Mon. Nov 2nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

मनुष्य के भीतर भी एक सूर्य है, बस उसे पहचानने की जरूरत है : बिमल सरार्फ

 

बिमल सरार्फ, रक्सौल, 23 अगस्त 2026 । मनुष्य का शरीर केवल हाड़-मांस से बना एक ढांचा नहीं, बल्कि अनगिनत दृश्यमान और अदृश्य ऊर्जाओं का अद्भुत केंद्र है। हमारे भीतर कितनी ऊर्जा छिपी हुई है और उसकी वास्तविक सीमा क्या है, इसका अनुमान लगाना भी आसान नहीं है। जब व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति और आत्मज्ञान की थोड़ी-सी भी अनुभूति कर लेता है, तो उसके जीवन में नई रोशनी और नई दिशा का संचार होने लगता है।

सूर्य और मनुष्य के बीच कई अद्भुत समानताएँ हैं। सूर्य अनंत ऊर्जा और प्रकाश का स्रोत है, वहीं मनुष्य के भीतर भी अपार मानसिक, आध्यात्मिक और रचनात्मक ऊर्जा मौजूद है। सूर्य जिस प्रकार अपने प्रकाश से संसार को जीवन देता है, उसी प्रकार मनुष्य भी अपने ज्ञान, कर्म, प्रेम और सकारात्मक सोच से अपने आसपास के जीवन को प्रभावित कर सकता है।

यह भी पढें   इनम का कमाल, बने नेपाली नटवरलाल* एक यथार्थपरक विश्लेषण : डा विजय दत्त

आध्यात्मिक दृष्टि से सूर्य को जगत की आत्मा और परमात्मा के प्रत्यक्ष स्वरूप के रूप में देखा गया है। सूर्य हमें प्रतिदिन अनुशासन, संतुलन, निरंतरता और कर्मशीलता का संदेश देता है। उसका उदय और अस्त दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। यही कारण है कि हमारी परंपरा में छठ पर्व के दौरान उगते और डूबते दोनों सूर्य की आराधना की जाती है।

सूर्य अपने स्वभाव और नियम से कभी विचलित नहीं होता, लेकिन मनुष्य अक्सर अपनी ही क्षमताओं पर भरोसा खो देता है। वह अपनी ऊर्जा को पहचानने और अपने भीतर के प्रकाश को महसूस करने के बजाय दूसरों से तुलना, ईर्ष्या, जलन, शर्मिंदगी, संकोच और घृणा जैसी भावनाओं में अपनी बहुमूल्य ऊर्जा नष्ट कर देता है।

यह भी पढें   मनुमुक्त 'मानव' मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा हरियाणवी कवि-सम्मेलन आयोजित* *4 महाद्वीपों और 7 देशों के 20 कवियों ने की सहभागिता

मनुष्य कई बार स्वयं को साबित करने और दूसरों की प्रतिक्रिया का जवाब देने में इतना उलझ जाता है कि अपनी वास्तविक मंजिल से भटक जाता है। परिणामस्वरूप उसकी ऊर्जा सही दिशा में उपयोग होने के बजाय अनावश्यक संघर्षों में समाप्त हो जाती है। इसका प्रभाव पढ़ाई, करियर, स्वास्थ्य, नौकरी, व्यवसाय और रिश्तों सहित जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ता है।

जीवन में सफलता के लिए केवल ऊर्जा होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही दिशा में उपयोग करना भी जरूरी है। हमें काम और विश्राम, महत्वाकांक्षा और संतोष, संघर्ष और शांति के बीच संतुलन बनाना सीखना होगा।

यदि हमारे भीतर साहस और दृढ़ता की ऊष्मा मौजूद है और विपरीत परिस्थितियों में भी आशा की एक किरण जीवित है, तो कठिन से कठिन समय भी हमारी जीवन-यात्रा को रोक नहीं सकता। जरूरत केवल अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और उसे सकारात्मक दिशा देने की हैं।

यह भी पढें   जन्म लेने की सजा भुगत रही मालती : कैलाश दास

हमारे भीतर छिपी निर्भयता, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा ही हमारे जीवन का आंतरिक सूर्योदय है। जब हम अपनी इस ऊर्जा को पहचान लेते हैं और उसका सदुपयोग करना सीख जाते हैं, तब हमारा जीवन भी सूर्य की तरह प्रकाशमान हो सकता है और हम स्वयं के साथ-साथ दूसरों के जीवन में भी उजाला भर सकते हैं।

मनुष्य के भीतर का सूर्य कभी अस्त नहीं होता, वह केवल हमारी नकारात्मक सोच और भय के बादलों से ढक जाता है। जरूरत उन बादलों को हटाकर अपने भीतर के प्रकाश को पहचानने की है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com