिएसन, बहराईच द्वारा आयोजन किया गया वह सम्मेलन ने पत्रकारिता, साहित्य, अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता तथा लोकतान्त्रिक मूल्यों की संरक्षण में सञ्चार क्षेत्र की भूमिका बारे गहन विमर्श किया गया । सिआर रिसोर्ट की हाल में सम्पन्न वह कार्यक्रम में भारत और नेपाल के पत्रकार, साहित्यकार, तथा सामाजिक क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्तित्वों की उल्लेखनीय सहभागिता रही थी । वह सम्मेलन में विचार गोष्ठी, लघु हाँस्य–व्यंग्य कविता वाचन, सम्मान तथा पत्रकारिता सम्बन्धी अन्तरक्रियात्मक वृहत् छलफल किया गया था ।
प्रेस काउन्सिल अफ इण्डिया के पूर्व सदस्य सैय्यद हुसैन रिजवी के अध्यक्षता में सम्पन्न वह सम्मेलन के प्रमुख अतिथि बहराईच जिला के सांसद डा.आनन्द गौड रहे थे ।
उद्घाटन सत्र में पूर्व राज्यमन्त्री तथा समाजसेवी राजा इन्द्रसेन रिजवी ने पत्रकारिता समाज परिवर्तन के सशक्त माध्यम हुई है उल्लेख करते हुये सत्य और निष्पक्षता के पक्ष में पत्रकारों को दृढ रहना पडेगा बताया ।
इसी तरह वह सम्मेलन में प्रयागपुर के विधायक सुभाष त्रिपाठी ने पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक रुपान्तरण में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करने के लिए पत्रकारों को आग्रह किया ।
उस सम्मेलन में नेपाल की ओर से सहभागी हुये वरिष्ठ पत्रकार तथा प्रेस काउन्सिल नेपाल के पूर्व सदस्य पूर्णलाल चुके ने हिन्दी पत्रकारिता की २०० वर्ष पूरा होने की ऐतिहासिक अवसर में बधाई तथा शुभकामना व्यक्त करते हुये नेपाल–भारत वीच रही आई ऐतिहासिक सम्बन्ध विश्व की विशिष्ठ प्रकार की है और ऐसी किसी भी मुलुक के वीच नही है बताया । सम्बन्ध को और प्रगाढ बनाने के लिए पत्रकारिता की माध्यम से दोनों देश के पत्रकारों ने सकारात्मक योगदान देने की बातों में जोड दिया । और मजबूत बनाने के लिए ऐसी अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी अपनी धारणा रक्खा था ।
वरिष्ठ पत्रकार पूर्णलाल चुके ने कहा सन् १८२६ मे ३० में अंग्रेज की शासनकाल में पण्डित जुगल किशोर शुक्ल ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ नामक भाषा की साप्ताहिक समाचार–पत्र प्रकाशित करके भारत में हिन्दी पत्रकारिता की शुरुवात की बताया ।
१९ वीं शताब्दी के प्रारम्भ में अँग्रेज शासित भारत में अंग्रेजी, बङ्गली और उर्दू भाषा की पत्रपत्रिका प्रकाशित होने लगी थी, लेकिन हिन्दी भाषी जनता के लिए अपनी भाषा में समाचारपत्र की आवश्यकता महशूुस करके पं. जुगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से देवनागरी लिपी में ‘उदन्त मार्तण्ड’ प्रकाशित किया । इसी अर्थ “उदाती सूर्य” है उन्हों ने बताया ।
उन्हों ने कहा नेपाल में पत्रकारिता की इतिहास का चर्चा करते हुये वि.सं. १९५५, श्रावण में प्रकाशित सुधासागर पहली पत्रिका रही है और वि.सं. १९५८, वैशाख २४ में प्रकाशित गोरखा–पत्र दैनिक नेपाल की पहली सरकारी समाचार–पत्र है ऐसेही अंग्रेजी भाषा में अंग्रेजी पत्रिका वि.सं.२०१० में प्रकाशित नेपाल गार्जेन माना जाता है पहली अंग्रेजी दैनिक समाचार–पत्र वि.सं.२०१३ में गोपाल दास श्रेष्ठद्वारा प्रकाशित द कमनर है और बाद में सरकारी स्वामित्व की द राइजिङ नेपाल तथा वर्तमान में डिजिटल पत्रकारिता के बारे में भी चर्चा किया था ।
उन्हों ने पत्रकारिता से भौगोलिक सीमा से उपर उठकर समाज और मानवता की पक्ष में काम करने के लिए बताया ।
इसी तरह वह सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकार तथा गोरखापत्र दैनिक के वरिष्ठ समाचारदाता सिराज खान ने पत्रकारिता की विश्वसनीयता बचाने ने के लिए आज की सब से बडी चुनौती रही है उल्लेख करते हुये डिजिटल युग में तथ्य में आधारित पत्रकारिता की आवश्यकता और बढी है बताया । उन्हों ने पत्रकारों को सत्य, निष्पक्षता और जन उत्तरदायित्व प्रति प्रतिबद्ध रहने पर जोड दिया ।
सम्मेलन की दूसरी आकर्षण सम्मान समारोह रही थी । वह समारोह में नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार पूर्णलाल चुके, सिराज खान, डा. डक्टप्रसाद धिताल और सबिता चन्द ठकुरी लगायत पत्रकारिता क्षेत्र में निरन्तर कलम चलाते आ रहे दर्जनौँ भारतीय पत्रकार, साहित्यकार तथा सञ्चारकर्मियों को प्रमाण–पत्र, आकर्षक घडी तथा दोसल्ला ओढाकर सम्मान किया गया था ।
पत्रकार एशोसिएसन के मण्डलाध्यक्ष तथा मरकज उर्दू साप्ताहिक के सम्पादक सदाव हुसैन की प्रभावकारी उद्घोेषण में सञ्चालित वह सम्मेलन में जिला अध्यक्ष आनन्द प्रकाश गुप्ता के अगुवाई में और अन्य पत्रकारों की सक्रिय सहयोग रही थी ।
सम्मानित व्यक्तित्वों ने पत्रकारिता केवल पेशा न होकर समाज परिवर्तन की अभियान है उल्लेख करते हुये सत्य, न्याय और जनहित के पक्ष में कलम चलाने के लिये प्रतिबद्धता व्यक्त किये थे । वह सम्मलेन की आयोजक संस्था ने पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक चेतना अभिवृद्धि में पहूँचायी योगदान की कदर स्वरूप सम्मान प्रदान किया गया है जनाया गया । कार्यक्रम में सहभागी हुये वक्ताओं ने दो शताब्दी लम्बी हिन्दी पत्रकारिता की यात्रा से लोकतन्त्र सुदृढीकरण, सामाजिक जागरण और जनचेतना विस्तार में ऐतिहासिक योगदान पहँचायी है उल्लेख करते हुये आगामी दिनों में पत्रकारिता ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल प्रविधि और सामाजिक सञ्जाल की युग में भी सत्य और विश्वसनीयता को केन्द्र में रखकर लागे बढ्ने के लिये धारणा व्यक्त किये थे । हिन्दी पत्रकारिता की २०० वर्ष गौरवपूर्ण इतिहास को स्मरण करते हुये आयोजित यह अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन ने नेपाल–भारत बीच की पत्रकारितागत सम्बन्ध को और सुदृढ बनाने की साथ –साथ पत्रकारिता, साहित्य और विचार की अन्तर्राष्ट्रीय आदान–प्रदान को नई उचाई प्रदान की है सहभागियों की कहना थी ।






