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द्वन्द्व पीडित विशेष राहत कार्यक्रमः एक चर्चा

 

गणेशप्रसाद उपाध्याय
देश में दश वर्षसे चल रहे सशस्त्र द्वन्द्व को विस्तृत शान्ति सम्झौता ने अन्त्य करके शान्ति प्रक्रिया गतिशील किया है। शान्ति पर््रबधन के सर्न्दर्भ में ध्वस्त र्सार्वजनिक संरचनाओं का पुनर्निर्माण, केन्द्र और स्थानीय स्तर में शान्ति समिति के माध्यम से शान्ति स्थापना, द्वन्द्वरत समूह के साथ साथ अन्य समूहों के साथ शान्ति वार्ता, सहमतीय संधी सम्झौता के माध्यम से शान्ति स्थापन प्रक्रिया जारी है। साथ ही द्वन्द्वरत व्यक्तियों को तत्काल प्रभावित होने वाले राहत कार्य, संक्रमणकालीन न्याय सम्बन्धी कार्य एवं शिविर व्यवस्थापन के कार्य होते आ रहे हैं। इन विषयों के बारे में प्राथमिकता के साथ सम्बोधन करने के लिए नेपाल के मौजूदा अन्तरिम संविधान ने भी निर्देश कर रखा है। वाषिर्क एवं आवधिक योजनाओं को राष्ट्रिय नीति में समावेश करने के कारण ये विषय प्राथमिकता में हैं और ये कार्य अपेक्षित रुप में सम्पादित भी हो रहे हें। फिर भी बहुत सारे काम इस सर्न्दर्भ में करना बाँकी है। अतः तत्काल बिराम लेने की अवस्था नहीं है। उल्लेख्य शान्ति प्रक्रिया के तहत द्वन्द्व के कारण दुःखी पीडिÞत व्यक्तियों को राहत प्रदान करने का कार्य भी उतने ही महत्व के साथ प्रवाहित हो रहे हैं। द्वन्द्व के क्रम में मृत व्यक्ति के आश्रतिों, लापता होने वाले व्यक्ति के परिवारों, द्वन्द्व के क्रम में अंग-भंग हुए व्यक्तियों, द्वन्द्वरत पक्षद्वारा अपहरित व्यक्तियों, हिरासत में यातना प्राप्त व्यक्तियों, निजी धन-सम्पत्ति अपहरित व्यक्तियों, अनाथ हुए व्यक्तियों तथा आन्तरिक रुप में विस्थापित हुए व्यक्तियों को अल्पकालीन राहत राशि द्वारा मल्हम पट्टी लगाना आवश्यक है। उक्त पीडिÞत व्यक्तियों को उचित क्षतिपर्ूर्ति एवं न्याय प्रदान करना राज्यका उत्तरदायित्व है।
राज्य द्वारा राज्य निर्माण प्रक्रिया के मूल-भूत विषय को उचित समय में सम्बोधन करते हुए भौतिक एवं सामाजिक समय में सम्बोधन करते हुए भौतिक एवं सामाजिक पुनर्निर्माण करके सामाजिक एकीकरण के माध्यम द्वारा एक तरफ समाज की बुर्राईयों को न्यूनीकरण करना है तो दूसरी ओर शान्ति प्रक्रिया को निश्चित समय सीमा के भीतर निर्ण्ाायक बिन्दु पर पहुँचाने की अनिवार्यता भी देश के सामने उपस्थित है। जिसे पूरा करना राजनीतिक दलों कर्ीर् इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है। शान्ति निर्माण प्रक्रिया के एक महत्वपर्ूण्ा बिन्दु द्वन्द्व पीडितों के लिए राहत प्रदान एवं पुनर्स्थापना के सर्न्दर्भ में नेपाल सरकार द्वारा ऐसे परिवारों के लिए राहत सहायता क्षेत्र में भी कार्य किया जा रहा है। विगत तीन वर्षमें शान्ति तथा पुननिर्माण मन्त्रालय द्वारा प्रदान किया गया।
