लालू से हुई मुलाकात को राष्ट्रीयता से जोड़ना अपनी नाकामयाबी छुपाना है : श्वेता दीप्ति
11 years ago
लालू यादव से हुई मुलाकात को मान अपमान से जोड़कर देखने का कोई औचित्य ही नजर नहीं आता । ये कोई औपचारिक मुलाकात नहीं थी कि विशेष व्यवस्था के तहत मुलाकात होती । खैर, जाकी रही भावना जैसी ।
श्वेता दीप्ति, काठमांडू, ३ फरवरी २०१६ |
एक मनोवैज्ञानिक सोच इंसान पर हमेशा हावी होती है, वह है अपनी कमजोरियों को लेकर चिन्तीत रहना । अक्सर हममें जो कमी होती है तो हम परिस्थितियों का भी आकलन उसी हिसाब से करते हैं । मौसम के अनुरूप लॉन में होती एक सीधी सी औपचारिक भेंट को स्वाभिमान से जोड़कर देखना उसी मानसिकता को दर्शाता है । हम जाने अन्जाने खुद ही अपनी लाचारी से डरे होते हैं और हमें यूँ लगता है कि जमाना ही हमें लाचार समझ रहा है । ऐसी मानसिकता से ग्रसित सोच हर पहलू में नकारात्मकता ही ढूँढती है । मधेशी नेताओं ने लालू यादव से एक अनौपचारिक माहोल में मुलाकात की, मुलाकात की तस्वीर वाइरल बनी हुई है और मधेश आन्दोलन के मोर्चा को जो सम्भाले हुए हैं उन्हें ही गाली देने का अवसर मौकापरस्तों को मिल गया है । याद रहे कि लालू यादव बिहार के कदवर नेता अवश्य हैं किन्तु पदविहीन हैं । इस मुलाकात को मान अपमान से जोड़कर देखने का कोई औचित्य ही नजर नहीं आता । ये कोई औपचारिक मुलाकात नहीं थी कि विशेष व्यवस्था के तहत मुलाकात होती । खैर, जाकी रही भावना जैसी ।
सच तो यह है कि हमाम में सभी नंगे हैं । वर्षों पुरानी दासत्व की जो स्थिति देश में थी उसका असर तो गाहे बगाहे हमारे केन्द्रीय नेताओं पर दिखता ही रहा है । बहुत पुरानी बात नहीं हुई है जब माधव नेपाल अपने प्रधानमंत्रीत्वकाल में राजा के समक्ष पहुँच कर दाम देने की प्रथा का निर्वाह करते हुए बिछे जा रहे थे, या नेपाली जनता को वो समय भी याद ही होगा जब गिरिजा जी ने जनता की जीत को राजा की जीत कहा था और जम कर विरोध को भी झेला था । पर आज जिस तस्वीर पर इतने उग्र वक्तव्य आ रहे हैं, उसका कोई मतलब नहीं है । अगर देखा जाय तो इस विरोध या राष्ट्रवाद का हवाला भी उसी नीति के तहत हो रहा है जिस नीति के तहत सरकार आन्दोलन के मसले का स्वरूप ही बदलने की कोशिश करती आ रही है । मुद्दे से जनता के ध्यान को हटाना और अपनी नाकामयाबी को छुपाना यह भी यहाँ की राजनीति का अहम हिस्सा है ।
मधेश आन्दोलन सात महीने से चल रहा है । मधेशी मोर्चा ने नाकाबन्दी की ताकि सरकार पर दवाब बनाया जा सके किन्तु सरकार कालाबाजारी से देश चला रही है और एक्यबद्धता के साथ एक समुदाय विशेष खामोशी से सरकार का साथ दे रही है । सरकार को मधेश की जनता की परवाह नहीं है उसे अपनी मझदार में डूबती हुई कुर्सी दिख रही है और जिसे बचाने की उम्मीद पड़ोस से की जा रही है, यह क्या है ? कमजोर होती नाकाबन्दी और सरका द्वारा मधेश आन्दोलन की उपेक्षा मधेशी नेताओं को सीमावर्ती भारतीय राज्य बिहार के प्रश्रय में ले गई है क्योंकि नाकाबन्दी को मजबूती प्रदान करने में बिहार की एक महत्वपूणए भूमिका हो सकती है । एक नेशनल हाइवे बिहार और नेपाल की सीमा को जोड़ती है और अगर बिहार ने सख्ती की तो यहाँ की अस्त व्यस्त जिन्दगी पर गहरा असर पर सकता है ।
