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मिथिला में नारी की अवस्था, केवल अपने घर का एक कोना चाहिये : डा दीप्ति

 

विजेता चौधरी, काठमांडू, फागुन २५ |

अन्तराष्ट्रीय नारी दिवस के अवसर पर मिथिला के अनुपम डेग नामक साहित्यिक संस्था द्वारा मिथिला में नारी की अवस्था ः चिन्ता एवम् उपाय विषय के उपर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया ।mahila-1

अनौपचारिक रूप से आयोजित उक्त कार्यक्रम की प्रमुख वक्ता साहित्यकार, सम्पादक व प्राध्यापक डा. श्वेता दीप्ति ने अपने विचार रखते हुये कहा कि – आधी आवादी को अगर कुछ चाहिये तो अपने घर का आधा कोना । हमारा कोना परिवार नहीं देगा तो हम राज्य से वा सरकार से क्या मांगेंगे ?

dhirendra-premarshiमहिलाओं के वर्तमान अवस्था को वताते हुये डा. दीप्ति ने कहा– हम महिलायें घर और बाहर भी मानसिक व शारीरिक रूप से शोषित होते है और ये रोजाना होता है । तो उससे लड़ना भी हम ही को है और उस तकलीफ को जताने की हिम्मत भी हम महिलाओं को ही करना पडेÞगा । अपने विचार रखते हुये उन्होंने कहा कि हम बेटियों के सुरक्षित भविष्य की बात क्यों नहीं करते ? हमे उनकी शादी की चिन्ता नहीं करनी चाहिए वरन् आत्मबल देना होगा उसे आत्म सुरक्षा की बात सिखानी होगी, शिक्षा में जोर देना होगा । उन्होंने शादी स्वतन्त्रता के लिए महिलाओं को लड़ने की बात बताते हुये कहा कि इन सभी अधिकार के लिए युवा पीढ़ी को ही आगे आना होगा ।

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दूसरी वक्ता पूर्व सभासद सरस्वती कुमारी चौधरी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि माँ के नाम से नागरिकता एवम् बेटियों को अंश वंश के लिए हम लोग जनयुद्ध काल से संविधान लेखन तक लगे रहे पर अन्ततः लिखवा नही पाये, चौधरी ने अफसोस जताते हुये कहा कि ये है नेपाल मे महिलाओं की स्थिति । उन्हाेंने महिला हिंसा के विरुद्ध कानुन होते हुये भी कार्यान्वयन नहीं होने की वजह से महिला कानुनी रुप से भी शोषित होने की बात बतायी ।

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bijetaसाहित्यकार तथा गायिका रुपा झा ने अपना मन्तव्य रखते हुये कहा कि मधेसी आन्दोलन के दौरान मैथिल महिलायें जिस प्रकार से आन्दोलन में सहभागी हुई इस से महिलाओं मे चेतना का स्तर स्पष्ट दर्शाता है । पुलिस प्रशासन की मनमानी को उजागर करती हुई झा ने कहा कि आन्दोलन के दरमियाँ पानी पिलाने वाली व महिला सशक्तिकरण में लगी महिला रामशिला जैसी महिला को गोली मार दिया गया इससे मधेसी महिला के प्रति पुलिस प्रशासन की अवस्था दर्शाती है ।

चर्चित साहित्यकार, गीतकार धिरेन्द्र प्रेमर्षि अपना विचार रखते हुये कहा कि आज के युवा वर्ग को सचेत होना जरुरी है । पैतृक सम्पत्ति में बेटियों के हक पर जोर देते हुये उन्होंने बताया कि महिला को सक्षम होना सबसे अपरिहार्य है । उन्होंने महिलाओं के स्वनिर्भरता पर जोर दिया ।

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इसी क्रम में हिमालिनी से सम्बद्ध पत्रकार विजेता चौधरी ने अपनी धारणा व्यक्त करते हुए कहा कि वैवाहिक निर्णय की छूट लड़कियों को मिलनी चाहिए । कम से कम उनकी इचछा को परिवार में अवश्य जगह मिलनी चाहिए ।

shweta-3हेमन्त झा ने सम्पूर्ण कार्यक्रम पर सmahla-4मीक्षात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत की ।m11mahila-3rupa-jha

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