द्वन्द्व पीडित व्यक्ति, परिवार का विवरण, प्रवाहित राहतका कार्य और पुनस्थापना की उल्लेखित अवस्था आर्थिक वर्ष०६७/०६८ के तथ्यांक में आधारित है। सेवा प्राप्त पीडितों की संख्या और प्रवाहित राहत कार्य निरन्तर प्रगतिशील अवस्था में है तो दूसरी ओर पीडिÞतों की पहचान करने में काठिनाइ, स्रोत-साधन का अभाव, कार्यान्वित करने वाले निकायों के बीच समन्वय, सच्चे पीडिÞतों की असली पहचान में कठिनाई, न्यायिक और तटस्थ राहत विवरण व्यवस्था एवं अन्य व्यवस्थाकीय चुनौती बीच उक्त कार्यों को निर्ण्र्ाात्मक स्थिति में पहुँचाने की समस्या है। इन चुनौतियों के बाबजूद केन्द्र में शान्ति तथा पुनर्निर्माण मन्त्रालय, राहत तथा पुनर्स्थापना इकाई और जिलास्तरीय जिला प्रशासन कार्यालय, जिला विकास समिति, जिला शिक्षा कार्यालय एवं स्थानीय शान्ति समितियों ने उक्त कार्यों को सफलता पर्ूवक निर्वहन करने की जिम्मेवारी लिया है।
नेपाल सरकार तथा शान्ति पुन निर्माण मन्त्रालय ने उपयर्ुर्त्तर्mmर्यों के अतिरिक्त इस वर्षविशेष राहत कार्यक्रम संचालन कर रहा है। यह कार्यक्रम शान्ति पर््रवर्द्धन की दिशा में महत्वपर्ूण्ा है, जो विगत के दश वर्षो सशस्त्र द्वन्द्व के क्रम में मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति के हकदार, लापता हुए व्यक्ति के हकदार और लापता हुए व्यक्ति की पत्नी को राहत प्रदान करने का लक्ष्य रखा है। इस कारण से यह कार्यक्रम परिणाममुखी, प्रगतिजन्य, ऊँचाई को प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है। इस विशेष राहत कार्यक्रम के द्वारा इस वर्षनौ हजार मृत्यु प्राप्त करने वाले व्यक्ति के हकदारों, एक हजार लापता किए गए व्यक्तियों के हकदारों के प्रति व्यक्ति दो-दो लाख के हिसाव में कुछ और थप राशि देकर कुल तीन तीन लाख रपैया राहत या क्षतिपर्ूर्ति प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। नागरिकों के द्वारा देश के लिए दी गई आहूति को पैसे देकर सही मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है, उनके आश्रतिों को जितना पैसा दिया जाय कम ही है। अतः राष्ट्र के नाम समर्पित ऐसे शहीद सपूतों को इतिहास के पन्ने पर स्वर्ण्ााक्षरों में इन के नामों को अंकित करने का काम जरुर होना चाहिए।
इस आर्थिक वर्षे प्रारम्भ में ७३ जिलों में जिला प्रशासन कार्यालयों के द्वारा इस कार्य को. सफलतापर्ूवक पीडितों के लिए राहत कार्य प्रवाहित करने के लिए बजट के साथ-साथ निर्देशन पत्र प्रेषित किया गया है। स्थानीय स्तर में शान्ति व्यवस्थापन, पर््रवर्द्धन, सरलीकरण और समाज में मेलमिलाप के साथ-साथ सामाजिक एवं भौतिक पुनर्निर्माण के कार्य को सहयोग देने के लिए सभी जिलों में गठित शान्ति समिति के पदाधिकारियों को इस कार्य को सफलता बनाने हेतु सहयोग कर्ताओं का आह्वान किया गया है। इससे पहले किसी भी स्रोत या संस्था के द्वारा मृत्युवरण किए व्यक्तियों लापता हुए व्यक्रियों के हकदारों को प्राप्त १ लाख रुपये सहयोग राशिको तीन लाख तक सहयोग राशि पहुँचाने की योजना बनाकर कार्य सञ्चालन करने की निर्देशिका नेपाल सरकार मन्त्रिपरिषद द्वारा २०६८ आश्विन में संशोधन हो कार्यान्वित हर्ुइ है। नागरिक राहत, क्षतिपर्ूर्ति तथा आर्थिक सहायता सम्बन्धी -प्रथम संशोधन) कार्यविधि २०६८ मृतक के हकदारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने -प्रथम संशोधन) निर्देशिका २०६८ ने विशेष राहत कार्यक्रम को कार्यान्वित करने के लिए सरल, सहज बनाया गया है। इस योजना के द्वारा इस समय तीन लाख तक राहत/आर्थिक सहायता नहीं प्राप्त हकदार को मात्र तीन लाख रुपये पहुँचाने का लक्ष्य लिया है। पीडित लोग सरल, सहज रुप से समय में ही राहत सहयोग प्राप्त कर सकें, ऐसी व्यवस्था की गई है। राज्य पीडित नागरिकों के प्रति संवेदनशील एवं जवावदेह है, ऐसी अनुभूति कराने और उच्च प्राथमिकता के साथ स्थानीय स्तर में कार्य सम्पन्न करने के लिए सभी जिला प्रशासन कार्यालयों में आवश्यक निर्देशिका सहित सत्य तथ्यांक प्रेषित किया गया है। इतना होते हुए भी कार्यान्वयन के क्रम में आये द्विविधाओं या अन्य उपस्थित समस्याओं का समाधान करने/कराने की सूचना तथा सन्देश प्रवाह निरन्तर एव्र द्रुत संवाद हो, ऐसी व्यावस्था मिलाई गई है।
मानवीय जीवन अमूल्य है, अमूल्य जीवन की हत्या होना अपूरणीय क्षति है, हत्याजन्य कार्य, अघन्य अपराध, अपूरणीय घटना करने वाले व्यक्ति हमेशा अक्षम्य होता है। पीडिÞतो के प्रति राहत प्रदान करना राज्य द्वारा सदासयता दिखाना कर्तव्य ही नहीं है, अपितु पीडित नागरिकों के उचित क्षतिपर्ूर्ति मिलना उनका मौलिक अधिकार है। नेपाल के अन्तरिम संविधान २०६३ एवं विस्तृत शान्ति सम्झौता द्वारा की गई परिकल्पना, संक्रमणकालीन न्यायिक संयन्त्र, सत्य निरुपण तथा मेलमिलाप आयोग और लापता हुए व्यक्तियों की खोज-तलास करने वाले अयोग के द्वारा विगत में मानव अधिकार हनन जैसी जघन्य घटनाओं के सम्बन्ध में यथार्थ सत्य निरुपण हो, वेसी आशा जनता कर रही है। दर्ीघकालीन शान्ति निर्माण प्रक्रिया के सर्न्दर्भ में निकट भविष्य में निर्माणाधीन उच्चस्तरीय आयोग द्वारा विगत में हुए मानवअधिकार उल्लंघन के गम्भीर घटना के सम्बन्ध में खोज तलास, अनुसंधान, अन्तिम सत्य का निरुपण करते हुए राष्ट्र पीडिÞत नागरिकों को उचित न्याय देगा। सत्य अन्वेषण और घोषणा द्वारा नागरिकों का सन्तुष्टि सहित भविष्य सुनिश्चित होगा, ऐसी अपेक्षा इस कार्यक्रम से की जा सकती है। वास्तव में मानवीय मृत्यु अपूरणीय क्षति है। अमूल्य जीवन को क्षतिपर्ूर्ति के द्वारा मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है। शहीद हुए योद्धा और उसके परिवार को राज्य के द्वारा सम्मान होना ही चाहिए, जिससे देश भर में आमूल परिवर्तन की दिशा में क्रान्ति की लहर दौडे। इसी सोच को मद्देनजर रखते हुए सरकार के द्वारा प्रवाहित विशेष राहत कार्यक्रम कें रुप में सहादत प्राप्त व्यक्ति और लापता हुए व्यक्ति के हकदारों को स-सम्मान स्मरण किया है। पीडिÞतों को सहज और सरल ढंग से इस राहत राशि को प्राप्त कराने वाली सरकारी निकाय, स्थानीय निकाय और नागरिक समाज के द्वारा सहजीकरण किया जाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो निश्चय ही अपेक्षित लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और पीडिÞत वर्गों में अधिकार और राहत कार्य प्रवाहित हो सकता है। ±±±

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