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जितेन्द्र देव की हत्या, सरकार खामोश : आखिर थे तो वे मधेशी ही

 
सप्तरी १० जनवरी । अगर पहाड़ मे रह रहे खसलोगों को थोड़ा जुकाम आ जाए तो पूरे नेपाल मे सनसनी मच जाती है । यहाँ के कथित राष्ट्रवादी मीडिया का भी जैसे नींद और चैन उड़ जाता है मगर मधेश में अगर किसी की गैरकानूनी हत्या भी हो जाए तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है । सरकार हत्या के कारण के पीछे जाना और हत्यारा को सजा देना उतना अहम नहीं समझती है । सरकार के इस रवैए से सम्पूर्ण मधेश घायल है ।Detendra-dev-3
 सप्तरी जिले राजविराज के रहनेवाले  ३० वर्षीय एक आम आदमी जितेन्द्र नारायण देव की हत्या हुए तीन माह बीत जानेपर भी सरकार ने अभीतक कोई छानवीन प्रक्रिया शुरु नहीं की है । आश्विन ३० गते शनिबार के दिन जितेन्द्र नारायण देव  राजविराज से लापता हुए थे । देव के परिवारजन उन्हें २ दिनतक खोजते रहे लेकिन वह नहीं मिला । कार्तिक ३ गते मंगलवार देव की लाश सशस्त्र पुलिस के क्याम्प नजदीक जो कोशी का नहर है वहाँ से मिली । पोष्टर्माटम से ये पता चला कि देव को बहुत बेरहमी से तड़पा तड़पा कर मारा गया था । मृतक के परिवार स्रोत के अनुसार देव की हत्या पुर्व नियोजित थी । वहाँ का स्थानीयवासी सशस्त्र पुलिस को दोषी मान रही है । सरकार अनुसन्धान करने के वजाए देव की हत्या को न जाने क्यों  गोप्य रखना चाहती है ।
समाजवादी फोरम के यूवा नेता दयानन्द गोईत कहते हैं “ जितेन्द्र नारायण देव लगायत दर्जनौ मधेशी सपुतों का गैर न्यायिक हत्या सरकार का मधेश के प्रति की घृणा स्पष्ट है । नेपाल अभी भी मधेश को अपना उपनिवेश मान रही है जिसका प्रमाण है वो सारी घटनाएँ । राजनीति और साम्प्रदायिकता से परे होकर जनता की सुरक्षा के लिए शपथ खाए हुवे नेपाल पुलिस भी अपने   साम्प्रदायिक सोच का घृणित रूप मधेश में दिखा रहा है । जिसका प्रमाण है संविधान में अधिकार खोज रहे जनता को भारतीय, मोदी का सन्तान, धोती, बिहारी जैसे साम्प्रदायिक शब्द प्रयोग करके आन्दोलन को उग्र बनाना और नाबालक से लेकर  वृद्ध तक को घृणा और बदले की भावना से निर्मम हत्या करना ।”

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