Fri. Jul 31st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

अख्तियार की लीला : बिम्मीशर्मा

 

बिम्मीशर्मा, काठमांडू , ७ दिसम्बर | (व्यग्ंय)

आप करें तों रामलीला ? और कोई दूसरा करें तो रास लीला, या उसका क्यारेक्टर ढीला ?

इधर देश की जनता एक तरफ अभावों से जूझ रही है । उधर अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग (अदुअआ) अपनी लीला दिखा रहा है । अख्तियार के प्रमुख लोकमान है ही“जोकमान” । जो दूसरों को गाहे, बगाहे “शोकमान” कर देते हैं । हेड मास्टर की तरह जब लोकमानजी अख्तियार का डंडा घुमाते हैं तब अच्छे, अच्छों का पसीना छूट जाता है । अपने अख्तियार की बंशी से सिर्फ छोटी मछली का ही शिकार करने वाले लोकमान जी ने इस बार बड़ी मछलियों को भी जाल में डालने का पूरा यत्न किया है । आगे का मंजर और भी ज्यादा मजेदार होगा यह तो ट्रेलर देख कर ही पता चल रहा है ।

Akhtiyar-Durupayog-anusandhan-aayogअख्तियार की पैनी आंखो से लगता है अब कोई नहीं बच पाएगा । जिसके घर मे आधा या पूरा भरा गैस का सिलिंडर होगा वह भी अख्तियार के संदेह के घेरे में आ सकता है । और जिसके मोटर साईकल और कार पेट्रोल और डिजेल से लबालब भरे हुए होगें वह भी अख्तियार के फंदे मे पड़ सकता है भई । जब नेपाल आयल निगम के निर्देशक ही अख्तियार के फंदे में है तो बड़े जतन से और बहुत दिनों तक लाईन मे बैठ कर इसे प्राप्त कर गर्मजोशी से अपनी बांहो में भरने वाले शंका के घेरे मे क्यो न आए ? इतनी पीड़ा और अभाव के समय में भी आप हंस रहे है और जिंदगी गुजार रहे हैं यह बेचारे अख्तियार को कैसे पच सकता है भई ?वह हाथ में हाथ रख कर नहीं बैठ सकता ।

यह भी पढें   सुनसरी हिंसा के बाद मधेश में तनाव बरकरार, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की निष्क्रियता पर उठे सवाल

अब किसी ने किसी खुशीयाली में बड़ी मशक्कत कर के गाजर का हलवा खा लिया, या किसी ने इंधन और गैस के चरम अभाव में भी चिकन या मीट बना कर खा लिया और उसका छोटा सा टुकड़ा या रेशाआपकी दांत में अटक कर रह गया तो खैर नहीं । इसी बिना पर अख्तियार आप पर संदेह कर सकता है और अनापशनाप संपति के जुगाड़ करने के मामले मे फंसा कर आप को अदालत घसीट सकता है ? इसी लिए सावधान रहिए और घर से बाहर जाते समय दांत अच्छी तरह साफ कर लिजिए ।

जब आप किसी सार्वजनिक संस्था के अध्यक्ष बन कर ३० करोड़ रुपया डकार जाते हैं तो कुछ नहीं होता और अख्तियार इसके बारे में छानबीन करे तो वह खराब है ? जब आराम से खा कर डकार लिया तो आराम से जेल भी जाओ न ? जेल से विदा होने पर तो सभी अपने और भ्रष्ट फूलमाला से आपकी अगवानी ही करेगें । जैसे नेपाली काग्रेंस के नेता खुमबहादुर खड्का का उनके समर्थक और काग्रेंस के कार्यकताओं ने जेल से निकलते समय किया था? स ब भूल गए क्या ?

