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गाँधी के देश में लोकतन्त्र से छेडखानी : कैलाश महतो

 

कैलाश महतो,परासी, २५ फरवरी |

दुनियाँ के सबसे मजबूत लोकतन्त्र की भूमि माने जाने बाले गाँधी के देश भारत में भी नेपाल के प्र्र्रजातन्त्र दिवस, राजा विक्रमादित्य के वि.सं. २०७२ फाल्गुण ७ गते तदानुसार हिन्दुस्तान के नाम से भी प्रख्यात मूल्क के ई.सं. २०१६ फेबररी १९ के दिन नेपाली उपनिवेश में रहे मधेशी समुदाय के उपर शदियों से नेपाली राज्य, उसके शासन और शासक, प्रशासक, प्रहरी, नेपाली समाज और उसके खस नश्लद्वारा लादे गये रंगभेद, भाषाभेद, रोजगारभेद, पहचानभेद, पोशाकभेद, संस्कृतिभेद, शिक्षाभेद, व्यवहारभेद और अस्तित्वभेद समेत के खिलाफ शदियों से उठ रही मधेशी आवाजों को दमन करने बाले नेपाली शासन के विरुद्ध आवाज उठती आ रही है । हाल फिलहाल मधेश में जारी मधेश आन्दोलन को ही आधा वर्ष से ज्यादा होने लगा है, मगर नेपाल के शासन को इससे न कोई ताल्लुकात है, न तो भारतीय सरकार को कोई फिक्र ।

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अपने जन्मजात और मौलिक हक अधिकार माँगने बाले सैकडों मधेशियों को नेपाली राज्यद्वारा गोली का शिकार बनाया जाता है, उनके साथ बद्तमिजी और अन्याय किया जाता है । मधेशियों के दुःख, कष्ट और परेशानियों में मधेश से सटे बिहार और उत्तर प्रदेश के जनता किसी न किसी रुप में मधेशियों के साथ हैं । मगर केन्द्रिय सत्ता को नजाने कौन सी परेशानी है कि गाँधी के भूमि पर न्याय का आशा करने बालों के उपर अन्याय का ट्रेलर दिखाया जाता है । भारतीय प्रशासन के रबैयों से हम मधेशीयों को आश्चर्य हो रहा है कि अंगे्रज के जिस अत्याचारपूर्ण उपनिवेश से भारत और भारतीय को मुक्ति दिलाने के लिए गाँधी को जन्म लेना पडा, उन्हीं गाँधी के विश्वास को कठघरा में खडे करने की कोशिश की जाती है । मगर गाँधी तो वो आँधी है जो हर अत्याचार के खिलाफ तूफान खडा कर सकता है तब तब – जब जब संसार में स्वराज की चीर हरण होगी, औपनिवेशिता की अत्याचार राज्य करने की दुस्साहस करेगी ।

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गाँधी के भूमि को हम इसलिए भी लोकतन्त्र की सबसे पवित्र भूमि मानते हैं कि संसार पर विजय पाने निकले सिकन्दर तथा दुनियाँ पर औपनिवेशिक शासन करने बाले अंगे्रजों को भी भारतीय बहादुरों ने, वहाँ की (मनु) झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई ने और न्यायपूर्ण राज्य और राजनीतिक व्यवस्था के देवता गाँधी ने आततायीयों को परास्त कर अद्वितीय रुप में लोकतन्त्र की स्थापना की । मगर दुःख की बात है कि जिन अंगे्रजों ने लोकतन्त्र की मूल्य और मान्यताओं को अपने पञ्जे में दबाकर भारत पर शासन किया, वो अंग्रेज इतना लोकतान्त्रिक हो गये कि अंगे्रजी भूमिपर दुनियाँ के राजनीतिक मञ्चों पर गरजने बाले शेरों में गिने जाने बाले एक शेर, नरेन्द्र मोदी, के विरोध में गैर आवासीय भारतीय लोगोंद्वारा काले झण्डे दिखाए जाने पर वो इंग्ल्याण्ड जनता की लोकतान्त्रिक अधिकार मानती है और वहाँ कोई गिरफ्तारी नहीं होती है । मुझे लगता है भारत को आज इंग्ल्याण्ड से लोकतन्त्र की भावना और जनता की शक्तिके बारे में सिख लेनी चाहिए ।

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निःसन्देह भारत लोकतन्त्र की एक पवित्र भूमि है । लेकिन लोकतन्त्र तब ही अर्थपूर्ण हो सकता है जब उसकी सुगन्ध से इर्दगिर्द के वातावरण सुगन्धित हाें । फूलों पर भँवरें इस लिए मंडराते हैं क्यूँकि उसमें आकर्षण शक्ति होती है, सुगन्ध बिखेरकर वो भँवरे से यह कहती है कि मेरा आकर्षण और मीठी वासनाओं को संसार में फैलाओ । लोकतन्त्र की भारतीय सुगन्ध को भारत जितना फैलने देगा, लोकतन्त्र की मजबूती और भारत की प्रसिद्धी उतनी ही विशाल होना तय है ।

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नेपाली शासकों द्वारा मधेशियों पर लादे गये विभेद, अत्याचार और दुराचार वो गन्दगी है जो सिर्फ और सिर्फ कुवासना और बदबु ही फैला सकता है, जिससे भारत चाहकर भी नहीं बच सकता ।

भारत वो विशाल समुन्द्र है जहाँ किसी भी उँचाई पर राज करने बालों को बहकर जाना निश्चित है । किसी के रोकने की धमकी से भी वह रुक नहीं सकता, जो भारत को सिखने की बात नहीं है, समझने की बात है । छोटेमोटे स्वार्थ के कारण भारत अपने पडोस में गन्दगी नहीं फैलने देगी, यह हमारा विश्वास है ।

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