इतना ही नहीं बिहार और मधेश के रिश्ते की वजह से भी बिहार मधेश की स्थिति से अनभिज्ञ नहीं रह सकता है यह बात बिहार के नेताओं ने जाहिर कर दी है । जनता दल के उपाध्यक्ष और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश सिंह ने मुज्जफरपुर के कार्यक्रम में कहा कि हमारे नाते कुटुम्ब मर रहे हैं मधेश में ऐसे में यह नेपाल का आन्तरिक मामला कैसे हो सकता है ? जहाँ चौबिस लाख बेटे बेटियों की शादियाँ हुई हैं वहाँ जो समस्या हो रही है उसे हम अनदेखा कैसे कर सकते हैं ? उनकी समस्या से हमारा दिल दुखता है । सिंह ने कहा कि मधेश आन्दोलन में सरकार को दमन बन्द कर के वार्ता के द्वारा समस्या का समाधान निकालना चाहिए । मधेशी दलों से अपेक्षा की गई कि वो महागठबन्धन बनाएँ और काठमान्डौ का घेराव करें । इस आवश्यकता को तो मधेश की जनता बहुत अच्छे से महसूस कर रही है । क्योंकि संगठन ही विश्वास भी बढाती है और जीत भी दिलाती है ।
मधेशी मोर्चा के नेताओं का पटना में लालू से मोदी तक का भेट का सफर
मधेश आन्दोलन के पक्ष में माहौल बनाने, सहयोग और सदभाव जुटाने मधेशी मोर्चा के शीर्ष नेता पिछले दो दिनों से बिहार के दौरे पर हैं। मधेश आन्दोलन में बिहार की जनता से लेकर नेता तक राजनीतिक दल से लेकर सरकार तक ने जो सहयोग, समर्थन और सदभाव दिखाया उससे उत्साहित मोर्चा के शीर्ष नेता बिहार के दौरे पर हैं।
मीडिया फर बॉर्डर हार्मोनी के निमंत्रण पर बिहार दौरे पर रहे मधेशी मोर्चा के नेताओं ने बिहार की सत्ता साझेदार राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव से लेकर बिहार में भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी तक से मुलाकात हुई। लालू यादव के साथ मुलाकात में उन्होंने मधेशी जनता पर हो रहे चरम दमन पर दुख व्यक्त किया। अधिकार और न्याय के लिए हो रहे मधेश आन्दोलन के प्रति अपना पूर्ण सदभाव और समर्थन रहने की बात कही। लालू ने कहा कि मधेशी जनता की मांग को पूरा करने के लिए भारत सरकार क्या कुछ भूमिका निर्वाह कर सकती है इस बारे में वो भारत सरकार से बात करेंगे। उन्होंने बताया कि वो सोमवार को ही दिल्ली जाने वाले हैं और वो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज व गृहमंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत करेंगे।
भेंट के दौरान मधेशी मोर्चा के नेताओं ने नेपाल सरकार के द्वारा किए गए दो संशोधनों को अपर्याप्त बताते हुए इस संशोधन से बात और बिगडने की धारणा रखी थी। लालू ने कहा कि मधेश आन्दोलन के समर्थन में सीमावर्ती इलाके में कम से कम चार-पांच स्थानों पर सभा करेंगे। मधेशी मोर्चा के नेताओं ने मंगलवार को बिहार भाजपा के प्रभावशाली नेता सुशील मोदी से मुलाकात की। करीब दो घंटे तक चली इस मुलाकात के दौरान संविधान संशोधन और मोर्चा की आगामी रणनीति पर अपनी जिज्ञासा रखी। मोदी ने विस्तार से जानना चाहै कि आखिर संविधान संशोधन में कहां कमी रह गई। मोर्चा के नेताओं ने संविधान संशोधन मधेशी जनता के साथ धोखा होने की बात कही। नेताओं ने बताया कि जिन मुद्दों को संबोधन करने के लिए संविधान संशोधन किया गया है वह मुद्दा और उलझ गया है। मधेशी नेताओं ने स्पष्ट किया कि मधेशी की मांग पूरा नहीं होने तक आन्दोलन जारी रहेगा। सुशील मोदी ने बताया कि मधेश मुद्दे पर भाजपा काफी गंभीर है और मधेश का मुद्दा सुलझाने के लिए हर सकारात्मक पहल करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में वो भाजपा के शीर्ष नेताओं से भी चर्चा करेंगे।समग्र मधेश एकबार फिर उठ खड़ा हुआ है ।
एक बार फिर रंगेली जैसी घटना की पुनरावृति के आसार नजर आ रहे हैं क्योंकि काँग्रेस अधिवेशन का मोर्चा द्वारा विरोध और काँग्रेस का पुलिस प्रशासन के सहयोग से कार्य को अंजाम देने की स्थिति असहज वातावरण पैदा कर सकती है क्योंकि आजतक पुलिस ने धैर्य का परिचय नहीं दिया है ।
Dr.Shweta Dipti is Editor of Himalini Hindi magazine from Nepal . Dr. Dipti is also former Head of Department of Hindi in Tribhban University at Kirtipur campus, Kathmandu.