संविधान सम्वन्धी भ्रम मधेश में नहीं पहाड़ में है
मनोज बनैता, लहान, २८ डिसेम्वर ।
मधेश आन्दोलन संघीयता, जनसंख्या के आधार में निर्वाचन क्षेत्र, समानुपातिक और सीमाकंन की सुनिश्चितता ना पाने तक आन्दोलन जारी रहने की बात राजनीतिक विशलेषक कृष्ण न्यौछेयु ने कहा है । उन्होंने कहा है कि ये आन्दोलन मधेशी, थारु, दलित, जनजाति, मुसलमान, महिला उत्पीड़ित वर्ग के आमूल परिवर्तन के लिए है । सभी जनता को मुक्ति न पाने तक सड़क संघर्ष जारी रखना चाहिए । सोमवार पौष १३ गते लहान में संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा द्धारा आयोजित ‘मधेश आन्दोलन ः समाधान र निकास सम्बन्धि वृहत्त अन्तरक्रिया’ कार्यक्रम में उन्होंने ये बात कही है ।
राजनीतिक विशलेषक तुलानारायण साह ने कहा है कि जनविद्रोह की अवस्था में रहे मधेश आन्दोलन को शासक वर्ग ने समय में अगर अधिकार नहीं दिया तो इसका नेतृत्व पंक्ति बदल भी सकता है । आन्दोलन का स्वरूप बदल सकता है और अलग मधेश की स्थापना हो सकती है । साह ने कहा है कि मधेश को पीछे धकेलने और मधेशी के ऊपर शासन करने के लिए खस–ब्राह्मण ने बहुत बडा षड्यन्त्र रचा है । इसलिए मधेश आन्दोलन और सशक्त होने की जरुरत है । उन्होंने ये भी कहा कि संविधान सम्वन्धी भ्रम मधेश में नहीं पहाड़ में है । अधिवक्ता दिपेन्द्र झा ने कहा कि, सरकार की गोली और ओली की बोली के कारण ही मधेश आन्दोलन ने गति ली है और मधेशी आक्रोशित हैं । इस आन्दोलन ने सिर्फ टोपी ही नहीं बल्कि धोती को भी राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाया है ।
मधेशी अगर एक हाथ जमीन के लिए सर्वोच्च तक पहुँच सकता है तो यहाँ तीन जिले का सवाल है । इसके लिए जन्मो जन्म तक मधेशी सपूत लड़ते रहेंगे ऐसा अधिवक्ता झा ने कहा है । इसी तरह, पत्रकार अमरेन्द्र यादव ने कहा है कि इस देश में मधेशी, जनजाति और खसब्राह्मण इन तीनों की शक्ति बराबर की संख्या मे है लेकिन, ३० प्रतिशत खस ब्राह्मण ने ७० प्रतिशत के ऊपर सत्ता शासन और शोषण करते रहने के कारण इसको तोड़ने के लिए मधेश आन्दोलन बहुत आवश्यक है । कार्यक्रम मधेश आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता कृष्णबहादुर यादव की सभाध्यक्षता में सम्पन्न हुई ।