नेकपा एमाले के वरिष्ठ नेता माधवकुमार नेपाल अपने समर्थक नेताओं को अख्तियार द्धारा काली सूची में रखने से खफा है । नेपाल कह रहे है ‘समझ नहीं आता अख्तियार क्या करना चाहता है ?’ जब आप खुद इस देश के प्रधानमंत्री थे और उसी समय सरकारी खर्चे में अपनी बेटी की शादी की थी । वह सब भूल गए क्या ? दूसरे सब चोर और बदमाश और आपकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सभी संत और महात्मा ?वाह भई हद करते है आप । इतने बडेÞ नेता और प्रधानमंत्री हो कर भी आपके पिताजी जब जीवित थे तब सरकार की तरफ से वृद्ध भत्ता लेते थे । वह सब याद है न आपको ? कमरेडजी आप अपने भीतर झाँकिए । आप और आपकी पार्टी नेकपा एमाले मे कोई दूध का नहाया नहीं है । जिस देश में कम्यूनिष्ट राज करती है वहां भ्रष्टाचार अपने पूरे शबाब पर होता है ।

यह भी पढें   शी चिनफिंग की नई रणनीति और ताइवान संकट : अनिल तिवारी

देश के बड़े तबके के बुद्धिजिवी तो अख्तियार कीकाली सूची में अपना नाम आने पर खुशी से उछल रहे हैं । गोया चन्द्रमा में जाने का टिकट मिल गया हो जैसे । या तो इनके हाथ इतने लंबे हैं कि कोई Þपकड़ नहीं सकेगा और अख्तियार खुद ही शर्मा जाएगा और इनको छोड़ देगा । समाज और मीडिया में अपने प्रभाव को जानते हुए अख्तियार की काली लिस्ट मे अपने नाम को पढ़ कर और चिठ्ठी पा कर यह धन्य हो गए हंै । इसीलिए बाहरी बड़प्पन दिखाते हुए खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं । इन्हें लगता है की अख्तियार छोटी मछली या छोटा आदमी को तो पकड़ेगा नहीं ? । अख्तियार द्धारा पत्र काटने का मतलब है आप समाज के लब्ध प्रतिष्ठित आदमी हैं । इसीलिए हंगामा है बरपा ।

अब तक का देश का इतिहास और अख्तियार की कारवाही से यही पता चला है कि जो जितना बदनाम होगा और अख्तियार के फंदे मे चढ़ेगा । उसका बाकी जीवन उतना ही शानदार होगा । जब भ्रष्टाचार सावित होने पर जेल जीवन बिता कर वह आदमी और भी बड़ा और धुरन्धर नेता बन कर बाहर आ जाता है । अब तो अख्तियार की काली सूची मे पड़ना भी बहुत से लोगों को जांच में चिटिगं करते हुए पकडेÞ जाने जैसा ही लगता है ।

यह भी पढें   दिल्ली का जंतर मंतर और काठमाण्डु का माइतीघर मण्डला* ​एक तात्विक विश्लेषण : डा. विजय दत्त

इसीलिए भूकंप आने के बाद जस्ता, पाता में घोटाला हुआ । जनता के राहतवितरण में घोटाला हुआ । अभी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के शासनकाल में कालाबजारी खूब पनप रहा है । इससे सरकारी छत्र छांया में कुछ लोगों की चांदी हो रही है । और सर्वसाधारण जनता की खून, और पसीने की कमाई पर सेंध लग रहा है । यह जो कालाबजारी को सरकार पनाह दे रही है । यह भी तो एक किसीम का घोटाला ही है ?तो क्यों नही अख्तियार इस के विरुद्ध में कुछ नहीं करती ?

अभी जो, जो अख्तियार के फंदे में चढ़े है वह अख्तियार को कोस रहे है । वह बेहद मासूम है और अख्तियार उन्हे फंसा रहा है । यही इन का तर्क है । जब जनमोर्चा के नेता और वर्तमान सरकार में उप(प्रधान बने श्री चित्रबहादुर केसी भी जब उतने मासूम और इमानदार नहीं है जितना वह बोलते है । उनके और परिवार के बांकी लोगों के नाम से प्रापर्टी और बैंक बेलेंस मिलने के जो समाचार बाहर आए हैं । उस से ही पता चल गया है कि केसीजी बेइमानी के कितने गहरे पानी में तैर रहे हैं ?

आप करें तों रामलीला ?

और कोई दूसरा करें तो रास लीला

या उसका क्यारेक्टर ढीला ?

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.
WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com