Tue. Jun 23rd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

राज्य की व्यवस्था को महिला आत्मसात् नहीं कर पाई

 
Mina swarnikar
मीना स्वर्णिकार समाज सेवी

मीना स्वर्णिकार
समाज सेवी
नया संविधान हमारे सामने आया पर हम इसका आनन्द नहीं ले पाए । हमने बहुत भोगा है । हम जानते हैं कि इस देश की महिला चाहे वह किसी भी वर्ग समुदाय की हो मधेशी हो, मुस्लिम, आदिवासी, जनजाति हो सभी समाज और देश के विभेदपूर्ण नीति को झेलती आई है और सदियों से पीडि़त है । हमने सड़क से अपनी आवाज बुलँद की । हमारे कपड़े फटे, हमारा दमन किया गया फिर भी सत्ता ने हमें कुछ नहीं दिया है । पर आश्चर्य है कि इस बात पर जिस प्रतिबद्धता के साथ आवाज उठनी चाहिए थी वो नहीं हो पाया । राज्य के द्वारा किए गए किसी भी व्यवस्था को यहाँ की महिला आज तक आत्मसात नहीं कर पाई है । सत्तानसीन जो महिला प्रतिनिधि हैं वो पार्टी के प्रभाव में रहकर नारी के पक्ष में खड़ी नहीं हो पाई । इस देश को अपनी पुरानी सोच से बाहर निकलने की आवश्यकता थी किन्तु आज तक यह देश अपना केंचुल नहीं बदल सका है । जो संविधान आया उसमें कोई भी ऐसी नई सोच नहीं थी जिसे पाकर महिला इस देश में अपनी महत्ता सिद्ध कर सके । हर तरह से महिला प्रतिनिधित्व को नकारा गया है । हम आज भी लड़ रहे हैं । सबसे अधिक जो पीडि़त हैं महिला चाहे वो पहाड़ की हों या तराई की । आज भी राज्य अपने संकीर्ण सोच के साथ चल रहा है और इसी संकीर्ण सोच के साथ संविधान का निर्माण किया गया है ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.